*कोरोना वायरस ज्योतिषीय गणना*
( *ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री* )

कोरोना वायरस ने लगभग पूरे विश्व में कोहराम मचा रखा है। कोरोना वायरस से पूरा विश्व चिंतित है हर कोई सोच रहा है कि इससे मुक्ति कब मिलेगी ? इससे कैसे बाहर निकला जाए ? ऐसे तमाम सवाल को लेकर लोगों की निगाहें ज्योतिष शास्त्र की तरफ हैं। कोई भी रोग या महामारी किसी एक ग्रह के कारण नहीं उत्पन्न होता वरन अनेक ग्रहों के संयोजन, युति और राशियों के प्रभाव के कारण उत्पन्न होता है। इस संदर्भ में मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने एक चर्चा में बताया है कि  ज्योतिष विज्ञान की दृष्टि से प्रकृति की सात्विक शक्तियां सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति का कमजोर अवस्था मे गोचर , राहु का आद्रा नक्षत्र में गोचर, मंगल, शनि, गुरु, केतू  ग्रहो की युति, संयोजन, राशियो के प्रभाव कोरोना वायरस जैसे संकट उत्पन्न होने के प्रमुख कारण हैं।
           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि भारत वर्ष की कुंडली वृषभ लग्न और कर्क राशि की बनती है | मिथुन राशि से गले के रोग तथा कर्क राशि फेफड़े और जल संबंधित बीमारियों को दर्शाती है। भारत वर्ष की कुंडली का द्वितीय भाव जिसे कुटुम्ब का भाव भी और जनता का भाव भी कहा जाता है द्वितीय भाव इंसान के मुख और नाक का भी भाव है। पाप ग्रह राहु सभी प्रकार के जहर और वायरस पर शासन करता है। उसी भाव पर राहु अपनी उच्च राशि मिथुन राशि में गोचर कर रहे है  ऐसी स्थिति में मिथुन राशि पीड़ित हैं। आर्द्रा नक्षत्र  स्वयं राहु का नक्षत्र है l राहु जब भी आर्द्रा नक्षत्र में संचार करता है तब विश्‍व में कोई न कोई बड़ी घटना, महामारी या आर्थिक स्थिति को धक्‍का लगता है।
           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने बताया कि विगत 9 दिसंबर 2019 से चंद्रमा की महादशा में शनि का अंतर चल रही थी एवं 12 मार्च 2020 से लेकर 03 जून 2020 तक चंद्रमा की महादशा में बुध की अंतर्दशा रहेगी , इसके बाद 03 जून 2020 से लेकर 06 जुलाई 2020 तक चंद्रमा की महादशा में केतु की अंतर्दशा चलेगी , भारत की कुंडली के अनुसार इस तरह के ग्रहों की युक्तियां देश के लिए ठीक नहीं मानी जाती है । डाँ. अशोक शास्त्री ने बताया कि  अगर भारत की नवांश कुंडली पर नजर डालते हैं तो वह मीन लग्न की कुंडली है और चंद्रमा से शनि छठे बैठे हैं। यह षडास्टक योग बनाते हैं, जो हानिकारक है। केतु बुध के नक्षत्र में बैठे हैं और बुध श्वास की बीमारी का कारक है, इसलिए कोरोना महामारी की समस्या बनी हुई है।
           डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि   ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य आरोग्यता का कारक है और यदि वह गोचर में कमजोर चल रहा हो तो भी रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। सूर्य को शास्त्रों में चिकित्सक का कारक माना गया है सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में आगामी दिनांक 14 मई 2020 तक रहेंगे इसके उपरान्त दिनांक 14 जून तक वृषभ राशि में गोचर करेंगे  इस अवधि में कोरोना की औषधि निर्माण का योग बना हुआ है। डाँ. अशोक शास्त्री के मुताबिक दिनांक 14 जून से 16 जुलाई तक मिथुन राशि में सूर्य इस महामारी से उतार-चढ़ाव रखेगा और कई देशों में आंशिक स्थिति सुधरने की गति बनेगी। 16 जुलाई 2020 से 16 अगस्त 2020 के मध्य चर राशि कर्क में सूर्य होने से यह कोरोना में राहत दिलाएगा। 16 अगस्त से 16 सितंबर के मध्य सूर्य अपनी सिंह राशि में बली होने और शनि, मंगल व गुरु इन तीनों ग्रहों का भिन्न-भिन्न राशियों में बली होने से कोरोना से मुक्ति मिलनें की पूर्ण रूप से उम्मीद की जा सकती है ।
