।।  *सुप्रभातम्*  ।।
               ।।  *संस्था  जय  हो*  ।।
        ।।  *दैनिक  राशि  -  फल*  ।।
        आज दिनांक 22 दिसंबर 2019 रविवार संवत् 2076 पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि दोपहर 03:11 बजे तक रहेगी उपरांत द्वादशी तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रातः काल 07:11 बजे एवं सूर्यास्त सायं 05:39 बजे होगा । स्वाती नक्षत्र सायं 06:29 बजे तक रहेंगा पश्चात विशाखा नक्षत्र आरंभ होगा । आज का चंद्रमा तुला राशि में दिन रात भ्रमण करते रहेंगे । आज का राहू काल सायं 04:12 से 05:39 बजे तक रहेंगा । दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेंगा यदि आवश्यक हो तो दलिया का सेवन कर यात्रा आरंभ करें । जय हो

                    ~ :  *विशेष*  ~:
                  *सफला एकादशी*

युधिष्ठिर ने पूछा : स्वामिन् ! पौष मास के कृष्णपक्ष (गुज., महा. के लिए मार्गशीर्ष) में जो एकादशी होती है, उसका क्या नाम है? उसकी क्या विधि है तथा उसमें किस देवता की पूजा की जाती है ? यह बताइये ।
           भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं : राजेन्द्र ! बड़ी बड़ी दक्षिणावाले यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है । पौष मास के कृष्णपक्ष में ‘सफला’ नाम की एकादशी होती है । उस दिन विधिपूर्वक भगवान नारायण की पूजा करनी चाहिए । जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़ तथा देवताओं में श्रीविष्णु श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण व्रतों में एकादशी तिथि श्रेष्ठ है ।
           राजन् ! ‘सफला एकादशी’ को नाम मंत्रों का उच्चारण करके नारियल के फल, सुपारी, बिजौरा तथा जमीरा नींबू, अनार, सुन्दर आँवला, लौंग, बेर तथा विशेषत: आम के फलों और धूप दीप से श्रीहरि का पूजन करे । ‘सफला एकादशी’ को विशेष रुप से दीप दान करने का विधान है । रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण करना चाहिए । जागरण करनेवाले को जिस फल की प्राप्ति होती है, वह हजारों वर्ष तपस्या करने से भी नहीं मिलता ।
           नृपश्रेष्ठ ! अब ‘सफला एकादशी’ की शुभकारिणी कथा सुनो । चम्पावती नाम से विख्यात एक पुरी है, जो कभी राजा माहिष्मत की राजधानी थी । राजर्षि माहिष्मत के पाँच पुत्र थे । उनमें जो ज्येष्ठ था, वह सदा पापकर्म में ही लगा रहता था । परस्त्रीगामी और वेश्यासक्त था । उसने पिता के धन को पापकर्म में ही खर्च किया । वह सदा दुराचारपरायण तथा वैष्णवों और देवताओं की निन्दा किया करता था । अपने पुत्र को ऐसा पापाचारी देखकर राजा माहिष्मत ने राजकुमारों में उसका नाम लुम्भक रख दिया। फिर पिता और भाईयों ने मिलकर उसे राज्य से बाहर निकाल दिया । लुम्भक गहन वन में चला गया । वहीं रहकर उसने प्राय: समूचे नगर का धन लूट लिया । एक दिन जब वह रात में चोरी करने के लिए नगर में आया तो सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया । किन्तु जब उसने अपने को राजा माहिष्मत का पुत्र बतलाया तो सिपाहियों ने उसे छोड़ दिया । फिर वह वन में लौट आया और मांस तथा वृक्षों के फल खाकर जीवन निर्वाह करने लगा । उस दुष्ट का विश्राम स्थान पीपल वृक्ष बहुत वर्षों पुराना था । उस वन में वह वृक्ष एक महान देवता माना जाता था । पापबुद्धि लुम्भक वहीं निवास करता था ।
          एक दिन किसी संचित पुण्य के प्रभाव से उसके द्वारा एकादशी के व्रत का पालन हो गया । पौष मास में कृष्णपक्ष की दशमी के दिन पापिष्ठ लुम्भक ने वृक्षों के फल खाये और वस्त्रहीन होने के कारण रातभर जाड़े का कष्ट भोगा । उस समय न तो उसे नींद आयी और न आराम ही मिला । वह निष्प्राण सा हो रहा था । सूर्योदय होने पर भी उसको होश नहीं आया । ‘सफला एकादशी’ के दिन भी लुम्भक बेहोश पड़ा रहा । दोपहर होने पर उसे चेतना प्राप्त हुई । फिर इधर उधर दृष्टि डालकर वह आसन से उठा और लँगड़े की भाँति लड़खड़ाता हुआ वन के भीतर गया । वह भूख से दुर्बल और पीड़ित हो रहा था । राजन् ! लुम्भक बहुत से फल लेकर जब तक विश्राम स्थल पर लौटा, तब तक सूर्यदेव अस्त हो गये । तब उसने उस पीपल वृक्ष की जड़ में बहुत से फल निवेदन करते हुए कहा: ‘इन फलों से लक्ष्मीपति भगवान विष्णु संतुष्ट हों ।’ यों कहकर लुम्भक ने रातभर नींद नहीं ली । इस प्रकार अनायास ही उसने इस व्रत का पालन कर लिया । उस समय सहसा आकाशवाणी हुई: ‘राजकुमार ! तुम ‘सफला एकादशी’ के प्रसाद से राज्य और पुत्र प्राप्त करोगे ।’ ‘बहुत अच्छा’ कहकर उसने वह वरदान स्वीकार किया । इसके बाद उसका रुप दिव्य हो गया । तबसे उसकी उत्तम बुद्धि भगवान विष्णु के भजन में लग गयी । दिव्य आभूषणों से सुशोभित होकर उसने निष्कण्टक राज्य प्राप्त किया और पंद्रह वर्षों तक वह उसका संचालन करता रहा । उसको मनोज्ञ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ । जब वह बड़ा हुआ, तब लुम्भक ने तुरंत ही राज्य की ममता छोड़कर उसे पुत्र को सौंप दिया और वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के समीप चला गया, जहाँ जाकर मनुष्य कभी शोक में नहीं पड़ता ।
           राजन् ! इस प्रकार जो ‘सफला एकादशी’ का उत्तम व्रत करता है, वह इस लोक में सुख भोगकर मरने के पश्चात् मोक्ष को प्राप्त होता है । संसार में वे मनुष्य धन्य हैं, जो ‘सफला एकादशी’ के व्रत में लगे रहते हैं, उन्हीं का जन्म सफल है । महाराज! इसकी महिमा को पढ़ने, सुनने तथा उसके अनुसार आचरण करने से मनुष्य राजसूय यज्ञ का फल पाता है।
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं । जय हो

