*16 दिसम्बर को बन रहा ग्रहों का ऐसा महासंयोग!* डाँ. अशोक शास्त्री ( ज्योतिषाचार्य )

*दिसंबर में बुध, चंद्र, सूर्य, गुरू, केतु और शनि का महासंयोग*
*कुछ राजकीय ज्योतिष फल*~~

          युद्ध या ऐसी दुर्घटना, सुनामी , अचानक आर्थिक गिरावट , शेयर बाजार पर खतरनाक हलचल , देश में महामारी , जन-जीवन की हानि , भूकंप और ज्वालामुखी जैसी घटनाएं ~~
           
*ज्योतिष फल कथन*

मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने एक चर्चा में बताया है कि माह दिसंबर में बुध, चंद्र, सूर्य, गुरू, केतु और शनि का महासंयोग, बन रहा है ।  प्रभाव
हमारे दैनिक जीवन और ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों के बीच अटूट संबंध है। इस संदर्भ में ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  यह संबंध हमारे जन्म से ही हमें प्रभावित करता है। कभी हमें अपने जीवन में इन ग्रहों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलता है, तो कभी नकारात्मक। कभी-कभी इन ग्रहों का हमारे जीवन में मिला-जुला असर भी रहता है। लेकिन कभी-कभी इस अनंत ब्रह्मांड में विचरण कर रहे ग्रह ऐसी स्थिति में आ जाते है, जहां सभी ग्रहों का गोचर कुंडली के एक ही भाव या एक परिस्थिति में हो जाता है। कमोवेश ऐसी परिस्थिति वर्षों में निर्मित होती है। लेकिन ऐसी परिस्थिति में ग्रहों के शुभ-अशुभ प्रभावों का विश्लेषण और उनसे प्राप्त होने वाले फलों की प्रकृति में भी भारी बदलाव देखने को मिलता है। ग्रहों की ऐसी ही एक स्थिति आगामी समय में देखने को मिलने वाली है ।

          डाँ. अशोक शास्त्री ने कहा कि   26/12/2019 को ग्रहों का ऐसा संयोग बन रहा है। जब 6 ग्रह एक साथ एक जगह एकत्र होने वाले हैं। ग्रहों के ऐसे योग को ज्योतिषीय भाषा में प्रवज्या योग या सन्यासी योग भी कहा जाता है। ग्रहों के इस बिरले योग से निकलने वाली सामूहिक ऊर्जा का दायरा सामान्य तौर पर पड़ने वाले प्रभावों से अधिक शक्तिशाली होता है। इस सामूहिक ऊर्जा का प्रभाव दुनिया के प्रत्येक प्राणी को अधिक तीव्रता से प्रभावित करता है। आपने कहा कि  ज्योतिष की उत्पत्ति के साथ ही इसका उपयोग प्रमुख रूप से देश-दुनिया में घटने वाली अप्रिय घटनाओं का आंकलन करने के लिए किया जा रहा है। प्राचीन समय में कई महान ज्योतिषीयों ने भारत वर्ष और दुनिया के कई हिस्सों के बारे में भविष्यवाणियां की, जो ना सिर्फ समय के साथ सही साबित हुई। बल्कि उन विपत्तियों से निपटने के लिए पहले से की गई व्यवस्थाओं के कारण बहुत हद तक जनहानि और जान-माल के नुकसान को कम भी किया जा सका। समय-समय पर ब्रह्मांड में मौजूद ग्रह-नक्षत्र कुछ ऐसी स्थिति में आ जाते है, जिसका व्यापक असर पृथ्वी पर मौजूद प्राणी मात्र पर अलग-अलग तरह से पड़ता है।
           डाँ.अशोक शास्त्री ने बताया कि  ऐसी ही एक स्थिति आगामी 16/12/2019 से 16/01/2019 के दौरान बनने वाली है। इस दौरान 6 ग्रहों की महायुति(महासंयोग) बनने वाली है। ग्रहों के इस महासंयोग के दौरान कई विपरीत आचरण वाले ग्रह एक साथ एक भाव में विचरण करेंगे। इस दौरान इन ग्रहों की संयुक्त ऊर्जा बेहद ही तीव्र और प्रभावशाली रहेगी। ग्रहों के इस योग का प्रत्यक्ष प्रभाव जातक निजी कुंडली का अध्यन करके ही निकाला जा सकता है।