           डाँ. शास्त्री के अनुसार  गुरु को जीव तथा शनि को आमजन मानस का कारक भी माना जाता है। गोचर में जब यह दोनों ग्रह विशेष रूप किसी ग्रहीय परिस्थिति से पीड़ित होते हैं तब मानव सभ्यता को इस प्रकार के कोप का भाजन बनना पड़ता है। शनि (श्वसन व वायु तत्व) तथा गुरु (जीव संज्ञक) एक राशि में होने के कारण महामारी से अशांति की स्थिति बनाते हैं। डाँ. शास्त्री ने बताया कि  ज्योतिष शास्त्र में राहु और केतु तथा शनि को सूक्ष्म जीवों के कारण उत्पन्न होने वाली महामारी का कारक ग्रह कहा गया है बृहस्पति का काम है वृद्धि करना, तो इस रोग के फैलने में बृहस्पति और शनि मुख्य भूमिका निभा रहे है।
           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  बृहस्पति दिनांक  14 मई 2020 को मकर राशि में वक्री हो रहा है यह दिनांक  30 जून, 2020 मंगलवार तक मकर राशि मे वक्री अवस्था में रहेंगे एवम शनि भी दिनांक  11 मई 2020 को मकर राशि में वक्री होगा शनि 29 सितम्बर 2020 तक  मकर राशि में ही वक्री अवस्था में रहेंगे वक्री गुरु व वक्री शनि की इस युति के कारण भारत में इस वायरस की गति बढ़ते हुए क्रम में बढ़ती जाएगी और यह ग्रह स्थिति कोरोना महामारी का तेज गति से फैलाव करेगी बढ़ाएगी । डाँ. अशोक शास्त्री के मुताबिक  बृहस्पति दिनांक 30 जून को वक्री अवस्था मे गोचर करते हुए ही मकर राशि से धनु राशि मे दिनांक 13 सितंबर 2020 रविवार को सुबह 6.11 बजे से मार्गी गति से गोचर करेंगे  इस दृष्टिकोण से गुरु 13 सितम्बर 2020 से के बाद अपना शुभ फल देंना शुरू करेगे तभी कोरोना वायरस महामारी से मुक्ति मिलने की उम्मीद की जा सकती है ।
           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि राहु आगामी दिनांक 23 सितम्बर 2020 तक मिथुन राशि में रहेंगे जो शनि से षडाषटक योग बना रहे है अत: 23 सितम्बर 2020 तक कोरोना का दुष्प्रभाव बना ही रहेगा आगामी दिनांक  23 सितंबर 2020 को राहु देव राशि परिवर्तन कर मिथुन से वृषभ में आएंगे, जिसके साथ ही कोरोना के संकट से निजात मिलती शुरू हो जाएगी।
           डाँ. अशोक शास्त्री ने स्पष्ट करते हुए बताया है कि हम सभी को दिनांक 23 सितम्बर 2020 तक बेहद संभलकर सामाजिक दूरियां बनाते हुए यानी सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर चलना होगा तभी हम सभी मिलकर इस वायरस का जड़ से सफाया कर पाएंगे। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा दी गई सभी सलाह निर्देशो पर हम सभी अमल करे एवं खुद सावधानी बरतें, सतर्क रहें और स्वस्थ रहें | जय हो
                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245, एम. जी. रोड (आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

             --:  *शुभम्  भवतु*  :--


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