*झाबुआ~साब ओर सेठ आपको थांदला विधायक की उपेक्षा कहीं भारी ना पड़े*~~

*20 दिन बाद भी सहकारिता माफियाओ पर ठोस कार्यवाही नही*~~

*पर्दे के पीछे से साब ओर सेट व कौन पडियार कर रहा बचाओ*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा ब्युरो....9685952025~~

झाबुआ --- इतिहास गवाह है चोर चोर मौसेरे भाई पिछले दिनों मेघनगर में सहकारिता साख संस्थाओं में घपला करने वाले आटे एवं साटे के नाम से मशहूर दो व्यक्तियों के विरुद्ध छापामार कार्रवाई के दौरान घर दुकान एवं कार्यालय से कई  लोगों को बरगला कर अनलीगल तरीके से अशिक्षित लोगों के साथ धोखा कर उन भोले भाले लोगो को मूल दस्तावेज उक्त माफियाओं के घर ऑफिस से जप्त किए थे। इसकी टोपी उसके सिर रखने वाले ये काले कारोबारी पिछले 20 वर्षों से निरंतर समाजसेवा व धर्म की आड़ में आर्थिक सहयोग करने के नाम पर छलावा करके कई सीधे-साधे लोगों को छल रहे थे। सौ सुनार की ओर एक लूहार की.. एक दिन तो यह होना ही था। शासन-प्रशाशन का हथोड़ा जब चलता है तो अच्छे-अच्छे के हौसले पस्त हो जाता है.. असहाय लोगों को अंधेरे में रखकर अपने घर में चिराग जलाने वालो की बत्ती एक दिन बुझना ही थी।ओर वैसा ही हुआ मेघनगर विपणन सहकारी संस्था में 56 लाख रुपये के गबन में लोकायुक्त ने उक्त व्यक्तियो के खिलाफ कई धाराओं में एफ.आई.आर.दर्ज की थी। लेकिन मुख में राम बगल में छुरी रखने वाले विघ्न संतोषयों को अभी भी कहां संतोष था। मुफ्त के खाने के आदी ये आटे ओर साटे को फर्जी तरीके से सहकारी साख संस्था का अपने प्रभाब व दबाव में संचालन करने की शीकायत पर प्रशासन ने आखिर फिर एक बार जनवरी माह में धर दबोच ही लिया। अब यह दोनों भगोड़े कभी झाबुआ गोपाल मंदिर के पास साब को तो कभी सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरानी रिश्तेदारी निकालकर तो कभी नगर के एक सेट का चरणामृत पीकर शासन और प्रशासन के शिकंजे से निकलने की गुहार लगाते फिर रहे हैं।

*पर्दे के पीछे से साब ओर सेट व कौन पडियार कर रहा बचाओ*

आपने अक्सर फिल्मों और किताबों में यह डायलॉग जरूर पढ़ा और सुना होगा कि हमको तो अपनो ने लूटा गैरों में कहां दम था हमारी तो कश्ती ही वहां डूबी थी जहां पानी कम था.. कुछ ऐसा ही  वर्तमान थांदला विधायक वीर सिंह भूरिया के साथ हो रहा है.. कांग्रेस के झंडे बांधने से लेकर  कल्लीपुरा के खेतों की खाक छानने तक ग्राम के सरपंच से लेकर विधायक तक का सफर वीर सिंह भूरिया ने साब के साथ कंधे से कंधा मिलाकर किया वीर सिंह ने अपने जीवन का हर सुख साब के दुख को कम करने मैं लगा दिया।कुछ दिनो पूर्व चुनाव में भी भाजपा के गढ़ कहे जाने वाली अयोध्या में वीर सिंह भूरिया ने साब के लिए दिन-रात टापरे टापरे फलिए फलिए घूम कर भाजपा के वोटो में सेंधमारी की थी... लेकिन अब साब सांप बनकर रंग बदलने वाले फुलछाप गिरगिटो का साथ उन्हें बचा कर दे रहे हैं। वैसे ही नगर के सेठ उनके बारे में यह कहा जा सकता है कि उनकी छवि ऐसी है कि  उनकी जिस चीज पर निगाह पड़ जाए वह चीज  मानो उनकी ओर खिंची चली आती है।पिछले कुछ सालों पहले मेघनगर मार्केटिंग व रेक से माल उतरवाने के विवाद में उक्त दो व्यक्तियों के खिलाफ सेठ ने मोर्चा खोल दिया था।लेकिन अब ना जाने किस डर से वह भी आजकल इस कीचड़ में पैर डालकर अपने आपकी समाज सेवा की छवि को धूमिल करने में लगे हैं।छापामार कार्यवाही के बाद अक्सर उक्त दो माफियाओं को साईं चौराहे के समीप बने सेठ के कार्यालय के आसपास मंडराते हुए देखा जा सकता है। अब हम बात कर रहे हैं पडियार की फुलछाप लोगों से उनके क्या संबंध है यह तो वही जान सकते हैं लेकिन गुजरात बॉर्डर पर कौनसी एक सरकारी उचित मूल्य की दुकान पडियार के कहने पर मिली है यह बात जगजाहिर है पडियार अब इन माफियाओं को क्यों बचा रहे है यह ऊपर वाला ही जाने । जैसे ही साब , सेठ और पडियार का सहयोग माफियाओं को पर्दे के पीछे से मिलने लगा दोनों ही आटे और साटे प्रशासन को अपने जेब में रखने का दावा करने लगे। झाबुआ जिला डीआर के ऊपर के अधिकारी से रिश्तेदारी निकाल कर झाबुआ डी आर पर दबाव बनाना और भी कई हथकंडे उक्त माफिया अपने आप को पाक साफ साबित करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन इन सब के पीछे विधायक वीर सिंह भूरिया की उपेक्षा साब , सेठ और पडियार को भारी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मिशन  एंटी माफिया मुहिम चलाकर माफियाओं में खलबली मचा दी है तो वही मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार वीर सिंह भूरिया माफियाओं का सफाया अपने नाम के अनुरूप वीरता पूर्वक कर रहे हैं। वही उनकी ही पार्टी के लोग उनकी उपेक्षा कर पर्दे के पीछे से माफियाओं का साथ दे रहे हैं। तभी तो छापामार कार्यवाही के 20 दिन बीत जाने व कई सेल्समैन के बयान के साथ  मयनोटरी के  स्टेटमेंट के बाद भी सहकारिता माफिया पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।


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