झाबुआ~तपे तपाये कांति को दे रहा भानू चुनौति-कल्याण कहीं बिगाड न दे भाजपा का जमा जमाया खेल~~





प्रचार कार्य हुआ तेज गा्रम गा्रम में चल रहा जन संपर्क~~





झाबुआ। संजय जैन~~

झाबुआ विधानसभा उप-चुनाव के तहत नाम वापसी के बाद 5 उम्मीदवार मैदान में है। जिसमें मुख्य मुकाबला तीन प्रत्याशियों कांग्रेस से कांतिलाल भूरिया, भाजपा से भानु भूरिया और निर्दलीय प्रत्याशी कल्याणसिंह डामोर के बीच है। इसको लेकर जिलेभर में चर्चाओं का दौर है कि क्या दिग्गज नेता अर्थात कांतिलाल भूरिया पर युवा चेहरा अर्थात भानु भूरिया भारी पड़ पाएगा....? वहीं निर्दलीय उम्मीद्वार कल्याणसिंह डामोर भाजपा का खेल बिगाडऩे का काम करेंगे.....?





   -मतदाता भी जागरूक है अब...... 





उधर नामांकन वापसी के बाद सभी प्रत्याशी झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में तेजी से प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में जुट गए है।





झाबुआ विधानसभा उप-चुनाव को लेकर मतदान 21 अक्टूबर को होना है, मतदान में 16 दिन शेष रह गए है, इसी बीच ही प्रत्याशियों और उनकी पार्टी को पूरी ताकत झौंकना होगी एवं अपना-अपना शक्ति प्रदर्शन कर मतदाताओं को आकर्षित करना होगा। चूंकि अब वह समय नहीं रहा है जब चुनाव में मतदाता पाटी्र का चुनाव चिन्ह देखकर ही मतदान कर देते थे। समय के साथ अब मतदाता भी जागरूक हुए है, वह अपना अमूल्य वोट देने से पूर्व प्रत्याशी की योग्यता,अनुभव एवं उसकी मिलनसारिता,उसके स्वभाव और विशेषकर क्या वह क्षेत्र का विकास करेगा या नहीं.....? यह मापदंड अब चुनाव में मतदाताओं द्वारा ऑकलन करने के बाद ही वोट दिया जाता है।





  -दोनो पार्टियों के दिग्गजों की नजर चुनाव पर.....





एक तरफ  जहां निर्वाचन को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न करवाने के लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा हर संभव प्रयास करने के साथ आवश्यक इंतजामात (व्यवस्थाएं) की जा रही है तो राजनैतिक पार्टियां, जिसमें प्रमुख रूप से भाजपा एवं कांग्रेस के दिग्गज एवं आला नेता-पदाधिकारियों की नजर इस चुनाव पर टिकी हुई है। वहीं जनचर्चाओं का बाजार भी पूरी तरह से गर्म है। इस चुनाव की चर्चा ना केवल झाबुआ और आलीराजपुर जिले अपितु भोपाल और दिल्ली में भी है।





   -दिग्गज नेता के सामने युवा चेहरा.....





झाबुआ विधानसभा के उप चुनाव में मुकाबला दिग्गज नेता वर्सेस युवा चेहरे के बीच है। दिग्गज नेता अर्थात पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व सांसद कांतिलाल भूरिया, जिनका राजनैतिक कैरियर दशकों पुराना है,जिनकी तूती ना केवल भोपाल अपितु दिल्ली में भी बोलती है,उनका मुकाबला भाजपा की ओर से खड़े उम्मीद्वार भाजयुमो जिलाध्यक्ष युवा भानु भूरिया से है। जिनका राजनीतिक अनुभव हॉलाकि कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया से काफी कम है,लेकिन उनका तेज-तरार्ट व्यक्तित्व एवं चुनाव जीतने के उनके प्रबल दावे निश्चित ही कांतिलाल भूरिया की जीत का रोड़ा जरूर है। उधर निर्दलीय प्रत्याशी कल्याणसिंह डामोर,जो भाजपा से टिकीट नहीं मिलने पर अब निर्दलीय अपना भाग्य आजमा रहे है, निश्चित तौर पर वह भाजपा के लिए बड़ा रोड़ा इस चुनाव में बनेंगे। जिस तरह से पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के युवा नेता डॉ. विक्रातं भूरिया की हार का कारण जेवियर मेड़ा बने थे,वहीं इस बार युवा भाजयुमो नेता भानू भूरिया यदि हारते है, तो कहीं ना कहीं इसका कारण निर्दलीय प्रत्याशी श्री डामोर को भी माना जा सकेगा।





    -धुआंधांर जनसंपर्क और प्रचार-प्रसार.....





