*झाबुआ~कोरोना का भी डर नही इन व्यापारियों को*~~

*चोरी छिपे ग्राहकों को बेचे जा रहे कपड़े*~~

*सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न नियमो की परवाह , न सुरक्षा का ख्याल*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा की रिपोर्ट...9039452025~~

झाबुआ - कोरोना वैश्विक महामारी के चलते लगातार लॉक डाउन पूरे देश में लागू है। जिला कलेक्टर प्रबल सिपाहा के नेतृत्व में झाबुआ जिला आज तक ग्रीन जोन में है। मगर कुछ ज्यादा लालची व्यापारी झाबुआ जिले को ग्रीन ज़ोन में रहने नही देगे ,सरकार द्वारा ग्रीन जोन के लिए ग्रामीण इलाकों में छूट प्रदान की गई है मगर मेघनगर नगर में कपड़ा व्यापारी से लेकर हार्डवेयर मटेरियल व्यापरी द्वारा लगातार  नियमो का उल्लंघन किया जा रहा है वही अधिकांश व्यापारी लापरवाही बरतते हुए बन्द दरवाज़ों के पट खोलकर ग्राहको को दुकानों में प्रवेश दे रहे। वही जिन निर्माण कार्य हार्डवेयर की व्यवसायिक दुकानों को छूट दी गई है उन्होंने ने तो सारे नियम कायदों को ताक पर रख कर व्यवसाय करने में लगे हैं  सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करते हुए सामान देकर मलाई काटने पर उतारू है। ना ही ग्रहको के मुह पर मास्क , ओर नहीं हाथो में सुरक्षा दस्ताने सारे नियमो को ताक में रखकर बड़ी लापरवाही बरती जा रही है जबकि स्थानीय प्रशाशन द्वारा माइक द्वारा नगर में मुनादी करवाकर दंडात्मक कार्यवाही  की बात की है मगर प्रशाशन ही इस ओर आँखे बंद कर बैठा है। , लगता है इन व्यापारियों को कोरोना का भी तनिक भय नही है यही वजह है कि यह अपनी दुकानो में ग्राहकों को कपड़ा बेचकर शायद लॉक डाउन में हुवे नुकसान की भरपाई करने में लगे है , मगर शायद यह भूल रहे है कि कोरोना नामक वायरस न जात देखता है न पात ओर हो गया तो कैसे फैलता है यह दिल्ली वालों से और इंदौर वालो से पूछो आज उन पर क्या बीत रही है। इस पूरे मामले को लेकर संपूर्ण लोक डाउन रविवार के दिन भी नगर का पूरा बाजार लगभग लगभग खुला रहा जिसको लेकर हमने जिम्मेदारों से बात करना चाहिए नगर परिषद मुख्य कार्यपालन अधिकारी नायब तहसीलदार ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया वही दूरभाष पर जब हमने अनुवीभागिय अधिकारी से इस मामले में चर्चा करना चाही तो उन्होंने मोबाइल फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। समझा इसके लिए मुनादी करके जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेते हैं जबकि मुनादी कराने में लगातार शासन प्रशासन का पैसा खर्च हो रहा है लेकिन इसके विपरीत जिम्मेदार कार्रवाई करने से दूर भाग रहे हैं। , आगें व्यापारियों की मर्जी .....? की वह कोरोना को हराना चाहते या घर पर लाना चाहते हैं ..........?


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