झाबुआ~यातायात पुलिस कर्मियों का कारनामा-वाहन के चालान जुर्माने की राशि मे सरकारी रसीद की मूल एव कार्यालय प्रति में अंतर~~ 





अधिकारियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे मे~~





झाबुआ। संजय जैन~~

मप्र मैं यातायात के प्रति वाहन चालकों को जागरुक बनाने के लिए चलाया जा रहा यातायात सप्ताह अभियान पुलिस कर्मियों के लिए दूध देती गाय बन गया हैं। जिला मुख्यालय पर तैनात पुलिस कर्मी चालकों को अभियान की जानकारी देने के बजाय चालान काटने की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं, उनकी यह कार्यप्रणाली संदेह के घेरे मे बनी हुई हैं। 





कार्बन कॉपी की रसीद मे रहता हैं अंतर ......





चालान के माध्यम से वसूली कर चालकों को थमाई जा रही मूल रसीद और विभाग के पास जमा रसीद बुक की कार्बन कॉपी की रसीदों की राशि मैं काफी अंतर दिखाई देता हैं। उनकी और से काटे जाने वाले चालान की रसीद जो चालकों को थमाई जाती है उसमें और कार्बन कॉपी की रसीद मे कितना अंतर रहता हैं। इसे एक नजर में ही भांपा जा सकता है। चालकों से वसूली करने के बाद राशि मैं हेराफेरी करना विभाग के कर्मियों का शगल बना हुआ हैं। ऐसी ही तीन रसीदे हमारे प्रतिनिधि को देखने को मोबाइल के माध्यम से मिली है। मसलन जाफ र नामक चालक को चालान काटकर थमाई गई रसीद मे एक हजार रूपए की राशि दर्ज है जबकि उसी रसीद की कार्यालय में रखी जाने वाली कार्बन कॉपी जिसे केशबुक एवं लेखों में एंद्राज करना होता है ,मे पॉच सो रुपए ही दर्ज किया साफ  साफ  दिखाई दे रहा हैं। इसी प्रकार रईस और दशरथ नामक चालकों का काटा गया एक- एक हजार रुपए के चालान की कार्बन कॉपी मे भी 500-500 रुपए दर्ज किया हुआ स्पष्ट नजर आ रहा हैं। हांलाकि की यह रसीदे माह अप्रैल 2019 की हैं, जो लोकसभा चुनाव के आसपास की चालानी रसीदें है। उस समय चालान काटने वाले यातायात प्रभारी वही थे जो आज भी कार्यरत हैं। इसकी अगर गंभीरता से जांच की जाए तो निश्चत तौर पर चौकाने वाले तथ्य प्रकाश में आ सकते है ।





नियोजित तरीके से शासन को राजस्व की हानि ....





चालान के जुर्माने की एक हजार व कार्बन कापी की पांच सौं रुपए की रसीदों के मिलने से राशि की बंदरबाट होने और विभाग की और से दो रसीद कट्टों का इस्तेमाल कर या फिर कार्बन को हटाकर रसीदे बनाने की संभावना को इंकार नही किया जा सकता हैै। इस प्रकार नियोजित तरीके से शासन को राजस्व की हानि पहुंचाने का संदेह बना हुआ है।





कार्बन कॉपी और मूल कॉपी.....किसी एक कर्मचारी का खेल नहीं 





यातायात विभाग की चालानी रसीदो मे एक ही प्रकार की कार्बन कॉपी और मूल कॉपी में यातायात कर्मियों की वजह से कारगुजारी देखने को मिल रही है। यह रसीद मूल रूप से तो 2019 की है,जिसमें यातायात कर्मियों ने अपनी गांधी छाप नोटों के चक्कर में मूल कॉपी में रुपये 1,000 अंकित कर रखे हैं वही उसी की कार्बन कॉपी में रुपये 500 अंकित कर मुंह में राम बगल में छुरी रख कर काम कर विभाग को व राजस्व को चूना लगाने से भी नहीं चूक रहे हैं। आखिर इसमें इतनी बड़ी धांधली हो रही है वह जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं दिखाई दे रही है...?  वही इन रसीदो से साफ  जाहिर हो रहा है कि इस काम के पीछे कई कर्मचारी शामिल है क्योंकि यह किसी एक कर्मचारी का कारनामा का खेल नहीं दिखाई दे रहा है।





मूल और कार्बन कॉपी रसीदो का सच......





