बड़वानी /अंजड में खिंचाएं आस्था के गाड़े : हाथ लगाते ही चल पड़े सैकड़ों क्विंटल वजनी गाड़े~~

अंजड में खिंचाएं आस्था के गाड़े, हाथ लगाते ही चल पड़े सैकड़ों क्विंटल के गाड़े, धुलेंडी पर खिचाएं आस्था के गाड़े, हजारों लोग देखने के लिए पहुंचे, ~~

अंजड़ सहित पास के गांव धनोरा में भी हुआ आयोजन, वर्षों से चली आ रही परंपरा~~

बडवे को सात महिलाओं ने लगाई हल्दी, फिर खिंचे सात गाडे~~

सतीश परिहार अंजड़~~

अंजड-- भारत को यू ही चमत्कारों का देश नहीं कहा जाता। यहां कुछ न कुछ चमत्कार देखने को मिल ही जाते है। ऐसा ही एक चमत्कार होलिका दहन के दूसरे दिन धुलेंडी पर देखने को मिलता है। संत खांडेराव और फखरुद्दीन बाबा कि दोस्ती की आस्था के गाड़े खींचे जाते हैं। सैकड़ों क्विंटल लकड़ी से बने गाड़े और गाड़ों पर खड़े सैकड़ों लोग, फिर भी सिर्फ बड़वा के हाथ लगाते ही गाड़े ऐसे चल पड़ते है, मानों कोई इंजन लगा हो। धुलेंडी पर नगर में बरसों चली आ रही परंपरा अनुसार गाड़े खींचाई व धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। श्रीखांडेरावजी महाराज व उनके मित्र पीर मोईनुद्दीन चिश्ती के मिलन की याद में शुरू हुई इस परंपरा को देखने के लिए हजारों श्रद्घालुओं का हुजुम उमड़ा
बाबा का हाथ लगते दौडऩे लगे गाड़े
अंजड़ में धुलेंडी के दिन मंगलवार को करीब शाम 7 बजे बड़वा संतोष धनगर ने हजारों लोगों की उपस्थिति में 7 गाड़े खींचे। गाड़े खिंचने से पहले बड़वा संतोष धनगर को शाम 6 बजे हजारों श्रद्धालु कंधे पर बैठा कर ढोल के साथ यादव मोहल्ला स्थित संत खांडेरावजी महाराज के थानक पर ले गए। जहां पर सात महिलाओं द्वारा बडवा संतोष धनगर और अगिवान कालु पाटीदार को दुल्हे कि तरह हल्दी लगाई गई। यहां से बाबा खांडेराव का बडवा संतोष धनगर शरीर मैं कथित रूप से आगमन हुआ जिसके बाद हनुमान मोहल्ला स्थित भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। भोंगली नदी पर स्थित मढिय़ार पर चिढ़ी घुमाकर आशीर्वाद लेकर लगभग 6.45 बजे को बस स्टैंड स्थित बड़वानी ठीकरी मार्ग पर खड़े 7 गाड़ों की परिक्रमा कर आखिरी गाड़े को छूते ही गाड़े दौडऩे लगे। एक-दूसरे से आपस में बंधे गाड़ों के ऊपर से दौड़ लगा कर पहले गाड़े की कमान संभाल कर गाड़े खींंचे गए। 7 गाड़ों पर सैकड़ों श्रद्धालु सवार हो गए और संत खांडेरावजी महाराज के जयकारे लगाते रहे। गाड़े गांधी चौक से आगे फोंगला गली तक खींचे गए। जैसे-जैसे शाम ढलती गई वैसे-वैसे लोगों का हुजूम उमडऩे लगा। बस स्टैंड से गांधी चौक तक स्थित मकानों व दुकानों के छज्जे तथा ओटलों पर पांव रखने की जगह नहीं थी। वहीं पास के गांव धनोरा में भी खांडेराव महाराज के गाडे खिंचाई का आयोजन किया गया।


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