झाबुआ~शासकीय कर्मचारी नाजिर का बेटा बना सप्लायर यह है कोरोना का असर~~





कोरोना महामारी को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय मे पदस्थ नाजिर के माध्यम से की गई खरीदी मे लाखो का भ्रष्टाचार जांच की मांग उठी~~





नाजिर के पुत्र की फर्म बाबा इंटरप्राइजेज द्वारा सामग्री का मूल्य बाजार मूल्य से करीब 25 से 200प्रतिशत तक अधिक~~





झाबुआ। संजय जैन~~

कोरोना महामारी को लेकर देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। कई देशवासियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रधानमंत्री राहत कोष में राशि दान मे दी,तो झाबुआ जिले में भी कई लोगों ने तेल ,शक्कर ,आटा आदि के पैकेट बनाकर गरीबजनों को वितरित किए। कोरोना की रोकथाम हेतु या सुरक्षा की दृष्टि से जिला प्रशासन द्वारा आपदा प्रबंधन समिति के माध्यम से सामग्री टेंडर के माध्यम से खरीदी की। 




-करीब 25 से 200 प्रतिशत अधिक दरो मे सप्लाय-जांच की जाये तो जरूर ही एक बडे गोलमाल का खुलासा होगा





गुलाबी बिल्डिंग में कार्यरत नाजिर के पुत्र अफरोज कुरैशी की फर्म बाबा एंटरप्राइजेज द्वारा टेंडर में सामग्री के बाजार मूल्य से करीब 25 से 200 प्रतिशत तक अधिक दरें दी गई हैं। आपदा के इस समय में इस फर्म द्वारा आर्थिक हितों को सर्वोपरि मानते हुए मानवता की एक मिसाल पेश की और बाजार मूल्य से करीब 25 से 200 प्रतिशत अधिक दरो मे सप्लाय की। जिससे इस फर्म को जिले की समस्त सामाजिक संस्थाओं, व्यापारी संघ व समाजसेवी संस्थाओं को कोरोना योद्धा के पुरस्कार से नवाजा जाना चाहिए। साथ ही आपदा प्रबंधन समिति के सदस्यों को भी किसी पुरस्कार या किसी अलंकरण से अलंकृत किया जाना चाहिए कि उन्होंने जिले में इस प्रकार अपनी सेवाए दी और अधिक दरों में खरीदी की। प्राप्त जानकारी के अनुसार इसी के साथ ही उत्कृष्ट विद्यालय मे भी 12 वी की परीक्षा पूर्व ,खरीदी गई सामग्रियो मे भी बडा गोलमाल किया गया है। जिसमें खुद आयशा कुरैशी द्वारा इन सामग्रियो का क्रय किया गया है। वही बाजार मुल्य से अधिक के भाव में बच्चो के लिये सेनेटाईजर खरीदे गये है। अगर इन सभी पहलुओ की गंभीरता से जांच की जाये तो जरूर ही एक बडे गोलमाल का खुलासा हो पायेगा।




अधिक दरे प्रेषित करना कहां तक न्यायोचित हैं....?





यदि हम सामग्री के मूल्य की बात करें तो झाबुआ बाजार में इन सामग्रियों के मूल्य की जांच पड़ताल की तो पता चला की जो दरे बाबा इंटरप्राइजेज द्वारा दी है वह बाजार मूल्य से करीब 25 से 200 प्रतिशत तक अधिक है। विपदा की इस घड़ी में इस फर्म और फर्म संचालक द्वारा इस तरह की अधिक दरे प्रेषित करना कहां तक न्यायोचित हैं....?  जबकि एक छोटे से गूगल क्लिक पर इन सामग्रियों की सारी दरें और स्पेसिफिकेशन हमें तत्काल मिल जाता है। उसके बाद भी अत्यधिक दरों में खरीदी करना जनता के साथ धोखा करने के बराबर है। फिर भी हमने झाबुआ के बाजार से इन सामग्री के मूल्यों के बारे में जानकारी जिसमें व्यापारी का लाभ भी शामिल है।




-षडयंत्र पूर्वक आपसी सांठगांठ करके खरीदी की गई





सामग्री खरीदी की बात करें और दरों की बात करें तो ऊपर दी गई तालुका से स्पष्ट है कि बाजार मूल्य से दो से 3 गुना अधिक दरों पर खरीदी की गई। गुलाबी बिल्डिंग अर्थात जिला कलेक्टेड मे पदस्थ नाजिर एजाज कुरेशी द्वारा षडयंत्र पूर्वक आपसी सांठगांठ करके अपने पुत्र की फर्म एवं दो उसकी सहयोगी फर्म के नाम से टेंडर बुलवा लिये जबकि टेंडर की कहानी भी निराली है। जो वस्तुए खरीदी गई है उनका ही ओपन टेडरिंग होना था परंतु नाजिर का खेल यहा चला ओर नाजिर ने पांच लाख से नीचे टेंडर सीधे सीधे अपने लडके ओर उनकी सहयोगी फर्म के बुलवा लिये ओर उन्हे सीधे आर्डर दे दिये। 




-ओपन ई-टेंडर काल 5 लाख से ज्यादा के क्यो नही बुलाये गये.....? 





