झाबुआ~नगर में आवारा पशुओं की भरमार की तरफ  ध्यान देने की बजाय-नगरपालिका पकड रही कुत्तों को~~





नगर का दुर्भाग्य कहे या नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही या अनदेखी......नगरपालिका का एक मात्र कांजी हाउस भी बेच दिया गया ~~





झाबुआ। संजय जैन~~

नगर का दुर्भाग्य कहे या नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही या अनदेखी, पूरे नगर के व्यस्ततम चौराहों से लेकर उत्कृष्ठ स्कूल मार्ग, सज्जन रोड, राजवाडा चौक, थांदला गेट, राजगढ नाका, बसस्टेंड, याने नगर का कोई भी हिस्सा हो वहां दिन उगने के साथ ही दर्जनो की संख्या में आवारा पशु स्वच्छंद तौर पर विचरण करते हुए तथा नगर के यातायात को प्रभावित करते हुए सहज ही देखे जा सकते है। इन आवारा पशुओं ने अभी तक दर्जनों लोगो को चोंटे पहूंचाने का काम किया है तथा समुह मे सडकों पर खडे हो जाने के चलते दुपहिया वाहनों के साथ ही आटो रिक्शा एवं पैदल चलने वाले लोगो को कितनी परेशानिया झेलना पडती होगी...? इसका अंदाजा भी नगरपालिका के जिम्मेवारों को होने के बाद भी अभी तक एक भी पशुपालक के विरूद्ध कोई कार्रवाही नही की गई है। 





नगरपालिका का एक मात्र कांजी हाउस भी बेच दिया गया .....





थांदला गेट स्थित सब्जी मंडी के अलावा थांदला गेंंट,माहेश्वरी मंदिर की गली में भी इन पशुओं को घुमते हुए तथा झगडते हुए देखा जा सकता है । नगरपालिका एक तरफ  स्वच्छ झाबुआ की बात करती है तो दूसरी और इन पशुओं द्वारा जगह जगह पर गोबर, मूत्र विसर्जन करके गंदगी को ही आमन्त्रित किया जाता है। नगर के छोटा तालाब से मनकामेश्वर महादेव मंदिर तक सडकों पर ये आवारा पशु परेशानी का सबब बने हुए है। पिछले लम्बे अरसे से मीडिया द्वारा भी इन आवारा जानवरों को लेकर आवाज भी उठाई गई है किन्तु नगर का दुर्भाग्य है कि नगरपालिका ने आज तक आवारा पशुओं को पकडने के लिये कोई अभियान चलाना भी मुनासीब नही समझा है। नगरपालिका का एक मात्र कांजी हाउंस भी बेच दिया गया है। जिसके चलते आवारा पशुओं के लिये नगर में कांजी हाउस नाम का कोई स्थान ही बाकी नही रहा है जिसमे नगरपालिका इन आवारा जानवरों को इसमे रख सके। 





सौप देना चाहिये आवारा जानवरों को नगर की गौशालाओं को .....





कई बार नगरवासियों एवं पार्षदों ने भी नपा प्रशासन को सुझाव दिया था कि ऐसे आवारा जानवरों को नगर की गौशालाओं को सौप देना चाहिये तथा ऐसे पशु मालिको से दण्ड वसुल कर पशु देना चाहिये। किन्तु नगरपालिका द्वारा इस पर कोई संज्ञान नही लिया जा रहा है। नगर की विवेकानंद कालोनी में दिन हो रात आवारा जानवर सडकों पर ही दिखाई देते है। कालोनी में श्रीमती जसोदाबाई गवली के करीब एक दज्रन से अधिक पशुओं को घर मे रखने की बजाय सडक पर छोड दिया जाता है जिससे कालोनीवासी परेशान है और यह गली गोबर गली के नाम से जानी जाने लगी है। इसी कालोनी में नगरपालिका की एक सफाई कर्मचारी श्रीमती पूनमबेन को सांड ने मार दिया था जिससे उन्हे पूर्व में चोंटे आ चुकी है। किन्तु शिकायत के बाद भी न तो पशुमालिक को नोटिस दिया गया है और ना ही कार्यवाही हुई है ।





निरीह तरीके से कुत्तो को पकड कर पिंजरे में डाला जा रहा ......





इस तरह नगर में आवारा पशुओं पर नियंत्रण करने की बजाय नगरपालिका ने नगर में सडकों पर विचरण करने वाले कुत्तों को ही पकडने का अभियान शुक्रवार से चलाया है और ट्रेक्टर में पिंजरा रख कर सफाई कर्मियों के माध्यम से निरीह तरीके से कुत्तो को पकड कर पिंजरे में डाला जा रहा है । नगर मे कई खुजली वाले कुत्ते भी विचरण करते देखे गये है किन्तु उन्हे पकडने की दिशा में नपा का ध्यान नही है। हालांकी नगर में आवारा पशुओं की तुलना में कुत्तों की संख्या बहुत ही कम है और कुत्ते नियत मोहल्ले में ही रहते है तथा एक तरह से मोहल्ले की चौकीदारी का दायित्व निभाते है। कोई पागल कुत्ता हो तो पकडने की बात समझ में आती है किन्तु नगरपालिका ने नगर में कुत्तों को पकडने का अभियान चला कर एक दिन में 16 कुत्ते पकडने की बात कही है। यह नगर पालिका क्या साबित करना चाहती है .....? यह नगरवासियों की समझ से बाहर है ।










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