झाबुआ~कोरोना महामारी को लेकर बनी आपदा प्रबंध समिति पूर्णत: विफल~~

प्रशासनिक तानाशाही के शिकार हो गए मजदूर-तानाशाह बने झाबुआ के एसडीएम अभय खराड़ी ~~

झाबुआ। संजय जैन~~

कोरोना महामारी को लेकर कहने को तो जिला प्रशासन ने एक जिला स्तरीय आपदा प्रबंध समिति का गठन किया है,जिसकी कई बैठकें जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के सभागार में कर ली। परंतु देखने में आ रहा है कि आपदा और प्रबंध समिति कोरोना महामारी को लेकर लडऩे में पूर्णता विफल साबित हो रही है। जिसका ज्वलंत उदाहरण पिछले दिनों गुजरात की सीमा से लगे पिटोल बॉर्डर पर देखने को मिला। गुजरात से आए हुए हजारों मजदूरों को बच्चों को स्त्रियों को भूखे प्यासे तड़पना पड़ा और यह सब प्रशासनिक तानाशाही के शिकार बने,जिसके चलते मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया की बदनामी हर जुबां पर प्रदर्शित हो रही थी और यह सब कार्य जिले की प्रशासनिक इकाई के द्वारा दूरदर्शिता एवं संवेदनहीनता के कारण यह स्थिति निर्मित होती हुई नजर आई।

-तानाशाह बने झाबुआ के एसडीएम अभय खराड़ी
प्रत्यक्षदर्शियों एवं प्रेस जगत के प्रतिनिधि द्वारा जो देखा गया और जो बयां किया गया वह दर्दनाक और शर्मनाक था तानाशाह बने झाबुआ के एसडीएम अभय खराड़ी अपनी सारी मानवता को भूल गए थे और टेंट में बैठे हुए मजदूरों स्त्रियों एवं बच्चों को यह खदेडने का काम कर रहे थे। भोजन बना हुआ था,परंतु भोजन भी तानाशाह के चलते मजदूर भोजन नहीं कर पाए। नन्हे- नन्हे बच्चे दूध और पानी के लिए बिलखते हुए नजर आए । हर कोई मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया को कोसता हुआ नजर आया। यह स्थिति झाबुआ जिले में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही एवं एवं संवेदनहीनता के चलते परिलक्षित हो रही थी,जिसके चलते हजारों की संख्या में गुजरात से आए मजदूरों ने वहां गदर मचा दिया। बसों एवं जीपों के कांच फोड़ दिए गए ।

-दो करोड़ के बजट के ई-टेंडर निकाल कर बंदरबांट करने के भी समाचार
केंद्र एवं प्रदेश सरकार ने करोड़ों का बजट कई गुना महामारी से निपटने के लिए झाबुआ जिले के प्रशासनिक इकाई को दिया है। इस बजट का यहां के प्रशासनिक इकाई अंधा बाटे रेवड़ी अपने अपने को दे,की तर्ज पर प्रशासनिक अधिकारी एवं उनके लग्गु भग्गू पत्रकार एवं व्यापारियों ओर कर्मचारीयो को गुपचुप-गुपचुप ढंग से आए दो करोड़ के बजट के ई-टेंडर निकाल कर बंदरबांट करने के भी समाचार गुलाबी बिलिं्डग के गलियारों से छनकर हमारे पास आ रहे हैं। इसमें प्रशासनिक मुखिया से लगाकर कई अधिकारी गुलाबी बिलिं्डग के शामिल है। कहने वाले कहते हैं कि प्रदेश में भाजपा की सरकार काबीज हो चुकी है,परंतु उससे जुड़े जनप्रतिनिधि इतनी बड़ी हो रही गड़बड़झाला को लेकर क्यों चुप्पी साधे हुए है...? यह यक्ष प्रश्न जनता के बीच बना हुआ है .....?

-पूर्ण किया जा रहा अपरिपक्व लोगों को शामिल कर औपचारिकता को
कहने वाले कहते हैं कि जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई जिला स्तरीय आपदा और प्रबंधन समिति के चयन में विषय विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया है और फील्ड से जुड़े सदस्यों को दरकिनार कर अपरिपक्व लोगों को शामिल कर औपचारिकता को पूर्ण किया जा रहा है। इसमें कई ऐसे संगठन के सदस्य जो अपने आप को समाजसेवी कहते हैं, पर समाज सेवा के नाम पर करोना महामारी को लेकर आज तक उन्होंने कोई काम नहीं किया। सिर्फ  आपदा प्रबंध समिति में उपस्थित होकर अपना रुबाब गालिब करते हैं,जिला प्रशासन इस ओर भी ध्यान दें। जिले में कई बस ऑपरेटरों के पास बसे उपलब्ध है फिर भी जिला प्रशासन मजदूरों को पहुंचाने के लिए उन ऑपरेटरों से बस क्यों नहीं मंगा रहा पिटोल बॉर्डर पर.......? यह भी गुलाबी बिलिं्डग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