उक्त टेंडरो के माध्यम से जो आयटम कलेक्टर द्वारा खरीदी गई है नाजिर के माध्यम से बाजार भाव से उन आयटमो के भाव मे जमीन आसमान का अंतर है। है। उपरोक्त सामग्रीयो के बारे मे गुलाबी बिल्डिंग से लगाकर प्रेस जगत के गलियारो से एवं राजनैतिक गलियारो मे चर्चा है कि आपदा प्रबंधन के नाम पर करोना महामारी को लेकर उपरोक्त सामग्रीया खरीदी गई है वास्तव मे खरीदी भी गई है या नही यह यक्ष प्रश्न बना हुआ है। या कोरे बिलिंग हो रहे है इनके नाम पर इन वस्तुओ के सप्लायरो द्वारा सप्लाय करने  पर इनका भौतिक सत्यापन किन अधिकारीयो ने किया है इसकी भी जांच होना चाहिए। वही जब लाखो की खरीदी की जाना थी तो ओपन ई-टेंडर काल 5 लाख से ज्यादा के क्यो नही बुलाये गये.....? जबकि षडयंत्रपूर्वक इन आयटमो के ई- टेंडर चार लाख या साढे चार लाख क्यो रखे गये.....? इससे स्पष्ट होता है कि कलेक्ट्रेड मे पदस्थ नाजिर के पुत्र व उनके सहयोगी फर्मो से इनकी सांठगांठ हो गई थी ओर इस पर कलेक्टर का भी वृहद हस्त अपने नाजिर को षडयंत्र के रुप मे मिल रहा था तभी वह इतना बडा दुस्साहस कर रहा था। इसकी शासन स्तर पर उच्चस्तरीय जांच कलेक्टर द्वारा नाजिर के माध्यम से की गई खरीदी की होना नितांत आवश्यक है।




-एक प्रश्न चिन्ह हो सकता हैं गुलाबी बिल्डिंग की गोपनीयता पर भी 





अब तो बाजारों में यह भी जन चर्चा का विषय हो गया है कि वर्तमान में भाजपा की सरकार है और सरकार आते ही अधिकारियों कर्मचारियों की मनमानी शुरू हो गई है,जिसका ताजा उदाहरण है नाजिर और उसके बेटे की फर्म द्वारा मनमाने सामग्री के मूल्यों को टेंडर में कोट करना। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और रतलाम झाबुआ से सांसद भी भाजपा से है तो इस तरह इस विपदा के समय में जिला प्रशासन द्वारा अधिक मूल्य पर सामग्री खरीदी की जांच सांसद द्वारा क्यों नहीं करवाई गई......? क्यों नहीं जनहित में अधिक दरों की खरीदी को रोका गया..... ? क्यों नाजिर के बेटे की फर्म को अधिक दरों के बिलों का भुगतान संभवत: किया जा रहा है .....? यह भी बाजारों में जन चर्चा का विषय बनता जा रहा है की जब टेंडर में नाजिर अपने पुत्र को सामग्री के आर्डर इतने अधिक दरों में दिला सकता है तो गुलाबी बिल्डिंग की गोपनीयता पर भी एक प्रश्न चिन्ह हो सकता हैं। 




-किया जाना चाहिए कोरोना योद्धा के पुरस्कार से सम्मानित 





लोगों का यह भी कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान आपदा प्रबंधन समिति द्वारा सामग्री खरीदी में संभवत: झाबुआ जिला प्रदेश में अधिक दरों में (25-200 प्रतिशत अधिक) सामग्री खरीदी करने करने वाले जिलों में प्रथम पायदान पर होगा । जिसके लिए इन्हें सम्मानित किया जाना चाहिएं। बुद्धिजीवियों का यह भी कहना है कोरोना महामारी के कारण विपदा की इस समय मैं फर्म बाबा इंटरप्राइजेज और उसके संचालक को मानवता की मिसाल पेश करने के लिए और 25 प्रतिशत  से लेकर 200प्रतिशत तक अधिक दरें , टेंडर प्रक्रिया में दरे देने के लिए कोरोना योद्धा के पुरस्कार से सम्मानित किया जाना चाहिए। साथ ही आपदा प्रबंधन समिति के सदस्यों को भी कोराना योद्धा के साथ-साथ किसी पुरस्कार अलंकरण से भी सम्मानित किया जाना चाहिए।  ताकि जिले को विपदा के समय इस तरह अधिक दरों में सामग्री खरीदने के लिए वर्षों तक याद किया जाए और इनकी सेवाओं को कभी ना भुला जाए। 




-भावसार ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग 





 भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य पूर्व जिलाध्यक्ष दौलत भावसार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि आपदा प्रबंध के नाम पर जितनी भी झाबुआ जिला प्रशासन ने खरीदी की है उसकी उच्चस्तरीय जांच कर उन वस्तुओ की गुणवत्ता की जांच करने पर यदि वह गलत पाई जाती है तो उनके खिलाफ  कार्यवाही की मांग की है। साथ ही यह भी जांच की मांग की है कि बाजार मूल्य से इतनी अधिक दरों पर खरीदी क्यों की गई ....? क्या मध्य प्रदेश शासन इस और ध्यान देकर जिले में आपदा प्रबंधन के समय सामग्री खरीदी की दरों की कोई जांच करेगा या फिर यह अधिकारी कर्मचारी यूं ही जिले की जनता को भ्रमित करते रहेंगे और अपने निजी हितों को साधते रहेंगे ...... ?




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