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245,एम.जी.रोड (आनंद चौपाटी) धार, एम.पी.
                  मो. नं.  9425491351

                   *आज का राशि फल*

          मेष :~ आज आप सामाजिक तथा सार्वजनिक क्षेत्र में प्रशंसापात्र बनेंगे। धन लाभ का योग है। पारिवारिक जीवन में सुख और संतोष का अनुभव होगा। आज आप बौद्धिक चर्चा में हिस्सा लेंगे, परंतु अपनी वाणी पर संयम रखें । वैचारिक रुप से आवेश रह सकता है। समाधानकारी व्यवहार से अधिक लाभ होने की संभावना है।

          वृषभ :~ आपका आज का दिन आनंदपूर्वक बीतेगा। मानसिकरुप से स्वस्थ रहेंगे। आपके कार्य निर्धारितरुप से योजना के अनुसार पूर्ण होंगे। आर्थिक लाभ की संभावना है। अधूरे कार्य पूर्ण होंगे। व्याधिग्रस्तों के स्वास्थ्य में सुधार आएगा। सहकर्मियों से लाभ होगा।

          मिथुन :~ किसी भी प्रकार के वाद-विवाद या बौद्धिक चर्चा से दूर रहें । अपमान न हो इसका ध्यान रखें । मित्रों के पीछे खर्च होने की संभावना है। पेट सम्बंधित बीमारियों से परेशानी हो सकती है। नए कार्य के आरंभ में निष्फलता मिलने की भी संभावना है। प्रवास की योजना आज न बनाएं।

