*झाबुआ~थांदला नगर परिषद का भरष्ट्राचार का बड़ा कारनामा*~~

*केशव उद्यान 15 सालो में जनता के लिए खुला ही नही, लाखों का हो गया व्यय*~~

*65 लाख का बगीचा निर्माण के बाद नही खुला*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा की रिपोर्ट.....9685952025~~

थांदला भरष्ट्राचार,अनियमितता, मनमाने कार्यो के लिए पिछले एक दशक से समाचार-पत्रो व शोसल मीडिया में पूरे प्रदेश में सर्वाधिक चर्चित थांदला की नगर पंचायत परिषद के काले कारनामे थमने का नाम ही नही ले रहे है । भाजपा अध्यक्ष व कांग्रेस की बहुमत वाली इस वर्तमान परिषद से नगर की आम जनता का मोह भंग हो गया है । नगर विकाश की सभी आशाए धूमिल हो चुकी है । वर्तमान परिषद के ढाई वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धि यही कहि जा सकती है कि सिवाय अनियमित्ता,भरष्ट्राचार, मनमानी के अलावा कुछ नही हो रहा है । नेता प्रतिपक्ष से लेकर परिषद के चुने पार्षदगण या नगर व क्षेत्र के कोई नेता जनप्रतिनिधी विरोध अथवा सुधार पर भी चुप्पी साधे बैठे है । हाल ही में इस निकाय में बड़े पैमाने पर एक कारनामा सामने आया है जिसमे लाखो के हेर-फेर से इनकार नही किया जा सकता है ।

*4 माह में आरटीआई की जानकारी दी*

इस प्रतिनिधि ने सूचना के अधिकार के तहत जब नगर परिषद से वर्ष 2018-19 की कैशबुक की प्रमाणित छाया प्रति की मांग की तो प्रभारी मुख्य नपा अधिकारी अशोक चौहान द्वारा लगातार टालमटोल कर वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने व नियमो का हवाला देकर कैशबुक की जानकारी देने से इनकार कर दिया परन्तु जब उन्हें सूचना के अधिकार अधिनियम बताए तब करीब 4 माह पश्चात उक्त कैशबुक की प्रति प्रदान की गई ।

*65 लाख का बगीचा निर्माण के बाद नही खुला*

नगर पंचायत परिषद की कैशबुक का जब अवलोकन किया गया तो उसमें लाखो रुपये की मितव्ययिता के आंकड़े देख आँखे ही चुंधिया गई । अगर इन आकड़ो से सम्बंधित कार्यो व खरीदी की जांच उच्च स्तर पर हो 6 तो लाखो के भरष्ट्राचार से इनकार नही किया जा सकता है ।
वर्ष 2000 में दिग्विजयसिंह (कांग्रेस) शासन काल मे नगर में 65 लाख की लागत से जनता की सुविधा व बच्चो के मनोरंजन हेतु बगीचे का निर्माण शुरू किया गया था जिसमे झूला, चकरी, बच्चो की रेलगाड़ी, कसरत की सामग्री, शेड, आदि का निर्माण किया गया था । 2005 में बगीचे का निर्माण पूर्ण होकर जनता के लिए खोला जाना था । परन्तु प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से बगीचे का नामकरण "केशव उद्यान" तो कर दिया गया परन्तु भाजपा के शासनकाल में भी उक्त बगीचा जनता के लिए कभी नही खुला ।
वर्ष 2010 में परिषद ने एक प्रस्ताव के माध्यम से बगीचे का संचालन निजी हाथों में सौपने का निर्णय लेकर बदनावर की एक फर्म को लीज पर दे दिया गया परन्तु उक्त फर्म इसके रख रखाव व व्यवस्था पर खर्च अधिक व आमदनी कम होने के चलते अनुबंध छोड़कर गायब हो गई ।

*बगीचे से लाखो की सामग्री चोरी*

लावारिश हालत में पड़ा यह "केशव उद्यान" शराब व गांजा चिलम लगाने वाले नशेड़ियों का अड्डा बन चुका था परन्तु परिषद इसका संचालन करने में असमर्थ ही रही । इसी दौरान लावारिश बगीचे से बोरिंग की मोटर पम्प, पाइप लाइन, रेल का इंजन, झूले चाकरी की मोटर, खेल सामग्रियों की चोरी हो गई जिनकी कीमत लाखो रुपया थी । परिषद के जिम्मेदारों ने इस चोरी की पुलिस में न तो रिपोर्ट करना उचित समझा और न पता लगाने का प्रयास किया । जनता के धन की बर्बादी पर सभी जनप्रतिनिधो ने चुप्पी साध ली ।

*बगीचे पर लाखो का व्यय बरकरार*

2005 में लाखो की लागत से निर्मित जो बगीचा कभी जनता के लिए खुला ही नही जिस बगीचे में नगर के बच्चो ने एक दिन भी झूला-चकरी या रेल में बैठने का आनंद नही लिया, जिस बगीचे में नगर के युवाओं ने कभी कसरत का लाभ नही लिया, जिस बगीचे में कभी नगर की बहन-बेटियों, महिलाओं ने पाव नही रखा उस बगीचे के रख रखवा व सामग्री क्रय के नाम पर प्रतिवर्ष लाखो रुपय्या नगर पंचायत की कैशबुक में व्यय होना बताया जाना यह खुला भरष्ट्राचार नही है तो आखिर क्या है ?
कैशबुक बता रही है 18 मई 2018 को बगीचे की सामग्री खरीदी हेतु व्हाउचर क्रमांक 100, 101, 102 के माध्यम से 2 लाख 21 हजार 200 रुपये का भुगतान किया गया । क्या  सामग्री थी का कहि उल्लेख नही किया गया । 16 नवम्बर 2018 को साँवरिया ब्रिक्स नामक फर्म को बगीचे में काली मिट्टी डालने के नाम पर 4 लाख 1 हजार 310 रुपये का भुगतान व्हाउचर क्रमांक 463 के माध्यम से किया जाना दर्शाया गया है । यही नही बगीचे के रख रखाव, चौकीदार, माली के नाम से भी प्रतिमाह राशि खर्च करना दर्शाया जा रहा है । करीब 3 लाख 20 हजार की राशि मुरम डालने में खर्च हो चुकी है । जब उक्त बगीचा आज तक जनता के लिए कभी खोला ही नही तो आखिर यह भुगतान कैसे व क्यो हुआ यह जांच का विषय होकर गम्भीर अनियमितता का मामला है ।

*उचित जांच की दरकार*

प्रदेश की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्रीजी व नगरीय प्रशासन मंत्री ने हाल ही में थांदला नगर के विकास के लिए 6 करोड़ की राशि के आवंटन की अनुशंषा की है व कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए है । अच्छा हो इस राशि के आवंटन के पूर्व नगरीय प्रशासन विभाग, प्रदेश शासन व जिला प्रशासन अभी तक आवंटित राशि के विकास व्यय व इन घोटालो की उच्च स्तरीय जांच करवा लें व दोषियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करे ।

*लोकायुक्त जांच विचाराधीन है*

स्मरण रहे पूर्व में भी नगर पंचायत परिषद के भरष्ट्राचार की शिकायत लोकायुक्त व शासन प्रशासन को होने पर जांच में गम्भीर अनियमितता सामने आई थी जिस पर लोकायुक्त में दो पार्षदों सहित आधिकारियो, कर्मचारियों पर प्रकरण दर्ज होकर निलंबित किया गया था । उक्त मामला आज भी न्यायालय में व लोकायुक्त में विचाराधीन चल रहा है ।


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