झाबुआ~ग्रामीण क्षेत्र के छात्रावास चल रहे भगवान भरोसे-मध्यान्ह भोजन नही मिला दोपहर 2 बजे तक-भय खाते है आम तौर से बच्चेअधीक्षकों से ~~

मीनू के अनुसार नही मिल पाता भोजन ,ढेकल बडी का अधीक्षक नही रहता है आश्रम में रात्री में~~

झाबुआ। संजय जैन~~

शासकीय बालक आश्रम ढेकल बडी में वहां निवासरत बच्चों को समय पर मध्यान्ह भोजन नही मिलने तथा मिनू के अनुसार भोजन नही मिलने की बात सामने आई है


मध्यान्ह भोजन अभी नही मिल पाया दोपहर 2 बजे तक .....

मीडिया टीम ने शुक्रवार को जब इस आश्रम का भ्रमण किया तो पाया गया कि वहां पदस्थ छात्रावास अधीक्षक रायसिंह सिंगाड दोपहर 2 बजे आश्रम में मौजूद नही थे। 50 सीटर वाले इस आश्रम भवन में जब बच्चों से चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि उन्हे मध्यान्ह भोजन अभी तक नही मिल पाया है। रसोईयन अब आने वाली है तथा भोजन  बनायेगी। छात्रावास भवन में लगे मीनू चार्टस के अनुसार उन्हे मध्यान्ह भोजन एवं सायंकालीन भोजन नही मिलता है। मीनू में अंकित किये गये चाट्र्स के अनुसार उन्हे नाश्ता भी नही नही मिलता है। नाश्ते में पोहे दिये जाते है।

 

किसे जिम्मेवार माना जावेगा.....?

यहां पर चौकीदार वाटरमेन की पदस्थापना भी बताई गइ है किन्तु चौकीदार भी नदारद पाया गया। जब छात्रावास अधीक्षक के आने पर बच्चों को दोपहर तक मध्यान्ह भोजन नही मिल पाया है के बारे में बात की तो उन्होनेे बच्चों के सामने धोंस भरी निगाह सेे पुछा तो बच्चों ने डर कर बताया कि उन्हे समय पर भोजन एव ंनाश्ता मीनू के अनुसार ही मिलता है। छात्रावास अधीक्षक को नियमानुसार बच्चों की देखरेख एवं सुविधा की दृष्टि से आश्रम भवन में ही निवास करना चाहियेे किन्तु जानकारी मिली कि वे रानापुर से आना जाना करते है। इस प्रकार रात बेरात यदि किसी बच्चें का स्वास्थ्य खराब हो गया या फिर कोई अन्य अनहोनी आदि की स्थितिया संयोगवश पैदा हो जाती है तो इसके लिये किसे जिम्मेवार माना जावेगा.....? 


स्वीकार की दो तीन दिन रानापुर अपने घर जाने की बात छात्रावास अधीक्षक ने.....

माह  में दो तीन दिन रानापुर अपने घर जाने की बात छात्रावास अधीक्षक ने भी स्वीकार की है और बताया कि आश्रम के बच्चों को पूरी तरह सभी सुविधायें दी जाती है। इस तरह गा्रमीण अंचलों में छात्रावासो,आश्रमों को किस तरह से संचालित किया जाता है यह इसी बात से स्पष्ट है कि जिम्मेवार अधीक्षक अपनी मनमर्जी के अनुसार ही आश्रम छात्रावास संचालित करते है। यह भी जानकारी मिली है कि मीनू अनुसार भोजन के बील कागजी तौर पर ही बनाये जाते है और इसे कमाई का साधन बनाते है। 

भय खाते है आम तौर से बच्चे अधीक्षकों से... 

छात्रावासों एवं आश्रमों के अधीक्षकों से आम तौर बच्चे भय खाते है कि कही उन्हे छात्रावास से कोइ्र भी कारण बता कर 

निकाल न दे इस कारण वे उनकी हां मे हां मिलाने को मजबुर होकर गलत को भी सही बता देते है। प्रशासन यदि जिला 

मुख्यालय के ही होस्टलों का रात्री मे औचक निरीक्षण करे तो इन छात्रावासों में अधिकांश अधीक्षक नदारद ही मिलेगें वही छात्रावास मे रह रहे बच्चों से यदि जानकारी मिल जाये तो इन अधीक्षकों की कई खामीया उगलने से नही चुकते है।


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