बड़वानी~अवकाश के दिन भी कार्यषाला, प्रषिक्षक प्रीति ने कहा बिना ब्रेक के किया गया अभ्यास देता है निपुणता~

बड़वानी / शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में संचालित की जा रही अल्पावधि रोजगारोन्मुखी रंगकर्म प्रषिक्षण कार्यषाला में आज रविवार को भी भीमा नायक नाट्य दल के सदस्यों प्रीति गुलवानिया, ग्यानारायण शर्मा, अंतिम मौर्य, डाॅ. प्रवीण मालवीया, ज्योति जोषी उपाध्याय और डाॅ. मधुसूदन चैबे द्वारा प्रषिक्षण दिया गया। गुलवानिया ने कहा कि जब कोई नई विधा सीखी जा रही हो तो उसमें निरंतरता आवष्यक है, अतः आज अवकाष के दिन भी हमने कार्यषाला अयोजित की जिसमें प्रषिक्षुओं ने प्रातः 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक चार घंटे प्रषिक्षण प्राप्त किया। बिना ब्रेक के किया गया अभ्यास ही निपुणता प्रदान करता है। ग्यानारायण शर्मा ने प्रषिक्षुओं को नाटक के दौरान प्राॅपर्टी के प्रयोग के संबंध में दिषा निर्देष देते हुए आवाज के आरोह-अवरोह के बारे में बताया। अंतिम मौर्य ने संगीत संयोजन, ज्योति जोषी ने नाटक में नृत्य के प्रयोग, डाॅ. प्रवीण मालवीया ने भावाभिव्यक्ति के बारे में बताया।
डाॅ. मधुसूदन चैबे ने कहा कि नाटक में संवाद बोलते वक्त लिया जाने वाल पाॅज या विराम बहुत मायने रखता है। किसी छोटे या बड़े संवाद को कितने पाॅज के साथ पूरा करना है और अलग अलग विराम कितनी अवधि का लेना है, यदि यह बात समझ में आ जाये तो संवाद का प्रत्येक शब्द दर्षकों तक पहुंचता है और साथी कलाकार को रिएक्ट करने के लिये पर्याप्त समय मिलता है और विभिन्न पात्रों के संवाद ओवरलेप नहीं होते हैं। ग्यानारायण शर्मा ने दो सड़क दुर्घटना तथा पर्यावरण शुद्वता पर दो लघु नाटक तैयार करवाते हुए व्यावहारिक रूप से प्रषिक्षण दिया। प्रषिक्षु नंदिनी अत्रे, राहुल वर्मा, सूरज सुल्या, जितेंद्र चैहान, कोमल सोनगड़े, दीपिका धनगर, भूमिका शर्मा आदि की प्रगति प्रषंसनीय है। उन्होंने कहा कि आज के रविवार के अवकाष का सार्थक उपयोग हुआ। बहुत सीखने को मिला और आनंद आया।


Post A Comment:

0 comments: