*बड़वानी /पिपलूद~सभी के कल्याण का सन्देश है श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में*~~

आवश्यकता से अधिक संग्रहित वस्तु आपकी नही है ~~

गौमाता के संरक्षण के लिए देना होगा गौ उत्पाद को बढ़ावा~~

पिपलूद:पंचम दिवस समस्त कथा समिति' के तत्वाधान में राम मन्दिर में आयोजित  कथा के पांचवे दिन साध्वीश्री अखिलेश्वरी दीदी मां ने श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि स्वयं भगवान  बालक बन कर  जगतकल्याण करने के लिए  सामान्य व्यक्ति के घर जन्म लिया ।गौ पालक व माखनचोर बनने के साथ इन लीलाओं से सन्देश दिया कि आवश्यकता से अधिक संग्रहित वस्तु आपकी नही है उसे जरूरतमंद को बांट कर स्वयं के साथ उसे भी प्रसन्नता दीजिए। आपको मन की संतुष्टि मिलेगी

भगवान होते हुए भी वो स्वयं गौ माता के सेवक बन व
साध्वीश्री ने  श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुंदर वर्णन करते हुए बताया कि मानव रूप में प्रकट होकर उन्होंने मनुष्य की सभी इच्छाओं का ध्यान रखा। राक्षसी पूतना को भी माँ के समान सद्गति दी। सबको प्रेम व समर्पण दिया, सब गोपियों के घर इकठ्ठे किए माखन ओर कर के रूप में कंसके राज्य में जानेवाले माखन को चुरा कर अपने दीन हीन मित्रों को व व्रजवासियों को बाँट देते थे ताकि उनके गरीब मित्र व गाँव वासी भी उसको  प्राप्त कर सके। गोवर्धनधारी बन कर पर्यावरण संरक्षण व गौ को इस धरा पर जगतमाता का स्थान दिया। बल लीलाओं  को माध्यम बनाकर दीदी मां ने कहा कि हम भी आवश्यकता से अधिक वस्तुओं को घर में भर लेते है, पर किसी जरूरतमंद को बांटते नही चाहे वो आपके काम की नही यानी उस वस्तु के बिना आपका कार्य चल भी सकता है पर जिनके पास बिल्कुल भी नही है वे वस्तु को पाकर अवश्य प्रसन्न होंगे। दीदी मां ने कहा कि   दीदीमां ने बताया कि जरूरत से अधिक वस्तु का संग्रहण हमें आसक्त,लोभी व रोगी बनाता है ।

#पर्यावरण के साथ गौमाता इस धरा का अनमोल धन है सदैव सुरक्षा कीजिए
दीदी मां कहा कि श्रीकृष्ण लीला में गौ माता का विशेष स्थान रहा है।मान्यता है कि जहाँ गौसेवा,
गीता व तुलसी का वास हे वहा स्वयं गोपाल का निवास है । उन्हें गौ चराने जाना बहुत ही भाता था। कहा जाता है कि गाय के पैरों से उड़ी धूल हमें पवित्र बनाती है। जहां गौ माता का निवास है वहां पर कोई वास्तु दोष नही रहता । गोवर्धन लीला के माध्यम से दीदी  मां ने पर्यावरण के महत्व को बताते हुए कहा कि गौ संरक्षण के लिए एक  संकल्प आवश्यकता है कि अधिक से अधिक हरियाली को बढ़ाकर ,गौ उत्पाद का प्रयोग करे।
गौमाता से मिलने वाली वस्तुओं का महत्व अब वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध कर दिया है। केवल गौरक्षा व पर्यावरण संरक्षण का नारा ही ना लगा कर स्वयं संवर्धन करें पोषण करे तभी अनमोल धन राष्ट्र की माता व हरे सोने पर संकट नही आएगा ।
कथा में दीदी मां द्वारा गाए सुंदर  भजनों के आनंद केसाथआज सभी भक्तोंने गोवर्धन धारी की सजीव झांकी के दर्शन का भी आनंद उठाया
अनमोलसमाचार
लक्ष्मण राणावत


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