*ग्रहों के विशेष समूह योग की कुंडली*
कुंडली – 26.12.19 महासंयोग  की कुंडली
16/12/2019 से 16/01/2019
तारीख :- 26/12/2019
समय: – सूर्योदय

            ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने बताया कि उपरोक्त कुंडली दिनांक 26.12.19 की कुंडली है। इसी दिन जो योग निर्मित हो रहे हैं 6 ग्रह एक साथ एक भाव में बैठे हैं। इसी योग को प्रवज्या या सन्यासी योग कहा जाता है। इन ग्रहों के योग से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा के प्रभाव का अंदाजा लगा पाना बेहद जटिल प्रक्रिया है। क्योंकि सौरमंडल में मौजूद प्रत्येक ग्रह की अपनी ऊर्जा, प्रभाव और तत्व होते हैं । जब ये ग्रह किसी समूह में अपने विपरीत ग्रहों के साथ बैठ जाते हैं, तो इनके योग को समझना और उचित-अनुचित का अनुमान लगाना किसी सामान्य गणनाकार के बस से बाहर हो जाता है।

*कब और क्या होने वाला है?*

           डाँ शास्त्री के मुताबिक दिनांक  16/12/2019 से 16/01/2020 तक का समय ग्रह-दशा के हिसाब से बेहद जोखिम भरा दिखाई दे रहा है।  इस दौरान सभी ग्रह धीरे-धीरे एक भाव में एकत्र होते जाएंगे। 16/12/2019 से एक भाव में एकत्र होने की दिशा में बढ़ते हुए ग्रह 26/12/2019 तक एक भाव में एकत्र हो चुके होंगे। इस महासंयोग के बाद ग्रह पुनः एक-एक करके अपने मार्ग पर आगे बढ़ते जाएंगे, जिससे इस महायुति में बिखराव देखने को मिलेगा। महायुति के टूटने के साथ ही इन ग्रहों का सामान्य प्रभाव शेष रह जाएगा और इस महायुति के अप्रत्याशित प्रतिकूल प्रभावों का भी अंत हो जाएगा।

          डाँ. शास्त्री ने बताया कि  वैदिक ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक ग्रह 1 या 2 घरों (भाव) का प्रतिनिधित्व करता है। जब कोई ग्रह अपने किसी घर में गोचर करता है, तो वह अपने साथ अपने तत्व और स्वभाव भी उस घर में लेकर आता है। जब ग्रह उपरोक्त कुंडली में दर्शायी गई स्थिति में होते हैं, तो वह जीवन में एकाग्रता और नए समीकरण बनाते हैं। लेकिन इस स्थिति में यह महत्वपूर्ण हो जाता है, कि इन ग्रहों का यह महासंयोग आपके किस घर में निर्मित हो रहा है। क्योंकि ग्रहों और घर के योग से ही ज्योतिष फल निकाला जा सकता है। डाँ अशोक शास्त्री के मुताबिक  उपरोक्त कुंडली के अध्ययन से पता चलता है, कि 26/12/2019 को बनने वाले इस महासंयोग से कुल 7 नकारात्मक योगों का निर्माण हो रहा है।

*(शनि-केतु) शापित दोष*
, *(गुरू-केतु) विप्र चांडाल दोष*
, *(सूर्य-केतु) ग्रहण दोष*  ,*(चंद्र-केतु) ग्रहण दोष* , *(सूर्य-शनि) संघर्ष दोष* , *(चंद्र-शनि) विष दोष* , *काल सर्प योग*

           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने इस महायुति गठन के प्रथम चरण में ग्रह एक साथ आने के लिए अपनी-अपनी अपनी धुरी पर घूमते हुए, निश्चित कक्षा में आगे बढ़ेंगे। जैसे ही ये ग्रह कुंडली में मौजूद भाव में एक साथ एकत्र होने लगेंगे, तब से लेकर इनके अलग होने तक प्रभावी रहने वाले इन 7 नकारात्मक संयोगों का आम जनमनस पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इस दौरान आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए।

