बैतूल~प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए पंडित गोविंद मुदगल~~

सचिन शुक्ला बैतूल~~

शाहपुर -  खेडापति मंदिर  पतोवा पूरा में चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ  के तहत शुक्रवार को पांचवे दिन श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। श्रीधाम वृंदावन से पधारे परम पूज्य श्रीराम मुदगल शास्त्री जी महाराज के सुपुत्र गोविंद मुदगल ने कहा कि कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं।
जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण के ही माने जाते हैं। श्रीकृष्ण का जन्म क्षत्रिय कुल में राजा यदुकुल के वंश में हुआ था।
कथा आचार्य गोविंद मुदगल ने श्रीकृष्ण जी के जीवन गाथा का विस्तारपूर्वक विवरण करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लेते ही कर्म का चयन किया। नन्हें कृष्ण द्वारा जन्म के छठे दिन ही शकटासुर का वध कर दिया, सातवें दिन पूतना को मौत की नींद सुला दिया।
प्रभु ने बाल्यकाल में ही कालिया नाग वध किया और सात वर्ष की आयु में गोवर्धन पर्वत को उठाकर इंद्र के अभिमान को चूर-चूर किया। गोकुल में गोचरण किया तथा गीता का उपदेश देकर हमें कर्मयोग का ज्ञान सिखाया। प्रत्येक व्यक्ति को कर्म के माध्यम से जीवन में अग्रसर रहना चाहिए।


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