*मनावर ~सांसद छतरसिंह दरबार की पहल पर गणपति घाट के लिए ढाई सौ करोड़ रुपए मंजूर वन विभाग की अनुमति के बाद निर्माण होगा*~~

*सांसद दरबार ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को आभार माना* ~~

*सात किलोमीटर में नए सिरे से होगा घाट का निर्माण*~~

निलेश जैन मनावर ~~

धार-महू संसदीय क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद छतर सिंह दरबार की पहल पर एक महत्वपूर्ण फैसला हुआ है। जिले के जिस गणपति घाट पर सैकड़ों लोग अपनी जान गवा चुके हैं। साथ ही जिस घाट के कारण हजारों लोग घायल हुए थे। ऐसे गणपति घाट पर 7 किलो मीटर के हिस्से में नई सड़क बनाने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने करीब ढाई सौ करोड़ मंजूर कर दिए हैं। जानकारी सांसद छतरसिंह दरबार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने उपलब्ध कराई है।भाजपा नेता विश्वास पांडे ने दी। सांसद बनने के बाद ही दरबार ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए थे। उन्होंने मार्ग के सुधार के लिये विशेष रूप से 25 नवंबर को पत्र लिखा था। इसके बाद से ही स्वीकृति को लेकर तेजी आई। सांसद छतरसिंह दरबार के प्रयास के चलते गणपति घाट के लिए बड़ी पहल हुई है। जहां पर अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों लोग घायल हुए हैं। गणपति घाट में जो तकनीकी खामी थी, उसको दूर करने के लिए ढाई सौ करोड़ रुपए मंजूर हो गए हैं। जिसकी जानकारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर  को अवगत करा दिया गया है।सांसद छतरसिंह दरबार ने इस बात को लेकर विशेष रूप से खुशी जाहिर की है। कि इस मामले में प्राधिकरण और मंत्रालय ने विशेष रूप से रूचि ली। खासकर दरबार ने परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार माना है।पांडे ने बताया कि बाकानेर घाट का प्रपोजल बना लिया गया था। जो कि तैयार होने के बाद में स्वीकृति के लिए दिल्ली में पेंडिंग था। सांसद द्वारा प्रयास के बाद में यह पेंडिंग मामला स्वीकृत हो चुका है। सैद्धांतिक स्वीकृति हो चुकी है। अब मुख्य रूप से मध्यप्रदेश सरकार की सहयोग की आवश्यकता है। इसकी वजह यह है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने यह विषय रखा है कि जैसे ही मध्य प्रदेश सरकार की मदद से केंद्रीय मंत्रालय स्तर से फॉरेस्ट क्लीयरेंस हो जाएगा। वैसे ही इस काम को शुरू कर दिया जाएगा। सांसद दरबार ने कहा कि इस मामले में  मुख्यमंत्री से लेकर अन्य संबंधित लोगों को पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से भी इस बात के लिए निवेदन करूंगा कि वह स्थानीय स्तर पर से जो-जो अनुमति लेना है उसमे मदद करें। एक अनुमान के तहत यहां पर करीब 30 हेक्टेयर जमीन फॉरेस्ट विभाग की आवश्यकता होगी। जमीन के बारे में कलेक्टर से लेकर वन मंडलाधिकारी को विशेष रूप से मदद करना होगी। जैसे ही यह स्वीकृति मिल जाती है। तत्काल प्रभाव से काम शुरू करवा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि ढाई सौ करोड़ रु मंजूर हो चुके हैं। इसमें और भी यदि राशि की आवश्यकता होती है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मंत्रालय   के माध्यम से पर्याप्त से अधिक राशि उपलब्ध कराई जाएगी।


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