वाहनों की चालानी कार्रवाई में जो रसीदें हमारे मोबाइल पर पहुंची है वह इस प्रकार है कि रसीद कट्टा क्रमांक 4823 की एक ही तारीख में दो रसीद हमें प्राप्त हुई है जिसमें रसीद नंबर 35 व 36 पर मुल रसीद पर एक एक हजार की चलानी रसीदें काटी गई थी और वही इनकी कार्बन कॉपी पर 500  रुपए की दो रसीदो यातायात कर्मियों के कारनामे दिखाई दे रहे हैं। यह दोनों रसीदे 16.4.2019 की है। वहीं एक रसीद इसके पहले की है जो रसीद कट्टा क्रमांक 4824 और रसीद नंबर 63 पर दिखाई दे रहा है,जो जनवरी 2019 की रसीद है। जिस में भी ओरीजिनल रसीद पर रु.1,000 अंकित किए गए हैं वही कार्बन कॉपी पर रु.500 अंकित कर इस प्रकार का गोरख धंधा करने से यातायात कर्मी बाज नहीं आ रहे हैं। यदि जनवरी 2019 से लेकर अप्रैल 2019 तक तीन रसीदें दिखाई पड़ती है और चार माह इनके बीच में आ रहे हैं यदि यातायात कर्मियों ने अपने कारनामों को सतत अंजाम दिया होगा तो कितनी बड़ी राशि एकत्र की होगी ...? बड़े पैमाने पर इन्होंने राजस्व को भी घाटे में पहुंचाया।





कौन-कौन है इन चालानी रसीदो के काले कारनामों में शामिल....?





यदि ईन रसीदो चालानी कार्रवाई कर रहे कर्मचारियों के बारे में बात करें तो यह बात भी सत्य है कि अकेले कर्मचारियों की इतनी हिम्मत नहीं है, कहीं ना कहीं इसमें अन्य कर्मचारी भी लिप्त हो सकते हैं। इसमें छोटा कर्मचारी रिस्क नहीं ले सकता है। अन्य कर्मचारियों के आशीर्वाद के बगैर इस प्रकार का कृत्य करना छोटे कर्मचारी के लिए मौत के कुए से कम नहीं आंका जा सकता। इसमें और भी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं ...? यह जांच का विषय है।





माना की रसीदें पुरानी है लेकिन अधिकारी यहीं पर पदस्थ है......





माना कि यह रसीदें 1 साल पुरानी है लेकिन यह भी सोचनीय प्रश्न है कि इन चालानी रसीदो पर जिनके साइन है वह मुख्यालय पर ही अपने पद पर बने हुए हैं। इन चालानी रसीदो को देखकर लगता है कि इसकी भनक जिले के कप्तान तक पहुंची या नहीं पहुंची यह तो हम नहीं जानते ...? क्या जिन जिम्मेदारों ने इस चालानी कार्रवाई में मूल व कार्बन कॉपी मैं राशि को गलत दर्शा रखा है उन पर क्या एक्शन होगा यह आने वाला समय बताएगा.....?





एमपीटीसी 6 की हर रसीद की होती है केशबुक में दर्ज....





हर शासकीय कार्यालय में शासकीय धन की प्राप्तियो ं के लिये वित्तिय नियमों के तहत एमपीटीसी-6 रसीद बुक कोषालय के माध्यम से या शासकीय प्रादेशिक मुद्रणालयों से मांगपत्र के अनुसार प्रदाय की जाती है । इन रसीद बुकों को विधिवत स्टाक रजिस्टर मेंदर्ज करके प्रत्येक रसीद बुक का हिसाब रखा जाता है । सरकारी कार्यालयों द्वारा इन रसीद बुकों को अपने अधीनस्थो जिनके द्वारा केश एकत्रित किया जाता है , को प्रदान की जाती है और हर रसीद के माध्यम से प्राप्त धनराशि को विभाग की केशबुक में पृविष्ठ किया जाना अनिवार्य होता है। यदि रसीद बुक के मान से रकम जमा नही होती है तो सबंधित के विरूद्ध वित्तय अनियमितता की कार्रवाही भी हो सकती है । यदि मुल रसीद एवं उसकी कार्बन कापी में राशि का अन्तर हो तो इसे गभीर अनियमितता माना जाता है। विभाग के महालेखाकार टीमों द्वारा आडिट के समय भी प्रत्येक रसीद से प्राप्त रकम की पुष्टि भी आडिट दल करता ही है। ऐसे में इन संदिग्ध रसीदों को लेकर सवाल उठता है कि क्या इस प्रकार से किया गया कृत्य अस्थाई गबन आदि की श्रेणी में नही आता है ...? इस पर भी विभाग को संज्ञान लेकर कार्यवाही करना चाहिये ।





जिम्मेदार बोले-.....





आपने हमें जानकारी में बताएं हैं हम इसे वेरीफाई करवा लेते है ।





......विनित जैन- पुलिस अधीक्षक झाबुआ




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