बाकानेर~ तिवारी परिवार बाकानेर में मुस्लिम समुदाय के रोज आफ तैयार रोजा खुलवाने का काम 35 सालों से कर रहा ~~

सैयद रिजवान अली बाकानेर~~

बाकानेर ~आश्चर्य किंतु सत्य या यूक  है मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना यह कहावत को चरितार्थ किया है आदित्य अनुपम धर्म प्रकाश तिवारी परिवार ने जो बाकानेर में मुस्लिम समुदाय के रोज आफ तैयार रोजा खुलवाने का काम 35 सालों से कर रहा है 35 सालों में रमजान महीना आते ही तिवारी परिवार पहले से फिक्र मन हो जाता है वर्ष उन्नीस सौ 85 86 मैं बाकानेर स्थित इंदिरा कॉलोनी के पास शासकीय कर्मचारी शिक्षक व्याख्याता के रूप में झांसी बिना के धर्म प्रकाश तिवारी रहने आए जोकि उर्दू के अच्छे जानकार थे उन्हें पास के रहने वाले शेख मुस्ताक काजी सैयद हमीदुद्दीन शेख अब्दुल समद और भी मुस्लिम परिवारों से इतना स्नेह और लगाओ हो गया कि वह मन में ठान लिया इतने अच्छे तहजीब के लोग और इतने अच्छे पड़ोसी और कहां मिलेंगे उन्होंने बाकानेर बसने का ही मन बना लिया तभी से तिवारी परिवार रमजान पवित्र माह में इंदिरा कॉलोनी स्थित सभी मुस्लिम परिवारों के रोजा खुलवाने का काम कर रहा है हालांकि कुछ दिन पहले धर्म प्रकाश तिवारी इस दुनिया को अलविदा कह दिया उसके बाद उनके पुत्र अनुपम तिवारी और पोता आदित्य तिवारी यह काम बखूबी निभा रहे हैं हालांकि रमजान के अलावा भी रोजमर्रा में भी सुख दुख में आपस में इस नैन का आज भी बना हुआ है क्या दिवाली और क्या ईद मिलकर मनाते हैं जात पात की गंदी राजनीति इन्हें आज भी अलग नहीं कर पाई और एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं यह बात मुस्लिम परिवार और तिवारी परिवार के दूरदराज के सारे रिश्तेदार भी भली-भांति जानते हैं जब हमारे संवाददाता ने दौरा कर मुस्लिम परिवारों से और तिवारी परिवार से चर्चा की तो उन्होंने कहा त्यौहार किसी भी धर्म का हो उसका स्वाद इंसानियत होना चाहिए


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