*झाबुआ~सहकारिता एवं भू-माफिया संजय एवं गणेश पर 17.5 लाख का जुर्माना*~~

*सारे सबूत होने के बाद भी 420 व 120 ब की कार्यवाही से दूर माफिया डी.आर. साहब क्यों चले जाते हैं छुट्टी पर*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा की रिपोर्ट~~

झाबुआ’ - जिले में पिछले कई दिनों से चर्चित सहकारी सोसायटी के माफिया मेघनगर निवासी संजय श्रीवास एवं गणेश प्रजापत के खिलाफ सहकारिता विभाग द्वारा हाथी के दाँत की तरह दिखने वाली छूट मुट कार्यवाही करते हुए इन दोनो के खिलाफ एवं इनके परिवार के खिलाफ कार्यवाही करते हुए इन्हें विभिन्न संस्थाओं के प्राथमिक सदस्यता से अलग कर दिया है तथा इनके खिलाफ लाखों का जुर्माना लगाया है। सहकारिता विभाग के डिप्टी कमिश्नर  अम्बरीश वैद्य ने सहकारिता की विभिन्न धाराओं के तहत म.प्र. सहाकारी अधिनियम 1960 की कई धाराओं के तहत इन आपत्तिजनक संस्थाओं में फर्जी रुप से सदस्यता ग्रहण कर विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं में पदाधिकारी बनकर बैठे उक्त दोनो एवं उनकी पत्नियों, पुत्र, पुत्रवधु के खिलाफ  कार्यवाही विभाग द्वारा की गई।

*बयानो एवं सबूतो का जखीरा मिलने के बाद भी 420 व 120 ब की कार्यवाही क्यो नहीं*

उल्लेखनीय है कि मेघनगर में आयोजित जांच कैंप समस्त सदस्यों एवं पदाधिकारियों को बुलाया गया था। जिसमें अधिकांश सदस्यों ने सहकारिता में सदस्य और पदाधिकारी न होेने से संबंधित अपने कथन दिये तथा संजय श्रीवास एवं गणेश प्रजापत एवं उनके परिवार द्वारा कथित रुप से इन संस्थाओं का संचालन अपने निजी लाभ के किया गया तथा अर्थिक लाभ प्राप्त किया।इसी प्रकार आदितजाति सेवा सहकारी संस्था मर्या. मेघनगर में भी प्रक्रिया में संजय श्रीवास द्वारा अपने प्रभाव से अपनी माताजी के नाम से न्यूनतम राशि में लाखों की दुकान प्राप्त कर शासन को चुना लगा चुके है। इसी प्रकार इन लोगों द्वारा आदर्श प्राथमिक उपभोक्ता भंडार मेघनगर के नाम से कार्यालय निर्माण के नाम से कलेक्टर महोदय से 600 वर्गफीट बेशकीमती करोड़ो की जगह ओने पाने दाम मात्र 2 लाख रूपये फर्जी ढंग से प्राप्त की थी।उत्पादक सोसायटी में लाखों रुपये का संदिग्ध आर्थिक संप्यवहार मुख्य है।जाॅच में श्रीवास और प्रजापत द्वारा विभिन्न योजनाओं मे पदत आर्थिक सहायता सोसायटी को शाशकिय भूमि के आवंटन और वहाॅ निर्धारित गोदाम न बनवा कर दुकानें निर्मित कर उन्हें औने पौने दाम पर खुद ही कब्जा जमा लेने कर एक अमला उजागर हो सकता है। अप्रष्ट सूत्र बताते है कि रेल्वे फाटक के पास बेशकीमती जमीन की सभी दुकाने इन दोनों ने ही फर्जी नीलामी हथिआई है कथित प्रबंधक जगदीश अनुबंध कर लिया गया। जबकि झाबुआ डी.आर.को कई संस्थानों द्वारा व संस्था के सेल्समैनो द्वारा मय नोटरी के सबूत व माफियाओं के खिलाफ प्रचुर मात्रा में सबूत संजय गणेश के घर कार्यालय से फर्जी सील हरण के चेक रजिस्ट्रेशन कार्ड एवं कई अवैध दस्तावेज भारी मात्रा में मिले है।जिसमें पुलिस आईपीएस की धारा 420 व 120 ब की धारा का  सीधा मामला बनता है।