-दो करोड़ का बजट का कहां और कैसे खर्च किया.....?
जिला प्रशासन से कोरोना महामारी से निपटने के लिए आए दो करोड़ का बजट का कहां और कैसे खर्च किया.....?क्या-क्या सामग्री क्रय की गई......? का जवाब प्रशासन से जनता मांगते हुए नजर आ रही है। कब हो गए टेंडर,कब हुए आर्डर और कब आई सामग्री.....? इसका जवाब जिला प्रशासन तुरंत दे। कहने को तो जिला प्रशासन जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति बनाकर उसके कई बैठकें करके उसका ढिंढोरा पीटा जा रहा है पर धरातल पर और वास्तविकता में नजारा कुछ और ही है। जिले की सीमाओं पर अन्य क्षेत्रों से आने वाले मजदूरों की न तो प्रशासन द्वारा जांच की समुचित मेडिकल व्यवस्था की गई है  और न उनके भोजन पानी की व्यवस्था की गई है । बाहर से आने वाले कोरोना संक्रमित लोगों को रोकने का प्रयास भी प्रशासन द्वारा समुचित ढंग से नहीं किया जा रहा है।

-एक बस ऑपरेटर की बसों को ही एंगेज किया***अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे की तर्ज........ पर
प्रशासन के दोहरी नीति के चलते हमने ऊपर पहले लिख दिया है ***अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे की तर्ज........ पर जिले में कई बस ऑपरेटर हैं,जिनकी बसें अभी करोना के चलते नहीं चल रही है। उन बसों को जिला प्रशासन मजदूरों की आवाजाही के लिये नहीं लगा रहा है। सिर्फ  एक बस ऑपरेटर की बसों को ही एंगेज कर लगाना और उसमें रेड क्रॉस के माध्यम से डीजल भराने की चर्चा गुलाबी बिलिं्डग के सूत्रों के अनुसार जो प्राप्त हो रही है,वह चौंकाने वाली है। रेडक्रास का पैसा डीजल मे खर्च किया जा रहा है,जिसमें व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार होने की भी खबरें आ रही है। हमने पूर्व में समाचार के माध्यम से यह तथ्य उजागर कर दिया था कि जिले में पदस्थ आला अधिकारी कोरोना के आड़ में भी चांदी काटने में लगे हैं। बताया जाता है कि अन्य बस ऑपरेटर की बसों को मजदूरों को भेजने के लिए क्यों नहीं लगाया जा रहा है.....? यह यक्ष प्रश्न जनता के बीच में बना हुआ है,जिसके कारण पिटोल बॉर्डर पर भगदड़ मच रही है ओर मारा मारी हो रही है।

-निभाना चाहिए थी,पिटोल बॉर्डर पर रहकर गदर को शांत करने की ड्यूटी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन द्वारा कोरोनावायरस कर्मचारी और अधिकारियों को कीट इत्यादि सुरक्षा के सामग्री संपूर्ण जिले में उपलब्ध नहीं कराई जा रही है तो फिर बजट कहां खर्च किया जा रहा है। यह जन चर्चा का विषय बना हुआ है। विगत दिवस पिटोल बॉर्डर पर मजदूरों द्वारा किए गए हंगामे का कारण प्रशासनिक तानाशाही और लापरवाही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब प्रशासन के तानाशाही से उबकर मजदूर गदर करने पर आमादा हो गए,तब वहां उपस्थित झाबुआ जिले के कलेक्टर व अन्य अधिकारी वहां से नौ-दो ग्यारह हो कर गुजरात के खंगेला बॉर्डर पर पहुंचकर थम गए। जबकि उन्हें पिटोल बॉर्डर पर रहकर गदर को शांत करने की ड्यूटी निभाना चाहिए थी,परंतु ऐसा उन्होंने नहीं किया। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि जिले में आपदा और प्रबंधन समिति पूर्णतया अपने कार्यों में विफल हो गई। सिर्फ  बैठकों का आयोजन कर यह खानापूर्ति करने में लगी है और आए हुए बजट को बंदरबांट कर हजम करने में लगी है। ऐसी जन चर्चा गुलाबी बिलिं्डग से लगाकर राजनीतिक गलियारों एवं पत्रकारिता के गलियारों में व्याप्त है।

-उक्त समाचार में छपे तथ्यों की जांच उच्च स्तरीय समिति बनाकर करवाई जाये-मुख्यमंत्री से की है मांग 
जिला प्रशासन जहां संपूर्ण जिले में पर्याप्त खाद्य आपूर्ति की बात कर रहा है वही देखने में आ रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र की ग्रामीण जनता एवं पंचायतों से जुड़े पंच और सरपंच खाद्य सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचने की शिकायत करते हुए नजर आ रहे हैं। यहां तक कि ग्रामीण पंचायतों के सरपंच जिला प्रशासन को ई-डिमांड कर खाद्य आपूर्ति की मांग कर रहे हैं,परंतु जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यह संपूर्ण जिले के हालात हैं फिर भी इन महत्वपूर्ण विषयों में जिला आपदा और प्रबंधन समिति में चर्चा ना होना आश्चर्य का विषय बना हुआ है। इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पूर्व जिला अध्यक्ष एवं अंत्योदय समिति के पूर्व उपाध्यक्ष दौलत भावसार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से मांग की है कि उक्त समाचार में छपे तथ्यों की जांच उच्च स्तरीय समिति बनाकर करवाई जाये ताकि भ्रष्टाचार उजागर हो सके। अधिकारियों की दुर्नीति भाजपा सरकार को बदनाम करने की जिले में चलाए हुए हैं,उसका भंडाफोड़ हो सके।


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