*शापित दोष* :~ शनि-केतु के मेल से उत्पन्न होने वाले इस दोष के कारण आपकी प्रगति की संभावनाओं में कमी आती है, और लगातार निराशा का भाव बना रहता है। जहां शनि जीवन की सभी संभावनाओं और घटनाओं को सीमित करता है, वहीं केतु प्रतिबंधों व अवरोधों का प्रतिनिधित्व करता है। कुंडली के किसी भी भाव में इन ग्रहों का योग जीवन के लिए निराशाजनक ही है।

*विप्र चांडाल दोष* :~ वैसे तो कुंडली में गुरू का प्रभाव अमृत समान माना गया है। लेकिन गुरू और केतु के संयोग से बनने वाला यह दोष पूरी कुंडली को ही नकारात्मक फल देने के लिए प्रेरित करता है। इस दोष के कारण जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

*ग्रहण दोष (सूर्य-केतु)* – ज्योतिष में जब भी कभी परस्पर विरोधी विचारधारा वाले ग्रहों का संयोजन होता है, तो इसका असर जातक की समग्र कुंडली पर पड़ता है। सूर्य और केतु बिल्कुल विपरीत ग्रह हैं। सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा केतु के प्रतिबंधात्मक प्रभाव के कारण अवरुद्ध हो जाती है। इस नकारात्मक प्रभाव वाली युति के कारण जीवन की सामान्य प्रगति में भी अड़चनें आने लगती हैं। व्यक्ति अपनी क्षमताओं के अनुरूप पर्याप्त प्रदर्शन नहीं कर पाते। प्रतिभा संपन्न होने के बावजूद आगे बढ़ने में हिचकिचाते हैं। वैसे तो यह दोष बेहद की प्रतिकूल और दुख देने वाली परिस्थिति का निर्माण करता है।

*ग्रहण दोष (चंद्र-केतु)* :~ हमारे मन को दर्शाने वाला चंद्रमा ही अगर हिंसक और विनाशकारी ग्रह केतु के प्रभाव में आ जाए तो व्यक्ति नकारात्मक विचारों की चपेट में आ जाता है। फलस्वरूप मानसिक शांति भंग हो जाती है।

*संघर्ष दोष* :~ यह दोष सूर्य-शनि के संयोग से निर्मित होता है। जहां सूर्य हमारे जीवन में सफलता और प्रसिद्धि का प्रतीक है, वहीं सूर्य का विरोधी शनि जीवन में विलंब और बाधाएं लेकर आता है। जब ये दो विषम स्वभाव वाले ग्रह कुंडली में एक साथ होते हैं, तो मनुष्य को पग-पग पर चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है।

*विष दोष* :~ यह दोष शनि-चंद्र के संयोग से निर्मित होता है। चंद्र तीव्र गति वाला ग्रह है, जो प्राणियों के मन व मानसिक स्वास्थ्य का सूचक होता है। इसके विपरीत, शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है और समस्त पीड़ा व बाधाओं को दर्शाता है। इस दोष से स्मृति क्षमता का हास् होने के साथ ही मानसिक शांति भंग हो जाती है। इस दोष का प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दुष्परिणाम के रूप में सामने आता है।

*कालसर्प दोष* :~ यह दोष जीवन की सफलताओं को प्रभावित करता है, और समृद्धि को बाधित कर देता है। इस दोष के कारण जीवन में अचानक प्रतिकूल उतार चढ़ाव, दुःख, अपमान, संघर्ष और दूसरी अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इस दोष के दुष्प्रभाव जितने ख़तरनाक़ और तीव्र है, उतना ही आसान इस दोष का निवारण भी है।

*26 दिसंबर को 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण, भारत में इस समय यहां दिखेगा* डाँ. अशोक शास्त्री

