झाबुआ~राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशों को अनदेखा कर जिला शिक्षा केन्द्र ने प्रधानपाठको के स्थान पर अपने चहेतों को भेजा निष्ठा कार्यक्रम के प्रशिक्षण में ~~





जिले में शिक्षा की गुणवत्ता पर खडे हो रहे सवाल ~~

क्या झाबुआ जिले में प्रधान पाठक के सभी पद रिक्त है.~~





झाबुआ। संजय जैन~~

 राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशों को धत्ता बता कर मन मर्जी से प्रदत्त निर्देशों से उलट जिला शिक्षा केन्द्र,सर्व शिक्षा अभियान झाबुआ द्वारा मनमाने तौर पर निष्ठा कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रधान पाठक अथवा मास्टर फेसिसीलेटर(डीआरजी) को राजधानी भोपाल में चल रहे पाच दिवसीय प्रशिक्षण 21 जनवरी से 25 जनवरी तक के लिये जिले से प्रदत्त निर्देशो के अनुसार भेजा जाना चाहिये था किन्तु जिला परियोजना समन्वयक एलएन प्रजापत द्वारा अपने चहेतों और उन्हे येन केन प्रकारेण्रा उपकृत करने वालों को कलेक्टर झाबुआ को अंधेरे में रख कर तथा उनका अनुमोदन प्राप्त करके प्रशिक्षण के लिये भेज दिया गया है। 




भेजा जाना चाहिये था प्रधानपाठक,डीआरजी को.... 





जिले से भेजे गये 10 चयनीत प्रशिक्षणार्थियों में ऐसे व्यक्तियों का चयन हुआ है तो राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशो के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने की पात्रता ही नही रखते है। जबकि इसमें प्रधानपाठक,डीआरजी को भेजा जाना चाहिये था। इसमें भी प्राथमिकता प्रधान पाठक की रहती है। परन्तु जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा भेजे गये 10 कर्मचारियों में मानसिंह हटिला एपीसी इएण्डआर,चन्दन भाबर प्राथमिक शिक्षक,इदरिश खान बीएसी, मोहम्मद शाह सहायक शिक्षक,भारतसिंह चौहान,सहायक शिक्षक,पंकज बैरागी,माध्यमिक शिक्षक,बिहारीलाल सोनी सेवा निवृत शिक्षक, अतिक हुसैैन कुर्रेशी माध्यमिक शिक्षक को प्रधान पाठक बताकर ,गजेन्द्रसिंह चंद्रावत माध्यमिक शिक्षक, चन्द्रशेखर श्रीवास्तव प्राथमिक शिक्षक को इस कार्यक्रम के प्रशिक्षण के लिये भेज दिया गया है।




क्या झाबुआ जिले में प्रधान पाठक के सभी पद रिक्त है...? 





ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है  कि क्या झाबुआ जिले में प्रधान पाठक के सभी पद रिक्त है...? या प्रधानपाठकों का जिले मे अभाव है ....? या फिर एक भी प्रधान पाठक प्रशिक्षण में जाने के योग्य ही नही है.....? ऐसे कइ्र्रं सवाल चर्चा का विषय बने हुए है । यदि प्रधान पाठक नही जासकते थे तो उनकी बजाय डीआरजी को चयनीत करके राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जारी चयन सूची के अनुसार भेजा जासकता था किन्तु जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा उक्त चयनीत सूची को भी पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया गया है ।इस तरह जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक द्वारा या तो राज्य शिक्षा केन्द्र के निर्देशो को पढा ही नही गया होगा या फिर इसे जानबुझ कर नजरा अंदाज करके तथा कलेक्टर को गुमराह करके अनुमोदन करवा कर अपने  कृपा पात्रों को चयनीत करने में कोई कसर बाकी रखी गई हो ऐसा नही लगता है। जाहिर है जिले के डीपीसी की इस तरह की भूमिका एवं कार्यपद्धति से जिले में शिक्षा में गुणवत्ता का स्तर बढेगा यह कोरी कल्पना के अलावा कुछ नही होगा ।




जिम्मेदारो से नही हुआ संपर्क-....





इस बात को लेकर संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र आईरिन सिंधिया जे.पी.से मोबाईल नम्बर 9425172700 पर संपर्क स्थापित करने प्रयास किया। संचालक के पीए द्वारा बताया कि मेडम के मिटिंग में व्यक्त होने के कारण उनसे चर्चा नही हो पायेगी। लम्बे इंतजार तक उनसे संपर्क नही हो पाया। वही झाबुआ कलेक्टर प्रबल सिपाहा से संपर्क स्थापित करना चाहा किन्तु उन्होने मोबाईल रीसिव नही किया । 




-जो बोल सकें तथा प्रशिक्षण दे सकें.....





जिला शिक्षा केन्द्र के परियोजना समन्वयक एलएन प्रजापति से संपर्क करने पर उनका कहना था कि प्रशिक्षण में ऐसे लोगो को भेजा गया है जिनकी सेवायें उपयोगी होकर जो बोल सकें तथा प्रशिक्षण दे सकें। अधिकतर प्रधान पाठक 60 वर्ष से अधिक आयु के होने को है। तथा जिनकी सेवायें आगामी 4-6 सालों तक सेवाये ली जा सकती है इसलिये ऐसे लोगों को चयनीत करके प्रशिक्षण में भेजा गया है ।





......एलएन प्रजापति-डीपीसी 








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