बीड़~~कोरोना वायरस की जांच करने लाए स्क्रीनिंग मशीन निकली खराब .~~

सिंगाजी परियोजना के जवाबदार नहीं दे रहे ध्यान मौजूदा उपचार केंद्र पर भी नहीं रहते पदस्थ डॉक्टर.~~

वार्ड बॉय डेसर के भरोसे सालो से चल रहा सिंगाजी परियोजना का उपचार केंद्र.~~

रवि सलूजा बीड़ ~

मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी विद्युत परियोजना जिसे संत सिंगाजी पांवर परियोजना के नाम से जाना जाता है पूरे देश में कोरोनावायरस को लेकर महामारी फैली हुई है हर व्यक्ति और उसका परिवार इस कोरोना जैसे वायरस बीमारी का नाम सुनते सही विचलित हो जाता है इतनी अहम बीमारी को सिंगाजी परियोजना के जवाबदार अधिकारी गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं बुधवार के अंक में नईदुनिया समाचार पत्र में कोरोना वायरस को लेकर खबर प्रकाशित की गई थी जिसे सिंगाजी परियोजना के अधिकारियों ने संज्ञान में करते हुए गुरुवार को सिंगाजी परियोजना में स्क्रीनिंग मशीन लाकर सिंगाजी परियोजना के मुख्य द्वार से गुजरने वाले मजदूर अधिकारी कर्मचारियों की जांच की जा रही थी परंतु यह जांच कोई डॉक्टर या चिकित्सक के द्वारा नहीं की जा रही थी यह परियोजना में कार्यरत सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे गार्डो को हाथ में देकर ही उसकी स्क्रीन कराई जा रही थी परंतु सूत्रों की जानकारी से पता लगाया गया कि चंद घंटों के बाद ही यह स्क्रीनिंग मशीन खराब पाई गई स्क्रीन मशीन से जांच करना चिकित्सक का कार्य होता है परंतु जवाबदार अपनी जवाबदारी भी सही ढंग से नहीं निभा पाए और सुरक्षा सशस्त्र बल के सैनिकों को स्क्रीन मशीन सौप कर अपने कार्य को कर्तव्य पूर्ण ना करते हुए गुजर गए.

सिंगाजी परियोजना में स्थित उपचार केंद्र ड्रेसर और वार्ड बॉय के हवाले.

सिंगाजी परियोजना में उपचार केंद्र तो खोला गया है परंतु व उपचार केंद्र सिर्फ एक नाम मात्र का ही उपचार केंद्र है क्योंकि इस उपचार केंद्र में पदस्थ डॉक्टर अशोक वाडरे मौजूद नहीं होते हैं सिंगाजी परियोजना के उपचार केंद्र डेसर व वार्ड वाय के द्रारा  चलाया जा रहा है वाड वाय की संख्या चार और डेसर की संख्या तीन बताई जा रही है परन्तु सिंगाजी परियोजना मे एक डेसर एक वाड वाय मौजुद रहता है बाकी कर्मचारी शिवरिया टाउनशिप मे मौजूदा बताए जा रहे है डॉक्टर संत सिंगाजी परियोजना  के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बनी शिवरिया टाउनशिप में निवास करते हैं पदस्थ  डॉक्टर से पूछने पर उन्होंने बताया कि मैं शिफ्ट के अनुसार सिंगाजी परियोजना उपचार केंद्र पहुंचता हूं वह बाकी समय शिवरिया टाउनशिप के परिसर के अंदर हेल्थ सेंटर मे मौजूद रह कर  जहां में अपनी सेवाएं देता हूं जब सिंगाजी परियोजना के जवाबदार चिकित्सा जैसी सुविधा को ही सही रूप नहीं दिला पा रहे जहां सिंगाजी परियोजना में कई कंपनियां कार्यरत है सैकड़ों मजदूर उस सभी कंपनी में कार्य करते हैं अक्सर घटनाएं भी घटित होती है प्राथमिक उपचार सही दिशा में ना मिलने के कारण परियोजना से सात किलोमीटर दुर मुंदी-उपचार के लिए ले जाया  जाता है गंभीर समस्या होने पर एंबुलेस सुविधा से 28 किलोमीटर जिला मुख्यालय  खंडवा रेफर कर दिया जाता है शासन की पगार लेने वाले यह चिकित्सक अपने कार्य के प्रति सजग भी नहीं दिखाई देते हैं चिकित्सा जैसी सुविधा जो मानव जीवन के लिए बहुत ही जरूरी है वह भी सुविधा ना मिलने से सिंगाजी परियोजना के कर्मचारी तक परेशान हैं नाम ना छापने की शर्त पर परियोजना के अधिकारी ने सारी बातों को सही ठहराते हुए बताया कि सिंगाजी परिजनों में पदस्थ डॉक्टर एक भी दिन अपनी सेवाएं देने नहीं आते हैं जहां तक कि उस उपचार केंद्र में दवाइयां भी मौजूद नहीं है बने उपचार केन्द  वार्ड बाय और डेसर से चल रहा है जहां  सर्दी खासी जुकाम हाथ पैर दर्द जैसी  भी दवाई मौजुद नहीं है  डॉक्टर हमेशा निवास स्थल शिवरिया टाउनशिप में ही रहता है हेल्थ सेंटर पंहुचने वाला मरीज जब डां को मोबाइल पर सुचना देता है जब  डां पहुंचकर उसका प्राथमिक उपचार कर देते हैं और पहुंचे उपचार केंद्र पर मरीज को समझाइए दी जाती है कि आप स्वास्थ्य केंद्र खंडवा जिला अस्पताल जाकर आपका बाकी उपचार करा ले स्वास्थ्य सुविधा पर करोडो रुपए शासन की ओर से खर्च किए जाते हैं  फिर भी स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से क्यों खिलवाड़ कर रहे है जवाबदार .

इनका कहना :- हमारे द्वारा आज कोरोनावायरस को देखते  हुए सिंगाजी परियोजना के मुख्य द्वार पर स्क्रीनिंग मशीन से जांच कुछ देर टीम के द्रारा गई थी उसके बाद सुरक्षा बल जवानो के द्वारा स्क्रीन की गई उनको बराबर मशीन ऑपरेट मशीन  ऑपरेट करते नहीं आया इसलिए वह मशीन बंद हो गई थी हमारी मशीन मे कोई खराबी नही  कल पुन:  स्क्रीनिंग की जाएगी और हमारे जबलपुर हेड ऑफिस से भी  कांफ्रेंस में निर्देश दिए कि कोरोना वायरस को लेते हुए सजग रहें वह चिकित्सा सुविधा पर ध्यान दें.

परियोजना पदस्थ डॉ अशोक वाडंरे

इनका कहना :- हां परियोजना के मुख्य द्वार पर चिकित्सा विभाग की टीम द्वारा मशीन से कोरोना की जांच की गई थी परंतु कुछ समय बाद वह मशीन बंद हो गई है जो हमने उन्हें लौटा दी है

के एस कुशराम मुख्य सुरक्षा अधिकारी सिंगाजी परियोजना


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