।।  *सुप्रभातम्*  ।।
               ।।  *संस्था  जय  हो*  ।।
        ।।  *दैनिक  राशि  -  फल*  ।।
        आज दिनांक 01 जुलाई 2020 बुधवार संवत् 2020 मास आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि सायं 05:30 बजे तक रहेंगा पश्चात द्वादशी तिथि लगेगी । आज सूर्योदय प्रातः काल 05:36 बजे एवं सूर्यास्त सायं 07:24 बजे होगा । विशाखा नक्षत्र मध्य रात्रि पश्चात 02:34 बजे तक रहेंगा पश्चात अनुराधा नक्षत्र आरंभ होगा । आज का राहू काल दोपहर 12:33 से 02:13 बजे तक रहेंगा । दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेंगा यदि आवश्यक हो तो तिल का सेवन कर यात्रा आरंभ करें । जय हो

                  *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245 , एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार, एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

                    --:  *विशेष*  :--

*देवशयनी (हरिशयनी) एकादशी -*
*पद्मा (आषाढ़ शुक्ल)* -
*चातुर्मास प्रारम्भ* -

पुराणों के अनुसार चार माह *(श्रावण, भादौ, अश्विन एवं कार्तिक)* के लिए विष्णु भगवान क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं। तीनों लोकों के स्वामी होने की वजह से भगवान का शयनकाल संपूर्ण संसार का शयनकाल माना जाता है।
देवशयनी या हरिशयनी एकादशी या देशज भाषा में देवसोनी ग्यारस आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाई जाती है। चूँकि एकादशी व्रत भगवान विष्णु की आराधना का व्रत है, इसलिए देवसोनी व देवउठनी एकादशियों का विशेष महत्व है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का चार माह का समय हरिशयन का काल समझा जाता है।
वर्षा के इन चार माहों का संयुक्त नाम चातुर्मास्य दिया गया है। इसके दौरान जितने भी पर्व, व्रत, उपवास, साधना, आराधना, जप-तप किए जाते हैं उनका विशाल स्वरूप एक शब्द में *'चातुर्मास्य'* कहलाता है। चातुर्मास से चार मास के समय का बोध होता है और चातुर्मास्य से इस समय के दौरान किए गए सभी व्रतों/ पर्वों का समग्र बोध होता है।
पुराणों में इस चौमासे का विशेष रूप से वर्णन किया गया है। भागवत में इन चार माहों की तपस्या को एक यज्ञ की संज्ञा दी गई है। वराह पुराण में इस व्रत के बारे में कुछ उदारवादी बातें भी बताई गई हैं। उदाहरण के लिए, इस व्रत को आषाढ़ शुक्ल एकादशी के स्थान पर द्वादशी (बारस) या आषाढ़ी पूर्णिमा से भी शुरू किया जा सकता है और चार माह पूर्ण करने के लिए इसका समापन उधर कार्तिक शुक्ल द्वादशी या कार्तिक पूर्णिमा तक किया जा सकता है।
संभवतः यह दृष्टिकोण इसलिए समाहित किया गया होगा क्योंकि यात्रा के दौरान किसी निश्चित स्थान पर पहुँचने में विलंब हो सकता है। उस युग में आज की तरह यात्रा के साधन नहीं थे, इसलिए यह विचार शुमार किया गया होगा। चूँकि चौमासे के व्रत में एक ही स्थान पर रहना आवश्यक है, इसलिए इस परिप्रेक्ष्य में उपरोक्त तथ्य सारगर्भित लगता है।
शास्त्रों व पुराणों में इन चार माहों के लिए कुछ विशिष्ट नियम बताए गए हैं। इसमें चार महीनों तक अपनी रुचि व अभीष्ठानुसार नित्य व्यवहार की वस्तुएँ त्यागना पड़ती हैं। कई लोग खाने में अपने सबसे प्रिय व्यंजन का इन माहों में त्याग कर देते हैं। चूँकि यह विष्णु व्रत है, इसलिए चार माहों तक सोते-जागते, उठते-बैठते *'ॐ नमो नारायणाय'* के जप की अनुशंसा की गई है।
इन चार माहों के दौरान शादी-विवाह, उपनयन संस्कार व अन्य मंगल कार्य वर्जित बताए गए हैं। पुराणों के अनुसार चार माहों के लिए विष्णु भगवान क्षीरसागर में शयन के लिए चले जाते हैं। तीनों लोकों के स्वामी होने की वजह से भगवान का शयनकाल संपूर्ण संसार का शयनकाल माना जाता है। चार मास की अवधि के पश्चात देवोत्थान एकादशी को भगवान जागते हैं । जय हो ।

                   *आज का राशि फल*   

          मेष :~ आज आप सामाजिक तथा सार्वजनिक क्षेत्र में प्रशंसापात्र बनेंगे । धन लाभ है ।  आज आप बौद्धिक चर्चा में हिस्सा लेंगे , परंतु अपनी वाणी पर संयम रखें । वैचारिक रुप से आवेश रह सकता है । समाधानकारी व्यवहार से अधिक लाभ की संभावना है ।

