झाबुआ~सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हो रहे कथित भ्रष्टाचार पर लगाम कसना जरूरी~~

संजय जैन झाबुआ~~

झाबुआ। कोरोना वायरस के चलते राज्य शासन के निर्देश पर जिले भर की उचित मूल्य की दूकानो पर गरीबो एवं आदिवासी ग्रामीणो को पॉच किलो गेंहु एवं पॉच किलो चावल निःशुल्क दिया जा रहा है। प्रशासन द्वारा दिये जा रहे इस सुविधा का ऐसे
लोग भी फायदा उठाने मे पिछे नही रह रहे है जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होकर गरीब वर्ग को मिलने वाला लाभ ये लोग उठाने मे पीछे नही रह रहे है। सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार गा्रमीण अंचलो में ऐसे आदिवासी परिवार जिनके खेतो में बंपर गेहु की फसल पैदा हुई है। तथा अच्छी क्वालीटी का गेहु भी उनके घरो में रखा होने के बावजूद भी ये लोग उचित मूल्य की दूकाने से मिलने वाला गेहु एवं चावल निःशुल्क उठा रहे है। ओर इसे बाजारो में बेचकर पैसा कमाने का काम कर रहे है। जानकारी तो यह भी मिली है कि इन
लोगो का कहना है कि जब उनके खेतो में अच्छा गेहु पैदा हुआ है तो फिर सरकार द्वारा दिया जा रहा घटिया गेहु क्यो खाये। ओर ऐसे लोग धडल्ले से शासन से योजनाओ का लाभ ले रहे है। जबकि कई गरीब परिवार ऐसे है जिनके यहा दो समय काभोजन तक नही नसिब हो पा रहा है। ऐसे में सरकार की सुविधा का ये लोग धडल्ले
से लाभ उठा रहे है। तथा इसका फायदा निश्चित तौर पर दूकानो के सैल्समेन भी उठाने मे पीछे नही रह रहे है। तथा गरीबो के नाम से दिये जाने वाले इस खाद्यान्न को वे भी भ्रष्टाचार करते हुये पिछले दरवाजे से बेचकर मोटी रकम बनाने में पिछे नही रह रहे है। गौरतलब है कि जिन परिवारो के पास पात्रता पर्ची या
राशन कार्ड या अन्य कोई पत्र नही है तो उनको भी राशन मिलना चाहिये। जिसकी व्यवस्था प्रशासन द्वारा विशेष आंवटन के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियो को दी गई है लेकिन कही भी सुनने में यह नही आता है कि ऐसे लोगो को राशन का
वितरण हो रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिये की सिर्फ पात्र लोगो को ही सरकार की योजना का लाभ मिले इसके लिये वे अपने स्तर से सर्वे आदि करवाकर इसकी पुष्टि करे तथा
उचित मूल्य की दूकानो पर प्रतिदिन का स्टॉक का सार्वजनिक प्रदर्शन हो तथा सैल्समेनो की भूमिका को लेकर भी यदि जाच करवाये तो कई तथ्य सामने आ सकते हैं ताकि गरीबो के नाम से आने वाली सामग्री की बंदरबाट ना हो सके। ओर वास्तविक गरीबो को इसका लाभ मिल सके।


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