*अलीराजपुर~मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक दिनांक 27/11/2019 को भू-राजस्व संहिता 1959 के धारा 165 एवं 172 में संशोधन कर आदिवासी क्षेत्रों में गैर आदिवासी को ज़मीन के डायवर्सन का अधिकार देने के प्रस्ताव को निरस्त एवं अनुसूचित क्षेत्रों की ज़मीन गैर आदिवासी को बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध करने के संबंध में*~~

*"अनुविभागीय अधिकारी(राजस्व)SDM महोदय जी को "सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों के बैनर तले ज्ञापन सौंपा गया।*~~

✍🏻जुबेर निज़ामी की रिपोर्ट ✍🏻
अलीराजपुर 📲9993116518~~

अलीराजपुर जोबट:-आज दिनांक 02/12/2019 को जैसा कि आप सभी को विदित होगा, पिछले माह 27/11/2019 को मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भू-राजस्व संहिता 1959 के धारा 165 एवं 172 में संशोधन कर आदिवासी क्षेत्रों में गैर आदिवासी को ज़मीन डायवर्सन का अधिकार देने का प्रस्ताव, जो कि नईदुनिया समाचार-पत्र भोपाल, दिनांक 27/11/2019, पीपुल्स समाचार दिनांक 28/11/2019 व अन्य समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ था, उसी आदेश के घोर विरोध में माननीय SDM महोदय जी जोबट को "महामहिम राष्ट्रपति जी व महामहिम राज्यपाल जी तथा माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम "सभी आदिवासी सामाजिक संगठनों के बैनर तले ज्ञापन सौंपा गया।
       अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि डायवर्सन नियम का सभी आदिवासी सामाजिक संगठन ऐसे निर्णय का घोर निंदा और विरोध करता है। जो आदिवासियों की जल, जंगल, ज़मीन एवं संवैधानिक अधिकारों व संस्कृति को खत्म कर विकास की बात करते है। ऐसी योजनाओं को लागू नहीं करे कमलनाथ सरकार। क्योंकि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों का विशेष संवैधानिक अधिकार है। जिसको कोई भी राज्य सरकार या केन्द्र सरकार विकास के नाम पर खत्म नहीं कर सकती है।
         यदि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि डायवर्सन का नियम लागू हो जाता है, तो जिससे कई बड़े बड़े उधोगपति, बिल्डरों व कंपनियां विकास के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में प्रवेश करेगी और धीरे धीरे आदिवासियों की ज़मीन को थोड़े से मुआवजे के नाम पर पैसे दे देंगे और आदिवासियों की ज़मीन को खुद के नाम पर डायवर्सन आसानी से करवा लेंगे, जिससे लांखो आदिवासी किसान धीरे धीरे अपने ही जल, जंगल और ज़मीन से वंचित हो जाएगा और उसे रोजगार के लिए दर दर की ठोकरे खाने के लिए भटकन पड़ेगा।
         जयस, अजाक्स, आकाश, किसान संघ, आदिवासी छात्र संगठन व सभी आदिवासी समाजजनों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार को सचेत किया है कि यदि अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि डायवर्सन के नियम को खत्म नही किया गया तो, सभी आदिवासी समाजजनो व संगठनों द्वारा पूरे मध्यप्रदेश में 'चरणबध्द आंदोलन' किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की रहेगी।
     ज्ञापन सौपते समय आदिवासी के सभी सामाजिक संगठन-जयस, आकाश, अजाक्स, आदिवासी एकता परिषद, आदिवासी छात्र संगठन, बेरोजगार युवा, किसान युवा मोर्चा, किसान, मज़दूर, सरपंच यूनिटी व समस्त आदिवासी समाज के सैकड़ो समाजजन उपस्थित हुए।
*जल-जंगल व ज़मीन पर हम आदिवासियों का विशेष अधिकार है, जिसे कोई माई का लाल छीन नही सकता है, यदि हमसे छिनने की कोशिश की तो पूरे प्रदेश में बिरसा व टंट्या भील का उलगुलान होगा।*


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1 comments:

  1. बहुत शानदार खबर।

    आदिवासियों की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने के लिए सम्माननीय पत्रकार बंधु जी आपका दिल से आभार-जोहार-धन्यवाद।

    *धीरूभाई जयस-आदिवासी(जयस) मीडिया प्रभारी जोबट।*

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