*इस वर्ष रविवार 26 अप्रैल को भगवान परशुराम जन्मोत्सव~~

“परशुराम जयंती पर्व” के साथ अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाएगा*~~

*साथ जाने राशि अनुसार पूजन* ( ज्योतिषाचार्य, डाँ. अशोक शास्त्री )

धार , ( डाँ. अशोक शास्त्री ) यह पर्व हर वर्ष  वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। भगवान परशुराम, भगवान श्री विष्णु के छटवें अवतार माने जाते हैं। मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने एक चर्चा में बताया है कि शास्त्रों और हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम के जन्म से संबंधित दो प्रसंग मिलते हैं। हरिवंश पुराण के अनुसार, कार्तवीर्य अर्जुन नाम का एक राजा था जो महिष्मती नागरी पर शासन करता था। राजा कार्तवीर्य और उसके कई अन्य सहयोगी क्षत्रिय राजा मित्र विनाशकारी कार्यों में लिप्त थे और वें बिना कारण ही निर्बलों पर अत्याचार करते थे। उनके अनाचार और अत्याचार जिससे अन्य जीवों के लिए जीवन जीना कठिन हो गया। इस सबसे बहुत दुखी होकर माता पृथ्वी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी और जीवित प्राणियों को क्षत्रियों की क्रूरता से रक्षा के लिए सहायता मांगी। माता पृथ्वी की मदद करने के लिए, भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में देवी रेणुका और ऋषि जमदग्नि के पुत्र के रूप में अवतार लिया। भगवान परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन तथा सभी अनाचारी क्षत्रिय राजाओं अपने फरसे से वध कर माता पृथ्वी को उनकी हिंसा और क्रूरता से मुक्त कराया।
ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि भगवान परशुराम की पूजा
अन्य हिंदू पर्व त्यौहारों के समान ही परशुराम जयंती के दिन सूर्योदय से पहले पवित्र तीर्थों में या फिर घर में गंगाजल मिले जल से स्नान करना अति शुभ माना जाता है। स्नान के बाद पूजा में धुले हुए श्वेत वस्त्र ही पहनना चाहिए। पूजा में भगवान विष्णु एवं पशुराम जी को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल और मिठाई चढ़ाकर पूजन करना चाहिए। कहा जाता है कि परशुराम जयंती के दिन व्रत रखने से श्रेष्ठ और कुल उद्धारक पुत्र की प्राप्ति होती है। इस दिन के उपवास में केवल दूध का ही सेवन करना चाहिए।
डाँ. अशोक शास्त्री के मुताबिक पर्व पूजा शुभ मुहूर्त
- परशुराम जयंती पर्व रविवार 26 अप्रैल 2020
- तृतीया तिथि का आरंभ शनिवार 25 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 51 पर हो जाएगा
- तृतीया तिथि का समापन रविवार को दोपहर 1 बजकर 22 पर होगा।
- अतः अक्षय तृतीया पर्व पूजन रविवार 26 अप्रैल को सूर्यादय से लेकर दोपहर 1 बजे तक किया जा सकता हैं ।
ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक नारायण शास्त्री ने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया यह दिन काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। ऐसा माना जाता है, इस दिन दान करने से कई गुना अधिक फल मिलता है। आज, हम आपको बताने जा रहे हैं, इस दिन राशि अनुसार कैसे करें पूजा पाठ

मेष :~ मेष राशि के जातकों को इस दिन भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। अगर आपके घर में शिवलिंग है तो, शिवलिंग का गंगा जल और दूध से अभिषेक करें। 
अक्षय तृतीया के पावन दिन इस मंत्र का जप करें ऊँ नम: शिवाय

वृषभ :~ वृषभ राशि के जातकों को इस दिन भगवान विष्णु के स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए। 
अक्षय तृतीया के पावन दिन इस मंत्र का जप करें ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय 

मिथुन :~ मिथुन राशि के जातकों को इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए। अक्षय तृतीया के पावन दिन श्री कृष्ण के मंत्रों  का जप करना चाहिए।

कर्क :~ कर्क राशि के जातकों को इस दिन भगवान श्री राम की पूजा करनी चाहिए। अक्षय तृतीया के पावन दिन राम नाम का संकीर्तन करना चाहिए।

सिंह :~ सिंह राशि के जातकों को इस दिन भगवान श्री राम की पूजा करनी चाहिए। अक्षय तृतीया के पावन दिन श्रीरामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

कन्या :~ कन्या राशि जातकों को इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए ।

तुला :~ तुला राशि के जातकों को इस दिन श्री कृष्ण के बाल स्वरूप का पूजन करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर श्री गोपाल सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए ।

वृश्चिक :~ वृश्चिक राशि के जातकों को इस दिन भगवान शिव की आराधना करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर शिव चालिसा का पाठ करना चाहिए ।

धन :~ धन राशि के जातकों को इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए ।

मकर :~ मकर राशि के जातकों को इस दिन माँ दुर्गा की पूजा करनी चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए ।

कुंभ :~ कुंभ राशि के जातकों को इस दिन भगवान राम का पूजन करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए ।

मीन :~ मीन राशि के जातकों को इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए । अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

               *शुभम्  -  भवतु*

 


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