झाबुआ~~प्राकृतिक संपदाओं का खनन ,दोहन व सौंदर्यीकरण नष्ट कर चरनोई भूमि पर कॉलोनी काटी जारी है-चरनोई भूमि निजी हाथों में किस नियम के तहत चली गई~~



चरनोई भूमि को नियम अनुसार बेचा नहीं जा सकता और न ही हो सकती है रजिस्ट्री -दिव्यांग प्रवीण पडियार~~

झाबुआसंजय जैन~~

एक तरफ  सरकार पर्यावरण  सुरक्षा  व सहजने की बात करती है वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर ग्रीन गोल्ड कॉलोनी के कॉलोनाइजर ने दर्जनों हरे भरे पेड़ों की बलि ली। प्रकृति के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की और करीब 30 फीट पहाडिय़ो को खोदकर व चरनोई भूमि पर भूमाफिया ने कॉलोनी काट दी,लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की । उक्त आरोपों के साथ दिव्यांग प्रवीण पडियार ने मुहिम छेडी और एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय इंदौर में दायर की। पूरे मामले को न्यायालय द्वारा संज्ञान में लेकर चेतावनी के साथ बड़ा गंभीर मामला मान कर स्टे दिया गया।

शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान 

दिव्यांग प्रवीण पडिय़ार ने बताया कि जिला प्रशासन पर आरोप लगाते हुए बताया कि हाथीपावा की पहाडिय़ों से सटी रतनपुरा की पहाडिय़ों जिसका सर्वे क्रमांक 6ं/1 ,7/1 और 8 /1 है, को अवैध खनन कर शासन को करोड़ों के राजस्व का नुकसान कर कॉलोनी निर्माण किया जा रहा है जिसकी प्रशासन द्वारा अनदेखी भी की गई है। दिव्यांग प्रवीण पडियार ने यह भी बताया कि प्राप्त दस्तावेज अनुसार शासन के रिकॉर्ड 1959-60 में यह भूमि चरनोई भूमि थी जो नियमानुसार इस जमीन को बेचा ही नहीं जा सकता है। साथ ही साथ इस जमीन की रजिस्ट्री किसी भी नियम के तहत नहीं की जा सकती है। फिर भी झाबुआ शहर में ग्रीन गोल्ड कॉलोनी के नाम पर लोगों को प्रलोभन देकर प्लाट विक्रय करने का प्रयास किया जा रहा है। 

चरनोई भूमि निजी हाथों में किस नियम के तहत चली गई......?  

प्रश्न यह उठता है प्राप्त दस्तावेज अनुसार जब यह शासकीय रिकॉर्ड में चरनोई भूमि है तो यह निजी हाथों में किस नियम के तहत चली गई......?  और किस नियम के तहत यहां पर कॉलोनी निर्माण कर प्लाटों का विक्रय किया जा रहा है ....? प्रवीण पडियार ने देखा कि जब प्रकृति के सौंदर्य को नष्ट किया जा रहा है,साथ ही एनजीटी के नियम विरुद्ध प्राकृतिक संपदाओं का खनन व दोहन कर कॉलोनी निर्माण किया जा रहा है तब दिव्यांग ने इस भूमाफिया के खिलाफ  लड़ाई लडऩे का मन बनाया और एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय इंदौर में दायर की। 

अब देखना है कि प्रशासन ने अपना क्या पक्ष रखा है .......?

उच्च न्यायालय ने प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर चेतावनी के साथ बड़ा गंभीर मामला है मान कर स्टे दिया गया। लेकिन जिला प्रशासन ने उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्टे पर कोई ध्यान नहीं दिया। यह भी बताया कि इस मामले में कई तरह की शिकायतें होने के बाद जिला प्रशासन ने, ना तो प्रकृति के सौंदर्यीकरण को नष्टीकरण करने वालों के खिलाफ  कार्रवाई की और ना ही एनजीटी के नियमों को तोडऩे वालों के खिलाफ ..... प्रवीण पडियार ने बताया कि हाई कोर्ट में मैंने याचिका दायर कर कोर्ट से गुहार लगाई थी जिसमे कोर्ट ने 18 लोगों के खिलाफ  पीआइएल जारी की है जिसकी कल18 नवंबर आखरी तारीख भी थी। अब देखना है कि प्रशासन ने इसमें अपना क्या पक्ष रखा है .......?

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प्राप्त जानकारीनुसार ग्र्रीन गोल्ड कॉलोनी ने अवैध खनन कर प्रशासन को करोडो के राजस्व का नुकसान पहुँचाया गया था। इसी सन्दर्भ में झाबुआ निवासी प्रवीण पडियार की याचिका पर हाई-कोर्ट द्वारा 18 लोगो के खिलाफ  पीआयएल जारी कर 18 नवम्बर 2019 तक कोर्ट के समक्ष उपस्थ्ति हो कर इन्हे जवाब देना था। फिर भी कोलोनाइजऱ बाज नहीं आया है और कोर्ट के आदेश की अवेहलना कर जिले भर में प्लाट बेचने हेतु प्रचार-प्रसार जोर शोर से कर रहा है। जबकि अभी प्रकरण में न्यायलय ने आखरी समय 18 नवम्बर 2019 तक का दिया भी था,तो उसके पहले इस कॉलोनी के प्लाट के क्रय-विक्रय हेतु प्रचार प्रसार कर ही नहीं सकता है। इससे यह बात साफ  है कि कोलोनाइजऱ जल्द से जल्द सभी प्लाट बेचकर बरी जिम्मे हो जाने की साजिश के तहत जनता को प्रलोभन एवं विज्ञापनों के जरिये जैसे-तैसे प्लाट टिका देने भर की फिऱाक में ही है। शायद.....आगे इस कॉलोनी के प्रकरण में कुछ भी गलत निर्णय आए,इससे पहले  ही कोलोनाइजऱ सारे प्लाट बेचकर रफू चक्कर हो जाने की फिऱाक में है ऐसा साफ  प्रतीत हो रहा है। प्रशासन को चाहिए को तुरंत कोलोनाइजऱ को नोटिस जारी कर सारे प्रचार-प्रसार को रोकने का आदेश जारी कर देना चाहिए।   

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शहर में जिस नई कॉलोनी का निर्माण किया जा रहा है संभवत: शासकीय रिकॉर्ड 1959-60 में चरनोई भूमि है। चरनोई भूमि के नियम ......

-चरनोई भूमि पर खुदाई नहीं कर सकते* 

-जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता* 

-केवल पट्टे पर दी जा सकती है भूमि*

-खेती या पेड़ लगाने के लिए पट्टा दिया जा सकता है * 

-पट्टा धारक के बाद जमीन शासन के पास आएगी *                                       

-जमीन को बेचा नहीं जा सकता है*  

-जमीन की रजिस्ट्री किसी भी नियम से नहीं की जा सकती*

 


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