बाकानेर~सरकारी स्कूलों में उनका स्वागत है~~

सैयद रिजवान अली बाकानेर ~~

बाकानेर ! लॉकडाउन के कारण  अधिकांश उच्च , निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की आर्थिक व्यवस्था चरमरा रही है और आगे भी सुधार की गुंजाइश कम नजर आ रही है । पालक निजी स्कूलों की फीस भरने में  असमर्थ हैं । वे फीस माफी चाहते हैं । स्कूल वाले नहीं मान रहे हैं । सरकार ने निजी स्कूल वालों से कहा भी है कि वे फीस न बढ़ाएं तथा एकमुश्त शुल्क भरने का दबाव न बनाएं । जरूरी नहीं कि सभी स्कूल वाले सरकार का कहा मानेंगे । उनकी अलग मजबूरियां हैं । हो सकता है कि वे मान भी  ले या नहीं भी माने । मेरा ऐसे पालकों से अनुरोध है वे सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाएं । 8 वीं कक्षा तक कोई प्रवेश या मासिक फीस नहीं है । उत्तम शिक्षण है ।  योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं ।  सीबीएससी बेस्ट पाठ्यक्रम , अच्छे भवन , पर्याप्त फर्नीचर , निशुल्क यूनिफार्म , पुस्तकें , साईकिल, छात्रवृति,मिड डे मील , आपके घर के निकट ही हैं इसलिए कोई वाहन शुल्क नहीं लगेगा ।
    आपके पास ज्यादा पैसा है तो सरकारी स्कूल में डोनेशन दे दें तो और अधिक सुधार आ जायेगा । एक बार हम पर , हमारे स्कूलों पर विश्वास करके तो देखें । पुरानी पीढ़ी भी इन सरकारी स्कूलों में पढ़ी है । क्या वह किसी से कम है । 9 वीं कक्षा के बाद मामूली फीस है ।  पालकगण बेवजह सरकार पर दवाब बना रहे हैं कि निजी स्कूलों पर फीस कम करने को कहे । सरकार ने तो उनके सामने सर्वसुविधायुक्त सरकारी स्कूलों में प्रवेश का विकल्प दे रखा है । यदि पालक निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है तो हमारे शासकीय स्कूलों में उनका स्वागत है ।  हम बड़े -बड़े  विज्ञापन अखबार में नहीं देते । अपनी प्रशंसा स्वयं नही करते । सरकारी स्कूलों का नेटवर्क देश के छोटे से छोटे गांव में है । पूरी पारदर्शिता है इसलिए हमारे स्कूलों की आलोचना कोई भी कर सकता है । अखबार के पन्नों में केवल हमारी बुराई ही छपती है परआप केवल एक बार सेवा का अवसर तो दें आप हमारी अच्छाइयों से परिचित हो जाएंगे । आज भी देश के करोड़ों बच्चे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी हैं , जो निजी स्कूलों से अधिक ही हैं! उक्त जानकारी प्राचार्य शालिग्राम केवट एवं शिक्षक मोहम्मद यूनुस कुरैशी ने दी ।


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