          उल्लेखित समयावधि के दौरान की भारत की कुंडली देखने पर पता चलता है कि, ग्रहों की यह प्रतिकूल महायुति 8वें घर में निर्मित हो रही है। जिससे देश पर कई तरह की विपत्तियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने बताया कि  ग्रहों के इस महासंयोग के कारण देश में महामारी, जन-जीवन की हानि, युद्ध या ऐसी दुर्घटना जिससे उभरने में समय लगे या अचानक आर्थिक गिरावट का भी ख़तरा बना रहेगा। ग़ौरतलब है कि बीते दिनों सरकार द्वारा जारी जीडीपी के आंकड़ों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इस तरह के सरकारी आंकड़े आने वाले समय की रूपरेखा तय कर, महायुति के नकारात्मक प्रभावों पर मुहर लगाने का काम करते है। इसके साथ ही ग्रहों की यह महायुति अग्नितत्व की राशि में होने के कारण बढ़े स्तर पर आग की दुर्घटनाओं के होने की संभावना भी बनी रहेगी। इस महायुति से अलग मंगल भी अपनी स्वग्रही राशि में गोचर करने वाला है। मंगल के इस गोचर से देश-दुनिया में भूकंप और ज्वालामुखी जैसी घटनाओं की संभावनाओं को बल मिलता है। ग्रहों के इस महासंयोग में सीमित समय के लिए चंद्रमा भी मौजूद रहेगा, जिससे समुद्री लहरों (सुनामी) से जान-माल की हानि के संकेत मिलते है। भारत वर्ष की कुंडली की विवेचना के बाद इस बात के साफ संकेत मिलते है, कि मौजूदा साल का अंत और आगामी नए साल की शुरूआत दोनों ही देश के लिहाज से अनुकूल नहीं रहने वाले ।

*महासंयोग अप्रिय और प्रतिकूल स्थिति*
 
         आपने आगे बताया है कि इस महासंयोग का असर सिर्फ मनुष्यों तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग तरह से पड़ने वाला है।भारत वर्ष की कुंडली के 8वें भाव में निर्मित हो रहा है। कुंडली का आठवां भाव आयुष्य, मृत्यु, दुर्घटना और नुकसान से संबंधित है। इस भाव में ग्रहों का महासंयोग अप्रिय और प्रतिकूल स्थिति की ओर इशारा करता है। डाँ. शास्त्री के मुताबिक भारत वर्ष के परिपेक्ष में 16 दिसंबर से 16 जनवरी तक का समय काफ़ी मुश्किल भरा हो सकता है। इस दौरान ग्रहों की जो स्थिति उभरकर सामने आ रही है। वह अनुकूल परिस्थितियों का चित्रण नहीं करती, अपितु अनुचित और अप्रिय घटनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। ग्रहों के इस संयुक्त गोचर की शुरूआत 16 दिसंबर से होगी। इस दिन से सभी ग्रह एक-एक कर महायुति के निर्माण के लिए आगे बढ़ेंगे। 26 दिसंबर तक यह महायुति या महासंयोग अपने चरम पर होगा। जिसके बाद से इस महायुति का विघटन या विच्छेदन होने लगेगा। 16 जनवरी 2020 तक इस शक्तिशाली महायुति का अंत हो जाएगा।

*शेयर बाजार में निवेश से पहले जाने सूर्य, चंद्र, गुरू, बुध, शनि और केतु की महायुति का प्रभाव*
 
          16 दिसंबर 2019 से 16 जनवरी 2019 तक हमारे सौरमंडल में कुछ विशेष घटनाओं के योग बन रहे है। इस संदर्भ में डाँ अशोक शास्त्री ने बताया कि इस समयावधि के दौरान एक समय ऐसा आएगा जब सूर्य, चंद्र, गुरू, बुध, शनि और केतु एक ही राशि में या एक भाव में एकत्र हो जाएंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सौरमंडल में बिरले बनने वाली ग्रहों की ऐसी परिस्थिति इसलिए खास हो जाती है। क्योंकि इस दौरान सभी ग्रहों का प्रभाव मिश्रित होकर एक शक्तिशाली ऊर्जा के माध्यम से प्राणी मात्र पर असर डालता है। इस खगोलिया घटना का असर व्यापक होकर ना सिर्फ प्राणियों तक सीमित रहता है, अपितु उनसे जुड़े प्रत्येक साधन पर इसका असर दिखाई देता है। साधारण जन-मानस पर इसके प्रभावों का सटीक आंकलन करने के लिए यह जानना जरूरी होता है कि इस महायुति या महासंयोग का निर्माण उनकी कुंडली के किस भाव में और कौन सी राशि में हो रहा है।

