बड़वानी~इसलिये था कल साल का सबसे छोटा दिन~~

बड़वानी /पृथ्वी की परिभ्रमण और परिक्रमण नामक दो गतियां होती हैं। पृथ्वी अपनी धूरी पर भी घूमती है और सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है। धूरी पर घूमने की वजह से दिन-रात होते हैं तथा सूर्य के चारों ओर घूमने से ऋतुएँ परिवर्तित होती हैं। पृथ्वी अपने अक्ष पर साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है। विषुवत रेखा या भूमध्य रेखा पृथ्वी के मध्य में है तथा पृथ्वी को उत्तरी गोलार्द्ध एवं दक्षिणी गोलार्द्ध में बांटती है। 21 मार्च और 23 सितम्बर को सूर्य की किरणें धरती के मध्य में विषुवत रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं, इसलिये इन दिनांकों को दिन एवं रात की अवधि बराबर होती है। 21 जून को सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित कर्क रेखा पर लंबवत पड़ती हैं, अतः इस दिनोंक को उत्तरी गोलार्द्ध मेें सबसे बड़ा दिन होता है। 22 दिसम्बर को  सूर्य की किरणें दक्षिण गोलार्द्ध में स्थित मकर रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं, इसलिये इस दिन उत्तरी गोलार्द्ध में दिन सबसे छोटा होता है और रात सबसे बड़ी होती है। दक्षिणी गोलार्द्ध में इसके विपरीत स्थिति होती है। वहां पर 22 दिसम्बर को सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। भारत उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित एक देष है, अतः यहां दिन एवं रात की अवधि उक्तानुसार कम, ज्यादा या बराबर होती है। यही कारण है कि कल यानी 22 दिसम्बर को साल का सबसे छोटा दिन था। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्षन प्रकोष्ठ के कॅरियर काउंसलर डाॅ. मधुसूदन चैबे ने विद्यार्थियों को बताई। प्राचार्य डाॅ. आर. एन. शुक्ल के मार्गदर्षन में आयोजन हुआ।
उज्जैन की गणना के अनुसार 22 दिसम्बर को दिन केवल 10 घंटे 42 मिनिट का और रात 13 घंटे 18 मिनिट की थी। अन्य स्थानों पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय में कुछ मिनिटों का अंतर रहा। कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया और कोमल सोनगड़े ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में इस भौगोलिक घटना पर आधारित प्रष्न पूछे जाते हैं, इसलिये यह जानकारी विद्यार्थियों को ग्लोब की सहायता से समझाते हुए दी गई। सहयोग प्रीति गुलवानिया, कोमल सोनगड़े, जितेंद्र चैहान, रवीना मालवीया ने दिया।


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