बीड~सिंगाजी ताप परियोजना~ खुले में ट्राली से भरकर परिवहन करते राखड़ से परियोजना के  मजदूर परेशान.~~

कार्य कर रही मेकगिल कंपनी पर अधिकारी मेहरबान.~~

नियमों की अनदेखी कर खुलेआम परियोजना से खुली ट्राली में भरकर ले जाया जा रहा है ~~

बीड- रवि सलुजा ~~

सिंगाजी ताप विधुत परियोजना में दुसरे चरण की दोनो इकाईयो से  बिजली उत्पादन फिलहाल बंद है लेकिन योजना का सबसे महत्वपूर्ण भाग ऐश हैंडलिंग सिस्टम जिसमें बिजली उत्पादन के दौरान निकली हुई राख को साईलो तक पहुंचाने का कार्य  फेस वन के काम कर रही  मेकगिल नुमिटेक प्रायवेट लिमिटेड़ कंपनी को दिया गया है कंपनी के द्वारा सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार लापरवाही बरती ग ई है फिर भी सिंगाजी परियोजना के जवाबदार  अधिकारियों के द्वारा कंपनी पर कोई कारवाई नही की गई और ना कराए जा रहे कार्य में कोई सुधार करने के लिए बोला गया . जिसका मुख्य कारण कंपनी पर कार्रवाई ना करना  जिसके कारण कंपनी के हौसले बढ़ते जा रहे हैं कंपनी के द्वारा  हापरो के नीचे से निकलने वाली राखड को ट्रैक्टर ट्राली के द्वारा राखड बाध पंहुचाने का  काम होता है जिसको ढककर व पानी का छिड़काव करके  ट्रैक्टर ट्राली द्वारा भेजा जाता है लेकिन  कंपनी सुधरने का नाम नहीं ले रही है और कार्यरत कंपनी के द्रारा  बैखोफ बैरोक बैटोक बगैर  किसी के भय के ट्रैक्टर ट्राली में खुले में राख को लेकर जाया जा रहा है उड़ती हुई राखड़ से परियोजना में कार्य कर रहे मजदुरो पर संकट आ गया हो मजदुरो की  आंखों में उडती राखड़ परेशानी का सबब बन गई वही दुसरी और परियोजना राहगिरो को भी गुजरने मे परेशानी होती नजर आ रही है  उडती राखड़ से मानव जीवन पर क ई प्रकार की बिमारिया भी पैदा हो सकती है जबकि इस समय कोरोना जैसी महामारी का खतरा पूरे देश में मंडरा रहा है उसके बाद भी मेकगिल कंपनी सुधारने का नाम नहीं ले रही है एक तरफ परियोजना प्रमुख बीके कैलासिया साफ-सफाई को लेकर बहुत सजग दिखाई देते है परन्तु ऐश हैंड लिंग सिस्टम का कार्य कर रही मेकगिल कंपनी सुधरने का नाम नही ले रही है
जब इस संबंध में परियोजना के जवाबदार चीफ इंजीनियर वीके कैलासिया से खुले में उड़ रही राख ड़ और कंपनी की लापरवाही के संबंध में जानकारी चाही गई तो उन्होंने 2 शब्दों में ही अपनी बात को खत्म करते हुए कह दिया कि कार्रवाई करेंगे अभी मैं मीटिंग में हूं इतनी गंभीर समस्या और इतनी बड़ी कंपनी की लापरवाही पर लगाम ना लगाना अधिकारियों पर सांठ गांठ का अंदेशा लगता है राखड़ जैसी गंभीर समस्या कहीं एक दिन विकराल रूप भी ले सकती है परंतु शायद ऐसा ही परियोजना के जवाबदार कुछ चाहते होंगे.


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