          वृषभ :~ आपका आज का दिन आनंद पूर्वक बीतेगा । मानसिक रुप से स्वस्थ रहेंगे । आपके कार्य निर्धारितरुप से योजना के अनुसार पूर्ण होंगे । आर्थिक लाभ की संभावना है । अधूरे कार्य पूर्ण होंगे । व्याधिग्रस्तों के स्वास्थ्य में सुधार आएगा । सहकर्मियों से लाभ होगा ।

          मिथुन :~ आप जीवनसाथी और संतानों के आरोग्य के लिए विशेष ध्यान रखें । किसी भी प्रकार के वाद - विवाद या बौद्धिक चर्चा से दूर रहें । अपमान न हो ध्यान रखें । मित्रों के पीछे खर्च हो सकता  है । पेट सम्बंधि बीमारियों से परेशानी हो सकती है । नए कार्य के आरंभ में निष्फल रहेंगे ।

          कर्क :~ ग्लानि से आज आपका मन व्यथित रहेगा । प्रफुल्लितता , स्फूर्ति और आनंद का अभाव रहेगा । परिवारजनों के साथ तकरार हो सकती है । धन खर्च होगा तथा अपयश भी मिल सकता है । समयानुसार भोजन नहीं मिलेगा । अनिद्रा सताएगी । छाती में विकार हो सकता है ।

          सिंह :~ आज का दिन सुख - शांतिपूर्वक बीतेगा । अपने सहोदर के साथ सम्बंधों में निकटता रहेगी । उनका सहयोग आपको मिलेगा । सम्बंधो में रही भावना की गहराई को आप समझ सकेंगे । मानसिक रूप से चिंता रहित रहेंगे । कार्य - सफलता के योग हैं।

          कन्या :~ परिवार में आनंद का वातावरण रहेगा । वाक्माधुर्य से आप अपना निर्धारित कार्य कर सकेंगे । आरोग्य अच्छा रहेगा । बौद्धिक चर्चा में न उतरे । भोजन में मिष्टान्न मिल सकता है । प्रवास की संभावना है । व्यर्थ खर्च न हो इसका ध्यान रखें । विद्यार्थियों के लिए कठिन समय है ।

          तुला :~ आप व्यवस्थित रुप से आर्थिक योजना बनाआगें । आज सृजनात्मक प्रवृत्ति होगी । शारीरिक और मानसिक रुप से स्वस्थता रहेगी । दृढ़ विचारों के साथ कार्य पूर्ण कर सकेंगे । आत्मविश्वास में वृद्धि होगी ।

          वृश्चिक :~ स्वभाव में उग्रता और वाणी पर संयम रखें । शारीरिक शिथिलता और मानसिक चिंता से मन व्यग्र रहेगा । वाहन चलाते समय अकस्मात न हो ध्यान रखें । संभव हो तो आपरेशन को आज टाले । स्नहीजनों और परिवारजनों  से वाद - विवाद हो सकता है । कोर्ट - कचहरी के कार्यों में सावधानी बरते , नहीं तो टाले ।

          धनु :~ आज का दिन आपके लिए लाभदायी रहेगा । आपको आर्थिक , सामाजिक और पारिवारिक क्षेत्र में भी लाभ हो सकता है । मित्रों और परिवारजनों के साथ पर्यटन स्थल पर जाने आनंद प्राप्त होगा । व्यापार में भी लाभदायी दिन है । परिवार में सुख - शांति रहेगी ।

          मकर :~ परिवार और संतानों के विषय में आपको आनंद के साथ - साथ संतोष का अनुभव होगा । व्यापार में धन की उगाही के लिए बाहर जाना पडेगा जो लाभप्रद रहेगा। व्यवसायिक क्षेत्र में धन तथा मान - प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी । उच्च अधिकारियो की प्रसन्नता आप पर रहेगी । व्यवसाय में भी आपको पदोन्नति मिलने की पूरी संभावना है। अकस्मात से बचकर चले ।

          कुंभ :~ प्रतिस्पर्धियों के साथ वाद - विवाद न करें । शारीरिक  अस्वस्थता रहेगी । शिथिलता और आलस्य रहेगा । फिर भी मानसिकरुप से प्रसन्नता रहेगी । व्यवसाय में उच्च अधिकारी के साथ कार्य करते समय संभलकर रहें । विदेश से समाचार मिलेंगे ।

          मीन :~ क्रोध और वाणी पर संयम बरते । आरोग्य के विषय में सावधानी रखें । सरकार - विरोधी प्रवृत्तियों से दूर रहें । रोगों के इलाज के पीछे धन के खर्च होगा । परिवारजनो के साथ संबंधो में नकारात्मकता का प्रवेश न हो इसका ध्यान रखें । इष्टदेव का जप - ध्यान और उनके प्रति आपकी आस्था आपको उचित मार्ग दिखलाएगी । ( डाँ. अशोक शास्त्री )

।।  शुभम्  भवतु  ।।  जय  सियाराम  ।।
।।  जय  श्री  कृष्ण  ।।  जय  गुरुदेव  ।।


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