बड़वानी~स्ंविधान दिवस कार्यक्रम अधिकार चाहते हैं तो कर्तव्य पालन के लिए भी रहें तैयार- जितेंद्र ~~

बड़वानी / शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ द्वारा प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में आयोजित की जा रही संविधान विषयक गतिविधियांे में आज मौलिक कर्तव्यों पर परिचर्चा की गई। कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि 70 वें संविधान दिवस के संदर्भ में 26 नवम्बर, 2019 से 26 नवम्बर, 2020 तक आयोजन किये जायेंगे। आज की परिचर्चा में कार्यकर्ता जितेंद्र चैहान और एलएल.बी. गोल्डमेडलिस्ट डाॅ. मधुसूदन चैबे ने मौलिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी। डाॅ. चैबे ने बताया कि मूल संविधान में कर्तव्यों का उल्लेख नहीं था। 42 वें संविधान संषोधन अधिनियम 1976 द्वारा संविधान के भाग 4-क में अनुच्छेद 51-क जोड़कर दस मौलिक कर्तव्यों का समावेष किया गया। 86 वें संषोधन द्वारा एक कर्तव्य और जोड़ा गया। वर्तमान में नागरिकों के लिए ग्यारह कर्तव्य निर्धारित किये गये हैं।
ये हैं ग्यारह कर्तव्य
जितेंद्र चैहान ने बताया कि संविधान में प्रत्येक नागरिक के लिए ये ग्यारह कर्तव्य हैं-
1. संविधान का पालन करें और उसके आदर्षों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करें।
2. स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्षों को हृदय में संजोये रखे और उनका पालन करे।
3. भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे।
4. देष की रक्षा करे और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करे।
5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे जो धम, भाषा और प्रदेष या वर्ग पर आधारित सभी भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध है।
6. हमारी सामासिक संस्कृति की गौरवषाली परंपरा का महत्व समझे और उसका परिरक्षण करे।
7. प्राकृतिक पर्यावरण की जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करे और उसका संवर्धन करे तथा प्राणिमात्र के प्रति दयाभाव रखे।
8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।
9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे और हिंसा से दूर रहे।
10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करे, जिससे राष्ट्र निरंतर बढ़ते हुए प्रयत्न और उपलब्धियों की नई ऊँचाइयों को छू ले।
11. यदि माता-पिता या संरक्षक हैं तो छह वर्ष से चैदह वर्ष तक की आयु वाले अपने यथास्थिति बालक या प्रतिपाल्य के लिए षिक्षा के अवसर प्रदान करे।

जितेंद्र ने कहा कि अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यदि आप अधिकार चाहते हैं तो आपको कर्तव्य के पालन के लिए तैयार रहना चाहिए।
आयोजन में सहयोग कोमल सोनगड़े, राहुल मालवीया, राहुल वर्मा, नंदिनी मालवीया, रवीना मालवीया ने दिया।


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