अंजड~पिछले साल की अधिक बारिश ने बिगाड़ा था उत्पादन का गणित, कपास, मक्का व सोयाबीन बुआई पर पड़ेगा असर~~

मिर्च के लिए बढ़ रहा किसानों का रुझान~~

सतीश परिहार अंजड~~

अंजड---पिछले साल हुई अतिवृष्टि से कपास, मक्का व सोयाबीन फसल के उत्पादन प्रभावित हुआ था। इसका असर इस साल इन फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिल सकता है। ऐसी परिस्थिति से दोचार हो चुके किसानों का रुझान मिर्च बुवाई के प्रति बढ़ाता दिखाई दे रहा है। इस साल मिर्च के भाव भी अच्छे मिलने से दुकानों पर किसानों कि आवाजाही बनी हुई है।

कृषि विभाग का भी यहीं मानना है...
वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी के अनुसार इस साल विकासखंड में कपास का रकबा 10 प्रतिशत कम हो सकता है। इसकी जगह किसान  राहुल यादव, अनिल पाटीदार, आनंद और गगन पाटीदार ने बताया अच्छे उत्पादन और अनुकूल मौसम को देखते हुए मिर्च के पौधे अपने खेतों में लगा चुके हैं। हालांकि सिंचाई संसाधन वाले किसानों ने गर्मी के कपास की बुवाई शुरू कर दी है। किसान सुनिल जमादारी ने बताया खेत तैयार कर सिंचाई के बाद कपास बीज की बिजाई शुरू की है।
पिछले साल अत्यधिक बारिश के कारण कपास फसल खराब हुई थी। बारिश के बाद कुछ उत्पादन हुआ भी तो इससे केवल लागत ही निकल सकी। वैसे इस बार अच्छी बारिश का अनुमान लगाया रहा है। इसलिए इस साल रकबा थोड़ा कम रखा है। इसकी जगह मिर्च लगाएंगे।

वहीं अंजड के किसान अनिल ने बताया यदि अधिक बारिश नहीं हुई तो गर्मी के कपास के बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
सिंचाई के लिए दिन में मिले बिजली
किसानों ने रात की बजाय दिन में सिंचाई के लिए बिजली देने की मांग कर रहे है। किसान जितेंद्र भावसार आदि किसानों ने कहा रात में जंगली जीव-जंतुओं की उपस्थिति से डर बना रहता है। पिछले 5 साल से नर्मदा पट्‌टी क्षेत्र में तेंदुए की उपस्थिति देखी जा रही है। जंगली सूअरों व इनके किसानों के खेतों में देखे जाने की घटनाएं भी बढ़ी है। फिलहाल रात 9.30 से रात 1.30 बजे तक 4 घंटे और 6 घंटे दिन में बिजली सप्लाय हो रहा है। यदि दिन के समय ही बिजली मिलती है तो किसानों को राहत मिलेगी।
खेतों में कपास बुवाई व मिर्च रोप तैयार करने में जुटे किसान
खामखेड़ामें गर्मी सीजन के कपास की बुवाई व बीज मिलने के बाद मिर्च रोप तैयार करने में किसान जुट गए हैं। सिंचाई संसाधन वाले किसानों ने खेत तैयार करने के बाद कपास की बुवाई करवाई है। साथ ही मिर्च लगाने के लिए रोपणी भी लगाई जा रही है। किसान देवीलाल यादव ने बताया सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखकर खेतों में काम करवाया जा रहा है।

10 से 15 प्रतिशत घटेगा कपास का रकबा--

गर्मी सीजन के कपास की बुवाई जारी है-

पिछले साल के मुकाबले कपास का रकबा 10 से 15 प्रतिशत घटने का अनुमान है।
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मक्का व सोयाबीन की बुवाई के प्रति भी रुझान कम है। इसकी जगह मिर्च का रकबा बढ़ सकता है। किसान किसी एक की बजाय बीटी कॉटन की सभी प्रकार की वैरायटी लगाएं। जल्दबाजी न करें। 10 जून तक गर्मी सीजन के कपास की बुवाई होगी।

- के.सी. पाटीदार वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी


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