बड़वानी~बनें शब्दों के जादूगर, बनायें श्रेष्ठतम कॅरियर~~

बड़वानी /शब्द को ब्र्रह्मस्वरूप माना गया है। विष्व के सम्पूर्ण ज्ञान की अभिव्यक्ति के माध्यम शब्द ही हैं। भावप्रवणता को प्रवाहित करने में भी शब्द ही नदी बनते हैं। शब्द सम्पदा से समृद्ध युवाओं का सम्प्रेषण कौषल सभी को प्रभावित करता है। आप भी शब्दों के जादूगर बनकर श्रेष्ठतम कॅरियर का निर्माण करें। कॅरियर के सभी क्षेत्रों में शब्दों के सही प्रयोग की महत्ता निर्विवाद है।
ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के  स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित परिचर्चा ‘षब्दों की सीढ़ी से चढें़ सफलता के आसमान पर’ में कॅरियर काउंसलर और हिन्दी साहित्य, संस्कृत साहित्य तथा अंग्रेजी साहित्य में एम. ए. डाॅ. मधुसूदन चैबे ने कहीं। प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में आयोजित परिचर्चा में डाॅ. चैबे ने कहा कि अध्यापन, राजनीति, पत्रकारिता, अभिनय, वकालत, व्यापार, व्यवसाय और प्रतियोगी परीक्षाओं के अंतर्गत लिखित परीक्षा तथा साक्षात्कार में सफलता के लिए शब्दों की पूंजी आवष्यक है। हिन्दी भाषा की शब्द सम्पदा प्रचुर है और इसके शब्दों का सौंदर्य अद्वितीय है। पुस्तकालय विषेषज्ञ प्रीति गुलवानिया ने बताया कि मुंषी प्रेमचंद, आचार्य चतुरसेन शास्त्री, जयषंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, नरेंद्र कोहली, षिवाजी सावंत, धर्मवीर भारती, कालिदास, हरिवंषराय बच्चन जैसे साहित्यकारों की रचनाओं का अध्ययन करें। शब्दों का संचय करें। सही शब्द का चयन करके अवसरानुकूल लिखित एवं मौखिक अभिव्यक्ति में उनका प्रयोग करें। परिचर्चा के आयोजन में रवीना मालवीया, कोमल सोनगड़े, वर्षा मालवीया, राहुल मालवीया ने सहयोग दिया।


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