अंजड~टिड्डी दल का खतरा, कृषि विभाग ने कहा फसलों व पेड़-पौधों को बचाने सावधान रहें~~

समीपस्थ जिले खरगोन में मचाया कोहराम~~

सतीश परिहार अंजड~~

अंजड--कोरोना महामारी के बीच एक अजीब से संकट की आहट सुनाई देने लगी है। यह संकट टिड्डी दल के रूप में है जो पहले पाकिस्तान से राजस्थान में आया और मप्र के कई जिलों में इसका खतरा बढ़ गया है। टिड्डी दल का खतरा कि संभावना को देखते हुए शनिवार को ठीकरी ब्लाक कृषि विभाग ने किसानों के लिए अलर्ट जारी कर फसलों से लेकर पेड़, पौधे व अन्य हरियाली को बचाने के लिए तैयार रहने कहा है।

पाकिस्तान से करीब पांच महीने पहले टिड्डी दल ने राजस्थान में प्रवेश किया था। राजस्थान के कई क्षेत्रों में टिड्डी दल ने ऐसा कहर बरपाया कि खेतों में फड़ी फसल, बगीचों के फल-फूल से लेकर, पेड़ और हरी झाड़ियों तक को टिड्डी दल ने चट कर दिया है। राजस्थान से आया टिड्डी दल खरगोन जिले के बडवाह में फिलहाल हाहाकार मचा रहा है। अब इनका खतरा बडवानी जिले के ठीकरी ब्लाक में भी आने कि संभावना है। इसीलिए कृषि विभाग ने अब किसानों को अलर्ट रहने कि बात कही है।


हवा की दिशा में उड़ता है टिड्डी दल

कृषि विभाग के अफसरों के अनुसार टिड्डीयों का दल 10 से 12 किलोमीटर में फैला रहता है। इसमें 5000 करोड़ तक टिड्डीयां हो सकती हैं। एक दिन में टिड्डीयों का दल 100 किलोमीटर तक का सफर कर सकता है। यह इतने खतरनाक होते हैं कि खेत में खड़ी फसल हो या फिर झाड़ी और विशाल पेड़। जिस पर बैठते हैं वह जगह काली पड़ जाती है। रातभर यह बसेरा करते हैं और सुबह होने तक खेत में खड़ी फसल हो या फिर बड़े से बड़ा पेड़, हर जगह पत्ते व फल गायब हो जाते हैं। खेतों में खड़ी फसल को तो तनों सहित चट कर जाते हैं।


ऐसे भगाया जा सकता है टिड्डीयों को

क्लोरोफाइरोफोस 20 प्रतिशत ईसी 1200 एमएल को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर फसल या पेड़ों पर छिड़का जा सकता है या फिर डेल्टामेथ्रिन 2.8 प्रतिशत ईसी के 650 एमएल को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में छिड़काव कर सकते हैं। टिड्डी दलों से होने वाले नुकसान को कम से कम करने के लिए इन दवाओं का छिड़काव रात 2 से सुबह 8 बजे के बीच ही सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा टिड्डी दल को भगाने के लिए तेज आवाज या घंटिया या कनस्तर (डब्बे) बजाना भी कारगर माना गया है।


वर्जन-
के.सी. पाटीदार ब्लाक कृषि विस्तार अधिकारी--
मध्यप्रदेश में आए टिड्डी दल ने कई जगह काफी नुकसान किया है। जिसकी सुचना मिल रही हैं। हवा के साथ यह करोड़ों टिड्डी उड़ती हैं जो 10 से 12 किमी ऐरिया में फैली रहती है। रात में जहां रुकती है वहां सफाचट कर देती हैं। इनके बडवानी जिले में आने की संभावना हवा की दिशा पर निर्भर है, इससे बचाव के लिए ट्रेक्टर चलित स्प्रेयर अंजड और कुआं में उपलब्ध होने के साथ ही अंजड नगर परिषद में फायर फायटर उपलब्ध है इनके आवश्यकता होने पर उपयोग किया जायेगा इस टिड्डी दल को रोकने में उपयोग होने वाले रासायनिक कीटनाशक विक्रेताओं के पास पर्याप्त मात्रा में भंडारण किये हुए हैं।


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