देवास ~खातेगांव रेस्ट हाउस में पदस्थ चौकीदार कैलाश बघेल और उनके 3 वर्षीय पोते विराट की सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत,~~

मिलनसार सेवाभावी थे! मृतक चौकीदार कैलाश बघेल~~

पुलिस ने डंपर जप्त कर हत्यारे चालक के खिलाफ किया मामला दर्ज,~~

अनिल उपाध्याय
खातेगांव~~

इंदौर -बैतूल नेशनल हाईवे 59a पर सड़क हादसे रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हे!यमदूत की तरह बेलगाम सड़कों पर दौड़ते डंपर लोगों की मौत के कारण बन रहे,
बुधवार को हुए गंभीर सड़क हादसे में खातेगांव रेस्ट हाउस पर पदस्थ चौकीदार और उनके पोते की दर्दनाक की मौत हो गई, दुर्घटना के बाद डायल 100 पर तैनात, पायलट प्रेम नारायण जाट  सैनिक अरविंद पवार के साथ ही नगर सैनिक भूपेंद्र सिंह यादव ने घायलों को तत्काल सरकारी अस्पताल पहुंचाया! लेकिन वहां मौजूद डॉक्टर जीएस बघेल ने परीक्षण के बाद दोनों घायलों को मृत घोषित कर दिया !उधर घटना के बाद जहां परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है! वही खातेगांव में शोक की लहर फैल गई,

खातेगांव पुलिस को घटना की सूचना  सुंदरलाल कुशवाह पिता मांगीलाल कुशवाह ने थाने पहुंच कर दी, उन्होंने पुलिस को बताया कि मैं चुना भट्टी खातेगांव रहता हूं तथा मेरी खातेगांव बस स्टैंड पर फूल माला की दुकान है दिन के करीब 1:30 बजे मेरी दुकान पर बैठा था उसी समय कन्नौद की ओर से पीले रंग का डंपर क्रमांक एमपी 47 एच 0247 का चालक अपने डम्फर को काफी तेज गति एवं लापरवाही पूर्वक चला कर लाया और नेमावर तरफ जा रहे बजाज मोटरसाइकिल चालक कैलाश पिता मान सिंह बघैल की मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। जिससे कैलाश उम्र 50 वर्ष और उसका पोता विराट उम्र 3 साल और उसकी पत्नी सीता बाई तीनों गिर गए गिरने से कैलाश को सिर में और विराट को माथे में गंभीर चोट आई आसपास के लोगों ने एवं डायल 100 एवं पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कैलाश और उसके पोते विराट को सरकारी अस्पताल खातेगांव पहुंचाया डंपर ड्राइवर अपने डंपर को वहीं छोड़कर भाग गया दुर्घटना में घायल सीताबाई को मामूली चोट आई बाद में मुझे पता चला कि कैलाश और उसके पोते विराट की अस्पताल में मौत हो गई कैलाश और विराट की मौत उक्त डंपर की टक्कर से आई गंभीर चोटों के कारण हुई है कैलाश बघेल लम्बे समस से खातेगांव रेस्ट हाउस में
पदस्थ थे l

मिलनसार  सेवाभावी थे मृतक चौकीदार कैलाश बघेल
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खातेगांव रेस्ट हाउस में लंबे समय से चौकीदार के पद पर पदस्थ कैलाश बघेल मिलनसार एवं सेवाभावी थे! उनकी कार्यकुशलता एवं इमानदारी के कारण अधिकारी भी उनसे सदैव प्रसन्न रहते थे! इतना ही नहीं ड्यूटी अतिरिक्त जो समय उनको मिलता था !उस समय में वह दीन दुखियों की सेवा कर परोपकार का कार्य करने से भी पीछे भी नहीं हटते थे! इसके कारण बुखार एवं अन्य बीमारी से पीड़ित लोग भी बीमारी से मुक्त होने के लिए दूर-दूर से लोग उनके पास पहुंचते थे


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