*16 दिसम्बर को बन रहा ग्रहों का ऐसा महासंयोग!* डाँ. अशोक शास्त्री

           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  हम से हजारों-लाखों किलोमीटर दूर ब्रह्मांड में मौजूद ग्रहों का पृथ्वी और जीवों पर प्रभाव डालने के प्रमाण विशाल समुद्र में उथल-पुथल मचाने वाले ज्वार-भाटा की घटना से लगाया जा सकता है। अपने तटों को तोड़ जब समुद्र अपने आस-पास की ज़मीन को निगलने लगता है, तो उसके पीछे चंद्रमा के घटते-बढ़ते प्रभाव का ही असर होता है। जब चंद्रमा जैसा छोटा ग्रह धरती के 75 प्रतिशत भू-भाग पर फैले समुद्र में हलचल मचा सकता है, तब चंद्रमा से भी विशाल और अधिक शक्तिशाली ग्रहों का प्रभाव प्राणियों और उनकी परिस्थितियों पर कितना अधिक पड़ता होगा। इसका अनुमान लगाना अधिक मुश्किल नहीं रह जाता। ग्रहों की ऊर्जा का प्राणियों और उनकी परिस्थिति पर पड़ने वाले इन्हीं प्रभावों की गणना करना और उनके शुभ-अशुभ प्रभावों का आंकलन कर जातक को उचित समाधान उपलब्ध करने की विद्या वैदिक ज्योतिष शास्त्र है। आपने बताया कि ज्योतिषी के माध्यम से हम चंद्रमा की ही तरह अन्य ग्रहों का भी न सिर्फ मनुष्य, अपितु संसार की प्रत्येक वस्तु पर पड़ने वाले सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव का आंकलन कर सकते है। देश-और दुनिया में घटने वाले आर्थिक, समाजिक और राजनीतिक घटनाक्रम में भी ग्रह-नक्षत्रों की अहम भूमिका होती है।

*6 ग्रहों के महासंयोग से देश में घटेंगी ये घटनाएं!* डाँ. अशोक शास्त्री

         डॉ. अशोक शास्त्री के मुताबिक  देश और समाज के हर क्षेत्र और हर वर्ग को प्रभावित करने वाले ग्रहों के इस महासंयोग का असर देश और दुनियाभर के शेयर बाजारों में भी देखने को मिलेगा। इन ग्रहों के एक राशि में एक साथ रहने के दौरान शेयर बाजारों में काफी हलचल देखने को मिलेगी। इस दौरान मार्केट का मूवमेंट अजीब रहने वाला है, इसलिए सावधानी रखें! और धैर्य के साथ निवेश करें है। इस महासंयोग के निर्माण से इसके विघटन तक का समय जोखिमभरा और अप्रत्याशित हो सकता है।

             *कुछ भी हो सकता है !*

           आपने आगे बताया यदि हम 05/01/2020 से 18/01/2020 तक की बात करें, तो इस दौरान आपको निवेश के जोखिम से बचना चाहिए। ग्रहों के महासंयोग का यह दौर सबसे खतरनाक और हलचल भरा होगा। इस दौरान लाॅन्ग टर्म और शाॅर्ट टर्म, निवेश या मुनाफावसूली दोनों ही समान जोखिम भरे रहेंगे। संक्षिप्त शब्दों में कहें तो “कुछ भी हो सकता है!”  वैसे तो 05/01/2020 से 18/01/2020 तक की पूरी समयावधि जोखिम भरी है। लेकिन इंट्रा डे ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए इतने दिन बाजार से बाहर रहना संभव नहीं,   8, 9 और 10 जनवरी प्रमुख हैं, कम से कम इस समयावधि के दौरान शेयर बाजार से दूरी बनाकर रखें। 05/01/2020 से 18/01/2020 तक की पूरी समयावधि जोखिम भरी है। और इस दौरान शेयर बाजार में निवेश से संबंधित फ़ैसलों के साथ ही निजी और प्रोफेशनल लाइफ़ में किसी तरह के बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। इस दौरान बाजार का रूख मशहूर कहावत “कुछ भी हो सकता है” को सार्थक करेगा । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

               -:  *शुभम्  भवतु*  :-


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