बड़वानी~92 वीं पुण्यतिथि ~फांसी वाले दिन कसरत कर अगले जन्म के लिए खुद को तैयार कर रहे थे लाहिड़ी जी,~~

बड़वानी /जेलर एक युवक को व्यायाम करते हुए देखकर आष्चर्य में पड़ गया। आज तो इसे फांसी दी जानी है। यह मरने वाला है, फिर कसरत क्यों कर रहा है। पूछने पर जेलर को जवाब मिला- मुझे पुनर्जन्म में विष्वास है। मैं फिर जन्म लूंगा। मैं स्वस्थ शरीर के साथ जन्म लेना चाहता हूं ताकि मेरे वतन की आजादी की लड़ाई में फिर भूमिका निभा सकूं। इस तरह की जोषीली और भावयुक्त विचारधारा रखने वाले क्रांतिकारी राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी जी की आज 92 वीं पुण्यतिथि है। आओ, उन्हें नमन करें। यह सुनते ही तालियों की गड़गड़ाहट और भारत माता की जय तथा इंकलाब जिंदाबाद का उद्घोष गुंज उठा। अवसर था शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम का। वक्तागण थे- कॅरियर सेल के कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया, राहुल मालवीया और रवीना मालवीया। आयोजन प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में किया गया था।
इसलिये मिली थी फांसी की सजा
प्रीति गुलवानिया और राहुल मालवीया ने बताया कि 9 अगस्त, 1925 को भारत के दस क्रांतिकारियों ने काकोरी रेलवे स्टेषन पर सरहानपुर से चलकर लखनऊ पहुंचने वाली ट्रेन में रखे अंग्रेजों के खजाने को लूट लिया था। इस राषि का उपयोग अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष में किया जाना था। अंग्रेजों ने इस काण्ड के लिए चालीस व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। इनमें से चार को फांसी की सजा सुनाई गई। मृत्यु दण्ड प्राप्त चार देषभक्तों में से एक राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर, 1927 को उत्तरप्रदेष के गोंडा जेल में फांसी दी गई थी। इस योद्धा ने फांसी के फंदे को चूमते हुए कहा था- मैं मर नहीं रहा हूं, बल्कि स्वतंत्र भारत मंें पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं। आज उनकी 92 वीं पुण्यतिथि है।
कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने लाहिड़ीजी के 29 जून, 1901 से 17 दिसम्बर, 1927 तक लगभग साढ़े छब्बीस साल के जीवन वृत्त के बारे में जानकारी दी तथा बताया कि गांेडा जेल में उनकी स्मृतियों को संजो कर रखा गया है। वहां उनकी प्रतिमा भी है। वह फांसी का फंदा और तख्ता भी है, जिस पर उन्हें फांसी दी गई थी। साथ ही वहां पर एक षिलालेख भी है, जिस पर उनके बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं अंकित हैं। आयोजन में सहयोग जितेंद्र चैहान, कोमल सोनगड़े, नंदिनी मालवीया, अजय पाटीदार, आवेष खान ने दिया।


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