*इन सदस्यों पर हुई अर्थदंड की कार्यवाही*

इन संस्थाओं के फर्जी सदस्यों के पूरे कुनबे पर 17 लाख 50 हजार का आर्थिक दण्ड़ किया है। जिसमें रीता संजय श्रीवास पर विभिन्न संस्थाओं 3 लाख, श्रीमति सविता गणेश प्रजापत पर 3 लाख, संजय श्रीवास पर 2 लाख, गणेश प्रजापत पर 1.50 लाख, विनायक संजय श्रीवास पर 2 लाख, अंजली श्रीवास पर 1 लाख, कविता प्रजापत पर 1.50 लाख, अमन प्रजापत पर 50 हजार, श्रीमति जया रमेशचन्द्र प्रजापत पर 1 लाख, राजेश मोहनलाल प्रजापत पर 1 लाख, गोपाल मोहनलाल प्रजापत पर 50 हजार का अर्थदंड किया गया यदि यह एक माह में दंड नहीं भरते हैं तो इनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।

*एफ .आई .आर. दर्ज कराने के समय झाबुआ डी.आर .क्यों हो जाते हैं गायब*

यह वही गणेश और संजय उर्फ चंगू और मंगू के नाम से मशहूर माफिया है। जिनके विरुद्ध लोकायुक्त ने दिसंबर 2012 में विभिन्न धाराओं में भ्रष्टाचार अधिनियम धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 13 1 ब , भ्रष्टाचार निवारण 13 ब भा.द.वी.409 भा.द.वी. और 120 ब की गंभीर धाराओं में 56 लाख रुपये मामला पंजीबद्ध कर मेघनगर विपणन संस्था को चुना लगा दिया था। अपने दबाव एवं प्रभाव के कारण दोनों ही माफिया 8 साल बीत जाने के बावजूद भी माननीय न्यायालय को गुमराह कर शासन प्रशासन को जेब में रखने की बात करते फिर रहे है। ठीक उसी तरह पिछले दिनों 25 जनवरी को मेघनगर में बड़ी कार्यवाही होने के बाद डी.आर साहब गणेश प्रजापति पर मात्र शांति भंग 151 की धारा में मामला पंजीबद्ध करवा कर चले गए थे।जबकि उस दिन गणेश ने मूलभूत दस्तावेज छिपाकर भागने एवं शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की कोशिश की थी.. अचानक कार्यवाही वाले दिन ही साहब शाम को छुट्टी पर चले गए। अब जब पुनः18 फरवरी को 17.5 लाख रुपैया के अर्थदंड की  विभागीय कार्रवाई हाथी के दांत दिखाने के बाद जब पुलिस में एफ आई आर करने का वक्त आया तो संजय व गणेश पर प्रभावी कार्यवाही के बजाए ....डि.आर. साहब  छोटे कर्मचारियों  को दोराहे के रास्ते पर डाल के चले गए। अंततःजिसके फलस्वररूप डी.आर. साहब के नहीं होने के कारण प्रभावी कार्यवाही नही हो पा रही जो मजबूत आईपीसी एक्ट की धाराएं लगाई जा सके जैसे 420 ,120 ब ऐसे धाराओं में मुकदमा क्यो नही हो पा रहा ये..सब समझ के परे है। अब देखना यह होगा मुख्यमंत्री कमलनाथ सहकारिता विभाग के मध्य प्रदेश मंत्री गोविंद सिंह व थांदला विधायक वीर सिंह भूरिया के साथ जिला कलेक्टर प्रबल सिपाहा एवं जिला पुलिस कप्तान विनीत जैन की पंच परमेश्वर टीम कितना जल्दी माफियाओं के छक्के छुड़ाती हैं!


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