*झाबुआ~मेघनगर के गणेश प्रजापत एवं संजय श्रीवास पर सहकारिता विभाग का शिकंजा* ~~

*सहकारिता जांच कैंप बयान में हुए कई खुलासे, कई सोसाइटियो ने गणेश, संजय की सदस्यता समाप्त की तो कई ने दिए इस्तीफे*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा ब्युरो....9685952025~~

झाबुआ - सहकारी संस्था मेघनगर में भ्रष्टाचार आर्थिक अनियमितता और सहकारिता के उद्देश्य को ताक पर रखकर  कार्य करना झाबुआ जिले में कोई नई बात नहीं है... क्योंकि मेघनगर में निवासरत बिना पेंदे के लोटे एवं इसकी टोपी उसके सर रखने में माहिर संजय श्रीवास्तव एवं गणेश प्रजापत सहकारिता विभाग के भ्रष्टाचार में लिप्त एबीसीडी का पहला अंक ए ओर अंतिम झेट भी है ..जो भोले भाले अशिक्षित लोगों को सहकारिता विभाग के माया जाल में फंसा कर दीमक की तरह पिछले 20 वर्षो से पोलो कर रहे है। कभी भाजपा की दलाली तो कभी कांग्रेस की दलाली में हाथ काले करने वाले संजय गणेश हमेशा गिरगिट की तरह रंग बदलने में माहिर है। अपना स्वार्थ सिद्ध ना होने पर कभी नगर के समाजसेवी बृजेंद्र चुन्नू शर्मा तो कभी सुरेश चंद पूरणमल जैन  पप्पू भैया को आंखें दिखाने वाले यह दो ठग कभी किसी के नही हुए। इतना ही नहीं पूर्व विधायक कल सिंह भाभर एवं वर्तमान  विधायक वीर सिंह भूरिया जिन्होंने ढाढणिया में उपभोक्ता भंडार की दुकान दिलाने वाले विधायकों की थाली में खाकर छेद करने से संजय ,गणेश बाज नही आए।

*मेघनगर मार्केटिंग सोसायटी की जांच में हुए बड़े खुलासे*

बीते दिनों 30 जनवरी को मेघनगर मार्केटिंग सोसायटी की जांच के लिए डिप्टी कमिश्नर सहकारिता विभाग की टीम द्वारा मेघनगर मार्केटिंग सोसायटी जांच पूरी ना होने पर एक लिखित शिकायत मूलभूत जांच दस्तावेज संजय गणेश के घर ऑफिस एवं कार्यालय पर होने की बात कही गई थी।जिसको लेकर मेघनगर निवासी संजय श्रीवास एवं गणेश प्रजापत के दुकान घर ऑफिस पर छापामार कार्यवाही की गई थी।कारवाही के दौरान बड़ा ही आश्चर्यचकित कर देने वाले रोचक तथ्य सामने आए थे। जिसमें कई सहकारी संस्थाओं के मूल दस्तावेज आधार कार्ड पैन कार्ड रजिस्ट्री चेक बुक किसानो की खाता खसरा नकल के साथ फर्जी रबर की मोहर भी जप्त की गई थी।जिसके बाद गणेश प्रजापत पर आईपीसी की धारा 151 की कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया था। जांच के दौरान सहकारिता विभाग के पदाधिकारियों ने 12 से अधिक सहकारी संस्था के 91 व्यक्तियों के नाम से नोटिस जारी कर 6 फरवरी को मेघनगर सहकारित जांच कैम्प में बयान के लिए तलब किया गया था।

*सहकारिता जांच कैंप में हुए कई खुलासे*

सहकारिता विभाग के डिप्टी कमिश्नर अम्बरीश वैध और उनके विभाग के इंस्पेक्टर सहित पांच सदस्यीय दल द्वारा मेघनगर के आदर्श महिला बहुउद्देशीय सहकारी संस्था मेघा मृतस्य पालन सहकारी संस्था आदर्श प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार दुर्गेश्वरी महिला प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार पद्मावती प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार सहकारी संस्था मर्यादित एवं कई संस्था अन्य सहकारिता संस्था के अशिक्षित भोले भाले लोगों को धोखे में रखकर उक्त नामों की संस्थाओं का संचालन गणेश एवं संजय द्वारा किया जाता था। पद्मावती प्राथमिक उपभोक्ता सहकारी भंडार की संचालिका प्रेमलता भट्ट ने कहा कि मेरे स्वयं मूल कागजात संजय गणेश के कार्यालय रहते थे में इस झंझट में पड़ना नहीं चाहती इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया। वही श्री केवट ने कहा गणेश संजय कब हमारी समिति मछवारे बने हमे पता कभी उन दोनो ने तालाब में उतर कर मछली नही पकड़ी । हमें व हमारी संस्था को अंधेरे में रखकर कब संजय व गणेश जिला सहकारिता बैंक के उच्च पदों पर चले गए हमें पता नहीं हमने कभी भी चुनाव में वोट नहीं किया हमें अंधेरे में रखकर हमारी संस्था के नाम से दोनो फायदा उठाते रहे हम हमारी संस्था की सदस्यता से गणेश को बाहर निकाल रहे हैं वही ईट उद्योग के संस्था के बाबू पाटीदार ने बताया कि मैं अशिक्षित हूं आंखों से दिखता नहीं है आज तक मुझे मेरी संस्था से एक रुपये का मुनाफा नही मिला सब काम संजय और गणेश द्वारा किया जाता था ।पाटीदार ने कहा कि में किसान हु में इन झंझटों से दूर होकर अब मे संस्था के पद से इस्तीफा देना चाहता हूं। ऐसे कई लोगो व सीधी साधी महिलाओं को अपने जाल में फास कर संजय एवं गणेश सहकारिता माफिया बन बैठे थे।

सहकारिता डिप्टी कमिश्नर अंबरीश वेध झाबुआ..
हमने प्रथम दृष्टिया ये पाया कॉपरेटिव सोसयटी का बड़े ही लग तरह का फर्जीवाडा गणेश व संजय पिछले 20 वर्षो से करते रहे है।12 से अधिक सहकारिता सोसाटियो में संजय गणेश की पत्नी बेटे व परिवार के लोग संस्थाओं के मुख्य पदों में शामिल थे अप्रत्यक्ष गणेश संजय संस्थाओं का संचालन करते थे।अब पीड़ित संस्थाओं लोगो को आगे आकर संजय गणेश के विरुद्ध शीकायत करना चाहिए जिस पर हमारे विभाग द्वारा दंडात्मक कायवाही आगे की जा सके।अभी तक जो   खुलासे हुए है उसमें 50 हजार रुपए का अर्थदंड 5 साल के लिए निष्काषित व 3 साल का कारवास के प्रावधान है।अब देखना है कि शाशन प्रशाशन किस तरह से इन सहकारिता माफियाओं पर कर्यवाही करते है।


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