बड़वानी~दो दिन में हुई 4 इंच वर्षा जो वार्षिक औसत का है 12.62 प्रतिशत~~

बड़वानी / बड़वानी जिले में विगत दो दिनो में सम्पूर्ण जिले में औसत रूप से लगभग 4 इंच ( 94.2 मिलीमीटर ) वर्षा हुई है जो वार्षिक औसत वर्षा 746.3 का 12.62 प्रतिशत है। जबकि गत वर्ष आज ही के दिन तक जिले के किसी भी क्षेत्र में वर्षा नहीं हुई थी। निसर्ग तूफान के कारण जिले में हो रही इस वर्षा से किसानों के चेहरे खिल उठे है, वे जोर - शोर से खेती - किसानी के कार्य में लग गये है।
भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार पिछले 24 घण्टों में  वर्षामापी केन्द्र बड़वानी में 97 मिलीमीटर, पाटी में 56 मिलीमीटर, ठीकरी में 60 मिलीमीटर, राजपुर में 84 मिलीमीटर, सेंधवा में 104 मिलीमीटर, चाचरियापाटी में 102 मिलीमीटर, वरला में 91 मिलीमीटर, पानसेमल में 60 मिलीमीटर, निवाली में 102 मिलीमीटर वर्षा हुई है।
अधीक्षक भू-अभिलेख श्री मुकेश मालवीया से प्राप्त जानकारी अनुसार इन दो दिनो में हुई अच्छी वर्षा के कारण अभी तक बड़वानी में कुल 115 मिलीमीटर, पाटी में 86 मिलीमीटर, ठीकरी में 63 मिलीमीटर, राजपुर में 94 मिलीमीटर, सेंधवा में 105 मिलीमीटर, चाचरियापाटी में 116 मिलीमीटर, वरला में 93 मिलीमीटर, पानसेमल में 66 मिलीमीटर, निवाली में 110 मिलीमीटर वर्षा हो चुंकी है।
श्री मालवीया ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि मानसून प्रारंभ होने के प्रथम दो दिनो में औसत वर्षा 746.3 मिलीमीटर की 12.62 प्रतिशत वर्षा हो चुकी है। उन्होने बताया कि इन दो दिनो में बड़वानी में औसत 515.1 मिलीमीटर की 22.33 प्रतिशत, पाटी में औसत 684 मिलीमीटर की 12.57 प्रतिशत, ठीकरी में औसत 779.7 मिलीमीटर की 8.08 प्रतिशत, राजपुर में औसत 763.5 मिलीमीटर की 10.88 प्रतिशत, सेंधवा में औसत 811.8 मिलीमीटर की 12.93 प्रतिशत, चाचरियापाटी में औसत 825 मिलीमीटर की 14.06 प्रतिशत, वरला में औसत 811.8 मिलीमीटर की 11.45 प्रतिशत, पानसेमल में औसत 703.4 मिलीमीटर की 9.38 प्रतिशत, निवाली में औसत 901 मिलीमीटर की 12.20 प्रतिशत वर्षा दो दिनो में ही हो गई है।
किसान भाई अभी सिर्फ करें खेत की तैयारी
उपसंचालक कृषि श्री केएस खपेड़िया ने बताया कि जिले में हो रही यह वर्षा निसर्ग तूफान के कारण हो रही है, अभी जिले में मानसून की वर्षा नही आई है। अतः किसान भाई अभी बुवाई न करें । इस तूफानी वर्षा का उपयोग अपने खेत की तैयारी हेतु करें, इसके तहत वे अपने खेतो में गहरी जुताई करके ढेले तोड़कर खेत तैयार करें, जिससे समय पर उन्हें अपनी बुवाई करने में सहुलियत मिले । इसके साथ ही उन्होने किसान भाईयों को सलाह दी है कि वे अपनी आवश्यकता का खाद - बीज का भण्डारण भी अपने खेत - खलिहान में कर ले। जिससे बाद में उन्हें इसके लिये भटकना न पड़े ।


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