झाबुआ~स्वास्थ्य विभाग में चल रही धांधली -पूर्व सिविल सर्जन के रिक्त आवास पर स्टीवर्ड ने किया कब्जा~~

झाबुआ। संजय जैन~~

जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनो आवास आंवटन मे हो रही धांधली को लेकर चर्चा में बना हुआ है। शासकीय आवास नियम संबंधी नियमो को बलाय तांक पर रखकर मनमाने तौर पर आवासगृहो का आंवटन किया जा रहा है । रसुखदार कर्मचारी मनमाने तौर पर अधिकारियो के लिये बनाये गये आवासो में अधिकारी के सेवा निवृत्त होते ही बलात रूप से उस आवास गृह में कब्जा करने मे कोई कोताही नही बरत रहे है। जिला स्तर पर बैठे सक्षम अधिकारी इसे पुरी तरह नजर अंदाज कर रहे है।

-प्रभारी स्टीवर्ड  द्वारा सिविल सर्जन के सरकारी आवास पर कब्जा
हाल ही में एक ऐसा मामला जिला चिकित्सालय परिसर में सामने आया है जिसमें पूर्व सिविल सर्जन डॉ आरएस प्रभाकर जो शासकीय सेवा से सेवा निवृत्त हुये है। उनके जिला चिकित्सालय परिसर स्थित आवास पर जिला अस्पताल के प्रभारी स्टीवर्ड जो निम्न श्रेणी लिपिक पद का वेतनमान प्राप्त कर रहे है। जिनका जिला मुख्यालय पर ही स्वयं का आलिशान निजी बंगला होने के बाद भी उनके द्वारा सिविल सर्जन के उक्त सरकारी आवास पर कब्जा करके ,उसमें निवास करना प्रारंभ कर दिया है। भवन पर अपनी नेम प्लेट तक लगा दी है।

-रहे सीएमएचओ कार्यालय अपना दबदबा बनाकर स्वयं भी भ्रष्टाचार में लिप्त
स्वास्थ्य विभाग में बहुचर्चित निम्न श्रेणी लिपिक के पद के समकक्ष काम करने वाले प्रेम कुमार डेनियल जो हमेशा ही विवादो के घेरे में रहे है। कभी सीएमएचओ कार्यालय अपना दबदबा बनाकर स्वयं भी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे है। झोलाछाप डॉक्टरो से संपर्क स्थापित कर तथा उन्हे येन केन प्रकारेण बचाने में अपनी भूमिका निभाने तथा अधिकारियो को चंदीचारा दिलाने में अ्रग्रणी रहे है। पात्रता नही होते हुये भी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रो के लेखापाल का चार्ज लेकर भ्रष्टाचार करने में अग्रणी है। वही इनके कई कारनामें विभाग में चर्चा का विषय बने हुये है। ऐसे प्रेम कुमार डेनियल ने सिविल सर्जन प्रभाकर के रिटायर्ड होते ही उनसे उक्त शासकीय आवास की चाबी इस आशय से प्राप्त की थी,वह विभाग के अधिकारी को सौप देंगे। किन्तु ऐसा नही करते हुये स्वयं ने ही उक्त आवास पर जबरन कब्जा कर लिया ओर इसमें निवास करना भी प्रारंभ कर दिया है।

-किया है किस आधार पर प्रथम श्रेणी अधिकारियो के लिये बनाये गये शासकीय आवास पर कब्जा......?
शासकीय आवास नियम के बिन्दु 5 के उपबिन्दु 2 के अनुरूप इनका निजी आलिशान बंगला होने के बाद भी किस आधार पर इनके द्वारा प्रथम श्रेणी अधिकारियो के लिये बनाये गये शासकीय आवास पर कब्जा किया है.......? यह जांच का विषय है। वैसे भी किसी शासकीय आवास पर जबरन कब्जा करना शासकीय सेवक आचरण सहिता के तहत दण्डनिय अपराध होने क बावजूद भी ना तो मुख्य चिकित्सा एव ंस्वास्थ्य अधिकारी एव ना ही जिला अस्पताल प्रबंधन ने इस ओर प्रभावी कार्यवाही की। बरसो से अंगद के पांव की तरह झाबुआ में जमे हुये इस भ्रष्ट कर्मचारी के द्वारा राजनितिक रसुक का हवाला देकर लाभ उठाना आम बात हो गई है। शिवराज सरकार आने के पूर्व जो कर्मचारी खुले आम कांग्रेस सरकार के गुणगान करने में पिछे नही रहता था,वही अब पाला बदलकर कर्मचारियो पर रोब झाडने मे तथा उन्हे भयभीत करने मे कोई कसर बाकी नही रख रहा है।

-निश्चित ही कई तथ्य सामने आ सकते जांच करवाये तो
स्वास्थ्य विभाग ने आवास आवंटनो को लेकर अनियमितता का उदाहरण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मेघनगर में भी देखने को मिला है। जहां खंड विस्तार प्रशिक्षक जिन्हे विभाग के नार्म के अनुसार एच-टाईप क्वार्टर की पूरे मप्र में पात्रता है। वहा इसे भी दरकिनार करके हाल ही मे पदस्थ हुई एक स्वास्थ्य अभ्यागिता को अलाट करवाने में भी इनका हाथ होने की चर्चा बनी हुई है। यदि जिला प्रशासन आवास आंवटन नियमो के तहत तथा विभागीय नार्म के अनुरूप आवास आंवटनो की जांच करवाये तो निश्चित ही कई तथ्य सामने आ सकते है।

......इनका कहना है -
प्रेम कुमार डेनियल का आवास आंवटन के लिये दिया गया आवेदन,आवास आंवटन समिति ने निरस्त कर दिया है। इन्हे क्वार्टर विधिवत अलाट नही हुआ है। इन्होने मकान पर कब्जा किया है,इसकी मुझे कोई जानकारी नही है।


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