बड़वानी /पिपलूद~भक्ति माया के बंधन तोड़ देती है मन का समर्पण , भगवान से मिला देगा~~

भागवत में कृष्ण जन्म पर झूमे श्रद्धालु~~

पिपलूद :भगवान श्रीराम की मर्यादा और श्रीकृष्ण के स्वभाव  को  तभी समझोगे जब मन का समर्पण कर राम  व कृष्ण में करोगें। पर  मनुष्य  का अहंकारी मन स्वभावश भगवान को छोड़कर जब माया की ओर दौड़ता है। ऐसे में वह बंधन में आ जाता है। सूर्य व चन्द्र वंश की महिमा को बताते हुए आज साध्वी श्री अखिलेश्वरी जी ने चौथे दिवस पर श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया।

साध्वी जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ। भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञानरूपी प्रकाश से दूर किया। 
पर माया के ही वश में आकर कंस भगवान कृष्ण को  साधारण मानव समझ कर शत्रु मानता रहा इसलिए वासुदेव व देवकी को कारागार के बंधनों में डाल दिया ,पर उसे यह पता नही था कि वह स्वयं मोह माया का बंदी बन गया है।  दीदी मां ने कहा कि जब भक्ति मार्ग में भक्त लीन रहता है तब प्रभु दर्शन होते हैं। अन्यथा नही मनुष्य जब तक  भगवान की सर्वज्ञता को नही समझेगा तब तक भक्ति  का विश्वास नही जागेगा  वो सांसारिक सुख दुःख केजाल में फंसकरभटकता ही रहेगा।  इसलिए संसार का कल्याण करने के लिए भगवान अवतार लेते कि जब-जब धर्म की हानि होती है। तब सज्जनों का कल्याण और राक्षसों का वध करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं।

#कृष्ण जन्म की सजाई सजीव झांकी
दीदी मां ने संगीतमयी चौपाइयों-जब-जब होई "धर्म की हानि, बाढहि असुर अधम अभिमानी, तब-तब धरि प्रभु मनुज शरीरा, हरहि कृपा निज सज्जन पीरा "आदि चौपाइयों से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। श्री कृष्ण जन्म की सजीवझांकी के दौरान भक्तों ने बाल गोपाल के खूब जयकारे लगाते हुए  श्रीकृष्ण जन्म उत्सव मनाया ।


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