          कर्क :~ ग्लानि से आज आपका मन व्यथित रहेगा। प्रफुल्लितता, स्फूर्ति और आनंद का आज अभाव रहेगा। परिवारजनों के साथ तकरार हो सकती है। धन खर्च होगा तथा अपयश भी मिल सकता है। समयानुसार भोजन नहीं मिलेगा। अनिद्रा सताएगी। छाती में विकार हो सकता है ।

          सिंह :~ आज का दिन सुख-शांतिपूर्वक बीतेगा। अपने सहोदर के साथ सम्बंधों में निकटता का अनुभव करेंगे। उनका सहयोग आपको मिलेगा। सम्बंधो में रही भावना की गहराई को आप समझ सकेंगे। किसी रमणीय पर्यटनस्थल पर जाने का आयोजन हो सकता है। मानसिक रूप से चिंता रहित हो जाएँगे। कार्य-सफलता के योग हैं।

          कन्या :~ परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा। वाक्माधुर्य से आप अपना निर्धारित कार्य कर सकेंगे। आरोग्य अच्छा रहेगा। बौद्धिक चर्चा में न उतरे । भोजन में मिष्टान्न मिल सकता है। प्रवास की संभावना है। व्यर्थ के खर्च न हो इससे संभले । विद्यार्थियों के लिए कठिन समय रहेगा।

          तुला :~ आप व्यवस्थित रुप से आर्थिक योजना बना सकेंगे। आज कोई सृजनात्मक प्रवृत्ति हो सकती है। आपकी सृजनात्मक शक्ति आज श्रेष्ठ रहेगी। शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थता का अनुभव आप करेंगे। दृढ़ विचारों के साथ आप कार्य पूर्ण कर सकेंगे। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। आनंद-प्रमोद तथा मनोरंजन के पीछे धन का खर्च होगा।

          वृश्चिक :~ शारीरिक शिथिलता और मानसिक चिंता से आपका मन व्यग्र रहेगा। वाहन चलाते समय अकस्मात न हो जाए ध्यान रखें । संभव हो तो आपरेशन को आज टाले । स्नहीजनों और परिवारजनों के साथ वाद-विवाद होने की संभावना है। कोर्ट-कचहरी के कार्यों में संभवतः सावधानी बरते, नहीं तो टाल दे।

          धनु :~ आज का दिन आपके लिए लाभदायी रहेगा आपको आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक क्षेत्र भी लाभ होने की संभावना है। मित्रों और परिवारजनों के साथ पर्यटन स्थल पर जाने का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार में भी लाभदायी दिन है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।

          मकर :~ आज आप को व्यापार-सम्बंधित कार्यों में लाभ होगा  उगाही, प्रवास, आय आदि के लिए अच्छा दिन है। सरकार तथा मित्रों, सम्बंधियो से लाभ होगा। उनसे भेंट – उपहार मिलने से आनंद होगा। परंतु अग्नि, जल और अकस्मात से दूर रहें । व्यावसायिक कार्य के प्रति भागदौड़ बढेगी। संतानों की पढा़ई के लिए आप संतोष का अनुभव करेंगे। प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

          कुंभ :~ शारीरिकरूप से आप को अस्वस्थता का अनुभव होगा। फिर भी आप मानसिक रुप से स्वस्थ रहेंगे। शरीर में स्फूर्ति कम रहने के कारण कार्य करने का उत्साह कम रहेगा। ऊपरी अधिकारियो की अप्रसन्नता भी आपको अखरेगी। आनंद-प्रमोद के पीछे धन का खर्च होगा। प्रवास की संभावना है। विदेश से समाचार मिलेंगे। संतान विषयक चिंता रहेगी।

          मीन :~ आज का दिन ईश्वरभक्ति और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों में बिताए । आज आपको थोडी़ बहुत प्रतिकूलताओं का सामना करना पडे़गा। स्वास्थ्य के विषय में आज विशेष ध्यान दे। व्याधि के कारण अधिक खर्च होने की भी संभावना है। परिवारजनों के साथ संयम बरतें। आकस्मिक धनलाभ आपके मन के भार को हलका करेगा। उगाही का धन व्यापारियों को मिल सकता है। ( डाँ. अशोक शास्त्री )

।।  शुभम्  भवतु  ।।  जय  सियाराम  ।।
।।  जय  श्री  कृष्ण  ।।  जय  गुरुदेव  ।।


Post A Comment:

0 comments: