*झाबुआ~जयस ने भूख प्यास से तड़प रहे पशु पक्षियों को लेकर वन अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों को घेरा*~~

*इस भीषण गर्मी में जंगल के जानवरों के लिए दाना पानी  के साथ उनकी  सुरक्षा तक नहीं हैं के लागये आरोप*~~

*वन के पशु पक्षियों के लिए दान पानी की उच्चीत व्यवस्था करे*~~

झाबुआ से दशरथ सिंह कट्ठा ब्युरो...9039452025~~

झाबुआ - जय आदिवासी युवा शक्ति संघटन (जयस ) ने  वन अनुसंधान केंद्र  मेघनगर की  नर्सरी पहुँच कर  वन में रहने वाले पशु पक्षियों  और  भिन्न भिन्न प्रकार के  जानवरों के लिए दाना पानी  के साथ  उनकी  सुरक्षा  तक नहीं करने के गंभीर आरोप वन अनुसंधान केंद्र के  अधिकारियों पर लगाए है ! जयस मीडिया प्रभारी दिनेश वसुनिया ने  बताया की कोरोना 19 में जहां स्वतंत्र रहने वाली मानव जाति कोरोना वायरस महामारी के चलते लॉक डाउन का पालन करने के लिए अपने अपने घरों में कैद है ! तो वही जंगलों में आजाद घूमने वाले पशु पक्षी इस महामारी से कोसों दूर है ! वन के पशु पक्षी इस भयंकर भीषण गर्मी में भूखे प्यास तड़प रहे हैं ! जिस को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति जयस ने मेघनगर से 1 किलो मीटर दूरी पर स्थित वन अनुसंधान केंद्र पर भूख प्यास से तड़प रहे पशु पक्षियों जैसे नीलगाय, बंदर, खरगोश,जंगली सुअर  व राष्ट्रीय पक्षी मोर सहित कई प्रकार के छोटे-मोटे जानवरों  की सुरक्षा के साथ साथ खाने - पीने को लेकर आवाज उठाई ! जयस का कहना है कि एक और जहां पूरा विश्व कोरोना वायरस महामारी की मार झेल रहा है ! तो वहीं पर्यावरण के प्रति वन अनुसंधान केंद्र मेघनगर के अधिकारी आंख बंद कर बैठे हैं ! उनका यह उदासीन रवैया जंगल में रहने वाले पशु पक्षियों को काफी नुकसान पहुंचा सकता है ! ऐसे लापरवाह अधिकारियों  की वजह से आज इस वन अनुसंधान केंद्र मेघनगर में पशु पक्षियों  के साथ-साथ यहां के पर्यावरण का  हाल भी हमने देखा हैं ! जबकि  ऐसे अधिकारियों को याद होना चाहिए की  पर्यावरण व प्रकृति  की रक्षा करना उनका परम कर्तव्य है l वन अनुसंधान के अधिकारियों की लापरवाही के कारण इन पशु पक्षियों का जीना दुस्वार हो रहा है ! वन अनुसंधान  रोपनी नर्सरी के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किये जा रहे उसके बाद भी स्थिति जस की तह हैं ! यहां पर  पशु पक्षियों के लिए ना तो भोजन है और ना ही पानी की प्रयाप्त व्यवस्था है ! जब कि वन अनुसंधान  केंद्र को  3 सेक्टरों में बांट दे तो इन्हीं  तीनों ही सेक्टरों पर  दाना पानी की व्यवस्था हो सकती है ! क्योंकि इन तीनों जगह पर पानी एकत्रित करने की टंकियां बनी हुई है ! इस मई माह की भीषण गर्मी व आने वाले नौ तपा  को ध्यान में रखते हुए  वन  अनुसंधान केंद्र के कर्मचारियों  को जगह-जगह इन  पशु पक्षियों के लिए पानी के साथ साथ खाने की भी व्यवस्था करनी चाहिए ! वन विभाग इस और बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है ! वही  मेघनगर के कुछ सेवाभावी लोगों द्वारा सुबह शाम इस नर्सरी में जाकर  पशु पक्षियों को दाना  पानी डालते हुए हम ने देखा हैं !पर वह भी यहां पर रह रहे  पशु पक्षियों के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है ! जब कि यहा की पूर्ण जिम्मेदारी फॉरेस्ट वन विभाग की बनती है ! वही बात करे मेघनगर औद्योगिक क्षेत्र में ट्रीटमेंट प्लांट की तो यहाँ पर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य धीमी गति से चलरहा हैं! जयश ने काम में तेजी लाने की भी मांग की है! अभी तक इन केमिकल युक्त कंपनियों से निकले वाला लाल जहरीला दूषित पानी से नर्सरी के पर्यावरण के साथ-साथ पशु पक्षियों को खासा नुकसान हो रहा हैं ! केमिकल युक्त लाल पानी ! ये केमिकल युक्त पानी नर्सरी की जमीन को बंजर करते हुए वन के नाले से बहता हुआ सीधा राखड़िया के जंगल में भी पहुँच रहा हैं ! और वहाँ की जमीन ओर पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहा हैं ! और पशु पक्षियों और अन्य जीवजंतुओं को भी काफी नुकसान पहुंचा रहा है ! इन सभी को ध्यान में रखते हुए जयस ने प्रशासन व वन विभाग से मांग की है ! कि कैमिकल दूषित पानी को  रोकने की जल्दी जल्दी कोई व्यापक व्यवस्था करे ! और वन में जो पशु पक्षी व अन्य जीवजंतु हैं जो भूख प्यासे से तड़प रहे हैं उनके लिए दाना पानी की व्यापक इंतजाम करे ! नहीं तो जयस इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने  मैं कोई कसर नहीं छोड़ेगा ! इस अवसर पर मेघनगर जयस टीम के  अध्यक्ष माधव सिंह डामोर, राकेश मुनिया ,पप्पू मुनिया ,चेतन डामोर, बाबा शहीत आदि लोग उपस्थित थे l


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