*चीन के दिमाग में कपट  योग 1962 की तरह बन रहे संयोग* *( ज्योतिषाचार्य डाँ. अशोक शास्त्री  )*

*1962 की तरह बन रहे संयोग, चीन के दिमाग में कपट योग, क्या होगा 21 जून के बाद?*
*21 जून का ग्रहण भारत चीन पर असर*
*21 जून के बाद अधिक बिगड़ सकते हालात*
*चीन की नीयत में कपट योग*
*चीन अपने विनाश को दे रहा निमंत्रण ?*
*1962 की तरह बने हैं ग्रहों के संयोग*

*21 जून का ग्रहण भारत चीन पर असर*

           मालवा के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने एक चर्चा में बताया है कि दिनांक  21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में आर्द्र नक्षत्र में लगेगा जहां आज़ाद भारत की कुंडली में मंगल स्थित है। वृषभ लग्न की आज़ाद भारत की कुंडली में मंगल युद्ध स्थान यानी सप्तम भाव का स्वामी होकर धन स्थान यानी दूसरे घर में मिथुन राशि में बैठा है। ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि  वर्तमान में भारत और चीन के बीच लद्दाख में सीमा पर चल रहे तनाव के बीच यह सूर्य ग्रहण ज्योतिष के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है । दिनांक  26 दिसंबर 2019 को धनु राशि में हुए सूर्य ग्रहण के बाद विश्वभर में फैली कोरोना महामारी से जहां लाखों लोगों की जान गई है। वहीं अमेरिका और चीन के बीच शीत-युद्ध छिड़ने से वैश्विक राजनीति में अब बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं जिसमें भारत की एक महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। डाँ. शास्त्री ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर बढते तनाव के मद्देनजर दिनांक  21 जून को लगने वाले ग्रहण शुभ संकेत नहीं दे रहा है ।

*21 जून के बाद अधिक बिगड़ सकते हैं हालात* ( डाँ. अशोक शास्त्री )

           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने बताया कि दिनांक  21 जून को मिथुन राशि में पड़ रहा सूर्य ग्रहण अमेरिका के जन्मकालीन सूर्य को पीड़ित कर कष्ट देगा तो वहीं मकर लग्न की चीन की कुंडली में यह सैन्य संघर्ष के स्थान यानी छठे भाव में बैठकर उसे ओर अधिक उग्र बना देगा। मिथुन राशि में पड़ रहा यह ग्रहण भारत के मारक भाव में होकर आर्थिक संकट के गहराने तथा युद्ध से हानि का संकेत दे रहा है । डाँ. अशोक शास्त्री के मुताबिक अमेरिका और भारत की नजदीकियों से चिढ़कर चीन हिमालय में भारत की सीमाओं का अतिक्रमण करने का प्रयास करेगा।

*चीन की नीयत में कपट योग* ( डाँ. अशोक शास्त्री )

          ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि पाप ग्रहों से पीड़ित बुध नवम भाव में हो तथा चतुर्थ भाव या उसका स्वामी पीड़ित हो तो कपट योग का निर्माण होता है। चीन की कुंडली दिनांक 1 अक्टूबर 1949 के मकर लग्न की है जहां बुध नवम भाव में पाप ग्रहों सूर्य और केतु से पीड़ित है। चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल नीच का होकर युद्ध स्थान यानी सप्तम भाव में चंद्रमा को पीड़ित कर संपूर्ण रूप से कपट योग का निर्माण कर रहा है। इस योग के साथ रहस्य स्थान यानी अष्टम भाव में पड़ा शनि चीन को धोखे और छल-कपट में निपुण बनता है।

*चीन अपने विनाश को दे रहा निमंत्रण* ( डाँ अशोक शास्त्री )

           डाँ. अशोक शास्त्री ने कहा कि  चीन सितंबर 2019 से कपट योग में सम्मिलित बुध की विंशोत्तरी दशा में चल रहा है तो इस बात की प्रबल संभावना है कि इसी दशा में वह छल से कोई बड़ी सैन्य कार्यवाही आगामी 21 जून के सूर्यग्रहण के बाद कर दे। गोचर में शनि और गुरु मकर राशि में स्थित हैं। 1962 के युद्ध के समय भी इन दोनों ग्रहों की यही स्थिति थी। उस समय भी चीन ने मंगल-शनि की दशा में भारत पर धोखे से हमला किया था। डाँ. शास्त्री के अनुसार चीन की कुंडली में चंद्रमा साढ़ेसती से पीड़ित है तथा बुध कपट योग में फंसकर उसे स्वतः अपने विनाश की ओर ले जा रहा है। 

*1962 की तरह बने हैं ग्रहों के संयोग* ( डाँ अशोक शास्त्री )

           ज्योतिषाचार्य डाँ अशोक शास्त्री ने कहा कि आजाद भारत की वृषभ लग्न की कुंडली में चल रही चंद्रमा में शनि की दशा भारत के लिए शुभ नहीं है। अंतर्दशा शनि चंद्रमा से सप्तम भाव का स्वामी होकर शत्रु राशि कर्क में छठे घर के स्वामी शुक्र के साथ युत है और 1962 की तरह मकर में गोचर कर रहे हैं। शनि और गुरु चंद्रमा से सप्तम भाव में होकर युद्ध का योग बना रहे हैं । डाँ. अशोक शास्त्री ने कहा कि  21 जून को पड़ने वाला सूर्यग्रहण आजाद भारत की कुंडली के मारक भाव तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली के लग्न से अष्टम भाव को पीड़ितकर युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की हानि का योग बना रहा है। ग्रहों की इस स्थिति का प्रभाव ग्रहण से तीन महीने तक रहेगा। ( डाँ. अशोक शास्त्री )

                   *ज्योतिषाचार्य*
          डाँ. पं. अशोक नारायण शास्त्री
         श्री मंगलप्रद् ज्योतिष कार्यालय
245, एम. जी. रोड ( आनंद चौपाटी ) धार , एम. पी.
                  मो. नं.  9425491351

              --:   *शुभ भवतु*    --:


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