बाकानेर~इस बार ईद पर टोपी के साथ मास्क भी लगाएंगे~~

बाकानेर( सैयद  रिजवान अली)

हमको, आपको एक-दूसरे की बाहों में नहीं बँधना यानी गले नहीं   मिलना , पर दिल से दिलो के   तार जोड़ना है ।         
ईद पर इस बार गले नहीं मिलेंगे दिल से दिल को मिलाएंगे ।
मिल के होती थी कभी ईद , अब कोरोना के दौर में यह हालत है कि डर-डर के दूर से मिलेंगे ईद , अब कोरोना की मार त्यौहारो पर भी पड़ने लगी है । मंदिर बंद मस्जिद बंद , सूनी सूनी गलियां वीरान चौराहे ऐसा लगता है  बस्तीयों में कोई नहीं रहता । पहले त्यौहारो में रोशन रहता था, मेरा शहर किसकी नजर लग गई
रमज़ान के रोजो के बाद जो  ईद आती थी , गजब की रौनक के साथ हर शख्स ईद की तैयारियों में लग जाता था, रात से ही कपड़ों पर प्रेस करना, जूते चप्पलों को चमकाना सुबह जल्दी उठने की फिकर में कहीं ईदगाह में नमाज नहीं छूट जाए । रात में उठ उठ कर घड़ी को देखना , पर इस बार भी ईद की सुबह का सूरज  निकलेगा, चिड़िये भी चहकेगी, हवा के झोंके तुमको बुलाएंगे, पर इस बार हम अपने उलेमाओं की बात मानकर घर पर ही ईद की नमाज पड़ेंगे , और दुनिया को दिखाएंगे हम देश के लिए अपनी ईद घर पर ही मनाएंगे । इस महामारी ने इंसानियत को जगा दिया है, लोगों ने त्यौहार को सादगी से मनाने की मन बना लिया है , और जो पैसा नए कपड़ों जूतों और घर के नए सामानों पर खर्च होना था, उस पैसे से गरीबों की मदद की जा रही है । इसलिए मैं यह कहता हूं मेरा देश महान, यहां की जनता है बलवान ।
इस बार हम लोग इन सब की मदद करेंगे और अगली ईद में हम फिर से जोर शोर से ईद मनाएंगे और तुम्हारे लिए बहुत सारे नए कपड़े और जूते लेंगे । यह सब बातें सुनकर सैफ अपने कमरे से अपनी गुल्लक लेकर आया और अपनी अम्मी के हाथ में गुल्लक रख कर  बोला अम्मी इसमें पि
इस बार हम सब ईद की खरीदारी नहीं करेंगे , उन पैसे से गरीबों की मदद  करेंगे , हो सकता है हमारी मदद ऊपर वाले को पसंद आ जाए और ऊपर वाला जिंदगी भर हमारी मदद करता रहे ।
*रखते हैं जो औरों के लिए
          *प्यार का जज्बा ।
      *वो लोग कभी टूट कर
        *बिखरा नहीं करते ।।


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