अंजड~रोजगार के नाम से कुछ नहीं बड़ी मुश्किल से वापस लौटे दर्जनों मजदूर~~

सतीश परिहार अंजड~


अंजड-- सोने चांदी के काम की तलाश में नगर अंजड आए पश्चिम बंगाल के 30 मजदूरों की शनिवार को घर वापसी हुई। एक और मुसिबत तो दूसरी तरफ लगभग 2000 किलोमीटर अपने घर जाने की खुशी में इन सभी की आंखों से आंसू छलक उठे। यहां से सभी लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में स्थित अपने घरों के लिए रवाना हो गए।
अंजड के वार्ड नं 2 के निर्दलीय पार्षद शरद ठाकुर ने बताया कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिले सहित अन्य जगहों से लगभग 30 मजदूर अंजड में सोने का काम करने आए थे जिनकों आज वापस रवाना किया गया है, जिसमें मेरे और पेरालीगल वालेटियर सतीश परिहार का सहयोग रहा है। पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से अंजड आए सोने का काम करने वाले कारिगर मुनिर बंगाली ने बताया लाकडाउन के बढने से धिरेधिरे मुसिबत बढ़ गई पैसे खत्म होने से यहां उनके परिजन काफी दुखी थे और अपनों की वतन वापसी के लिए परेशान हो रहै थे। स्थानीय पार्षद और पेरालीगल वालेटियर के संयुक्त प्रयासों से इनकी घर वापसी का रास्ता साफ हुआ। मजदूरों ने अपने घरों से किसी तरह 1 लाख 30 हजार रुपए मंगाकर सकुशल वतन लौटे।

कारिगर बप्पा बंगाली ने बताया--आज एक ही बस से तिस लोग अपने वतन जा रहै है एक आदमी को 4200 सौ रूपये किराए का खर्चा आया है जिसमें सरकार की तरफ से कोई मदत नहीं मिली है।
शेख नसीम ने बताया--अपने वतन से दुर अंजड में झुले चलाने आया था मैं पश्चिम बंगाल के मेथनीपुर जिला तहसील वेंगनाथपुर गांव हतीहोल का रहने वाला हुं अंजड के सांई मंदिर में रामनवमी पर मेले में लगने वाली झुलों कि मशीन चलाने आया था,लाकडाउन के चलते मेला नहीं लग पाया और पिछले कुछ दिनों से मालिक जो कि रतलाम का रहने वाला है जिसने अब खाना आदि का पैसा देना भी बंद कर दिया है सतीश परिहार द्वारा उनके खर्च से मुझे अपने वतन वापस 2000 किलोमीटर दूर वापस भेजा जा रहा है।


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