*भोपाल~निःस्वार्थ भावना से जुडे़ मुस्लिम कांग्रेस कार्यकर्ताओ को महत्व कब मिलेगा ?* ~~

*मुस्लिमों को गुलाम ना समझे कांग्रेस आलाकमान- रियाज़ शेख*~~

सैयद रिजवान अली~~

भोपाल । इतिहास गवाह रहा है की मुस्लिम समाज के कार्यकर्ताओ ने कांग्रेस के हाथ का साथ हमेशा से दिया है । इसी कारण मुस्लिम कार्यकर्ता हमेशा ही अन्य राजनैतिक पार्टीयो की उपेक्षा का शिकार भी होता आया है , खैर उनसे अपेक्षाओ और संवेदनाओ की मुस्लिम समाज को आवश्यकता भी नही लेकिन वर्तमान हालातो को देखते हुए यह कहने मी भी गलत नही की जिस कांग्रेस पार्टी के लिए समर्पण की भावना से मुस्लिम कार्यकर्ता काम करता आ रहा है या कर रहा है उस पार्टी के द्वारा ही वह उपेक्षा का शिकार हो रहा है । निश्चित ही मध्यप्रदेश मे पन्द्रह सालो के बाद पन्द्रह महिने के कांग्रेसी कार्यकाल मे मुस्लिम कार्यकर्ताओ की उपेक्षा का जीवंत उदाहरण देखने को मिला । कांग्रेस के शासन काल मे जब सभी को सेवाओ का प्रतिफल बांटा जा रहा था तब भी मुस्लिम कार्यकर्ता बडी़ आश लगाकर लाईन मे खडा़ नजर आ रहा था की उसे उसके समर्पण का प्रतिफल प्राप्त होगा लेकिन आलाकमान की नजर मे शायद मुस्लिम कार्यकर्ताओ के समर्पण की कोई कद्र न करते हुए अदना सा ज़िला अध्यक्ष का पद तक नही दिया गया । खेर यह तो कांग्रेस की पुरानी परम्परा का निर्वहन ही किया गया है प्रारंभ से ही कांग्रेस आलाकमान ने मुस्लिम कार्यकर्ताओं को न तो विधायक और सांसद के पर्याप्त टिकिट वितरण किये और न ही पार्टी में कोई वरिष्ठ स्तर के पद दिये । इतना ही नही सरकार आने पर भी निगम और मंडलो के अध्यक्ष पदो से भी मुस्लिमो को वंचित रखा गया था । अरे कम से कम स्थानिय जन भागीदारी समितियों में ही स्थान दे दिया जाता तो थोडा़ मान बढ़ जाता । अल्पसंख्यक विकास कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष रियाजुद्दीन शेख ने सोनिया गांधी को पत्र लिख प्रदेश कांग्रेस आलाकमान पर उक्त आरोप लगाकर मुस्लिम कार्यकर्ताओ को महत्तव प्रदान करने हेतु अवखत कराया । उन्होने कहा की कांग्रेस अपना नाजरिया बदले क्योकि अब नहीं लगता की यह पंडित जवाहर लाल नेहरू और मौलाना आज़ाद की कांग्रेस है। कांग्रेस ने मुस्लिम समाज को वोट बेंक समझकर उसका ईस्तेमाल करने की अपनी इस परंपरा को बदलना होगी। अगर अब भी कांग्रेस ने अपनी कार्यशैली मे परिवर्तन कर मुस्लिम कार्यकर्ताओ को महत्तव प्रदान नही किया तो शिघ्र ही म.प्र मे मुस्लिम कार्यकर्ताओ को दुसरे विकल्प तलाशना होंगे फिर शायद एक बहुत बडा़ वोट बेंक कांग्रेस के हाथ से निकलेगा भी और कांग्रेस का प्रदेश पर राज करने के ख्वाबो का भी पुरी तरह से अंत हो जायेगा ।*


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