*अलीराजपुर~दिवाली पर अब फटाखे नही नए कपड़े बाटने का संकल्प लिया आदिवासी समाज ने*~~

*प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण हेतु उठाया कदम*~~

✍🏻जुबेर निज़ामी की रिपोर्ट ✍🏻
अलीराजपुर 📲9993116518~~

सोरवा प्रकृति के नजदीक रहने वाला इस देश के सबसे प्राचीन और अपनी संस्कृति,परम्परा,से दुनिया को शांति का सन्देश देने वाले आदिवासी समाज ने आदिवासी बाहुल्य जिले अलीराजपुर में एक अनोखा ओर पर्यावरण को बचाने के लिए सन्देश दिया है -जिस दिवाली को बिना पटाखे के नही मनाई जा सकती है उसी दिवाली में अबसे कोई भी व्यक्ति अब पटाखे नही खरीदे जाएंगे बल्कि उसकी जगह समाज के बुजुर्गों को नए कपड़े दिए जाएंगे।
      आप सभी को बता दे के अलीराजपुर जिले के दक्षिणी क्षेत्र-सोंडवा में आदिवासी बारेला समाज की बाहुलता है,जहां दिवाली रबी फसल के बाद मनाई जाती है जबकि होली दिवाली के समय।
आदिवासी समाज की परंपरा में जब कोई गांव में किसी त्यौहार के पहले या दौरान गाँव मे मृत्यु हो जाती है तो त्योहार नही मनाया जाता है उसे बड़ा दिया जाता है।
इसी वजह से ग्राम झींझनी सोरवा छोटी दिवाली के अवसर पर आदिवासी समाज के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा समाज के पटेल,पुजारा ओर अन्य गणमान्य नागरिक के साथ मिलकर इस नई पहल को अंजाम दिया ओर अब गाँव मे पटाखे की जगह बुर्जुर्ग के कपड़े और जरूरतमंद की वस्तु देने की शुरुवात की।
इस पहल की सोशल मीडिया में काफी तारीफें की जा रही है।
इस दौरान-बसंत किराड़,वेल्कू किराड़,कागू,वेचान,मधु,नवल,अनेर किराड़,रमेश रावत,वीरेंद्र रावत,सहित काफी संख्या में महिला-पुरुष बुजुर्ग ग्रामीण शामिल हुए।


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