उधर तीनों ही उम्मीद्वारों ने झाबुआ विधानसभा क्षेत्र में अपना धुआंधार प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क तेज कर दिया है। कांग्रेस की ओर से स्वयं उनके परिवारजनों में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना भूरिया, पुत्र डॉ. विक्रातं भूरिया यहां तक की बहू डॉ. शीना भूरिया ने भी प्रचार-प्रसार की कमापन संभाल रखी है तो वहीं जिला कांग्रेस कमेटी, एनएसयूआई, महिला कांग्रेस, सेवा दल के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया के साथ प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क में सत्त लगे हुए है। दूसरी ओर भाजपा की ओर से सांसद गुमानसिंह डामोर, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा एवं पूरा भाजपा संगठन एवं राजगढ़ नाका लाभी तथा विशेषकर भारतीय जनता युवा मोर्चा की पूरी टीम भाजपा प्रत्याशी भानु भूरिया को जीताने के लिए पूरी कमान सभाले हुए है। उधर निर्दलीय प्रत्याशी कल्याणसिंह डामोर भी अदरूनी जनसंपर्क और प्रचार-प्रसार में जुटे हुए है। प्रचार-प्रसार के लिए पार्टियों और उनके उम्मीद्वारों के पास एक पखवाड़े के समय शेष है, क्योकि मतदान दिवस के 48 घंटे पहले प्रचार-प्रसार और जनसंपर्क पूरी तरह थम जाएगा। 21 अक्टूबर को प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा और 24 अक्टूबर को उसके परिणाम सामने आएंगे।





      *** २०१३  झाबुआ विधानसभा चुनाव*** 





-२०१३ के चुनाव में कांग्रेसी गढ़ मे भाजपा ने खिलाया था कमल,आपसी भितरधात ने ढहा दिया था कांग्रेसी किला 





२०१३ के चुनाव में कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांतीलाल भूरिया के गृह नगर में ही कांग्रेस का सूपड़ा साफ  हो गया था। पहली बार विधायक का चुनाव लड़े भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी शांतीलाल बिलवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी कांग्रेस के पूर्व विधायक जेवियर मेड़ा को १४,६२९ मतों के भारी अंतराल से पराजित कर भाजपाई विजय पताका लहरायी थी। भाजपा के बिलवाल को ५६,५८७ मत कांग्रेस के जेवियर मेड़ा को ४१,९५८ मत एंव कांग्रेस की बागी कलावती भूरिया को १८,३११ मत प्राप्त हुए थे। 





            *** २०१८  झाबुआ विधानसभा चुनाव*** 





कांग्रेस के निर्दलीय जेवियर मेडा ने 35 हजार 462 वोट कांग्रेस के काटने में कामयाबी हासिल की। वही भाजपा के पैराशुट उम्मीदवार के रूप में प्रचारित किये गये एक माह पूर्व ही इस विधानसभा में दस्तक देने वाले इंजीनियर गुमानसिंह डामोर ने 65 हजार 725 से अधिक मत 26 वे राउंड तक हासिल कर लिये थे तथा कांग्रेस के उम्मीदवार एवं सांसद कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया जिन्हे सांसद कांतिलाल ने पुरे समय यही रहकर विजयी बनाने के लिये दिन रात मेहनत की,को मात्र 55 हजार 600 मत मिले ओर 26 वे राउंड तक गुमानसिंह डामोर भाजपा प्रत्याशी के रूप मे 10 हजार 125 मतो से डॉ.भूरिया को मैदाने जंग में हराने में कामयाब रहे और जिले में भाजपा की नाक बचाने में गुमानसिंह डामोर की अहम भुमिका रही। यदि कांग्रेस के बागी जेवियर मेडा बगावत नही करते तो कांग्रेस निश्चित रूप से 92 हजार के करीब वोट हासिल करके झाबुआ सीट को भी फतैह कर सकती थी। किन्तु पुत्र-मोह ओर अति आत्मविश्वास ने कांग्रेस के किये कराये पर पानी फेर दिया। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांतीलाल भूरीया के गृह नगर झाबुआ विधानसभा में ही कांग्रेस का सूपड़ा साफ  हो गया है। पहली बार विधायक का चुनाव लड़े भाजपा के अधिकृत प्रत्यााशी इंजीनियर जीएस डामोर ने अपने निकटतम प्रतिद्धंदी झाबुआ की राजनीति के चाणक्य कांग्रेसी संासद कांतिलाल भूरिया के पुत्र कांग्रेस के डॉ.विक्रांत भूरिया को 10 हजार 125 मतो मतों के अंतराल से पराजित कर भाजपाई विजय पताका लहरायी।





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