*मनावर ~गुजरात के केवड़िया से 6 गांवों के आदिवासियों का विस्थापन गुजरात एवं केन्द्र सरकार रोकें नहीं तो राजधानी दिल्ली में होगा आंदोलन ऐतिहासिक आंदोलन जयस राष्ट्रीय सरंक्षक एवं विधायक डॉ. हीरालाल अलावा*~~                               

*राष्ट्रीय जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन के बैनर तले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की गूगल मीट सम्पन*~~

निलेश जैन मनावर ~~

राष्ट्रीय जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन के बैनर तले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की गूगल मीट 31 मई को कि गई। जिसमें गुजरात के केवड़िया से 6 गांव के आदिवासियों को कोरोना वायरन महामारी के दौर में अपनी जमीन से जबरदस्ती बेदखली किया गया साथ ही  पांचवी अनुसूची से अनुसूचित 10 राज्यों में से अधिकांश प्रदेश जैसे मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड सबसे अधिक विस्थापन की मार झेल रहे हैं। उसमें भी सबसे ज्यादा आदिवासियों को ही अपनी जमीनों से बेदखल बिना पुनर्वास एवं स्पष्ट नीति से नही किया जा रहा है। मीटिंग में राष्ट्रीय जयस संरक्षक मनावर से विधायक डॉ. हीरालाल अलावा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों एवं 10 राज्यों के प्रदेश प्रभारियों सहित देश के वरिष्ठ बुद्धिजीवी समाज सेवियों के साथ गूगल मीट के माध्यम से बैठक कि गई। सदस्यों ने कहा कि पीड़ितों से मिलने    जाने पर गिरफ्तारी किये जाने पर भी अंतोस रोश जताया गया। सभी सदस्यों    के द्वारा गुजरात राज्य में केवड़िया के आदिवासियों के विस्थापन पर डॉ. हीरालाल अलावा ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि गुजरात एवं केंद्र सरकार से मांग की है कि यदि केवड़िया एवं किसी भी प्रदेश के आदिवासियों को उनके जल,जंगल एवं जमीन से जबरदस्ती बेदखल किया गया तो पूरे देश के आदिवासी समाज को विश्वास में लेकर एक मंच पर लाकर कोरोना संक्रमण महामारी से हालत सामान्य होने के पश्चात राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन देश की राजधानी दिल्ली में किया जाएगा। साथ ही विस्थापन से प्रभावित क्षेत्रों में पीड़ितों से मिलने भी जाने वाले है। जयस एवं अन्य समाजसेवी साथियों की गिरफ्तारी पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। केवड़िया जैसी घटना से देश के आदिवासी समुदाय बहुत आक्रोशित है।आदिवासियों के अधिकारों को दिलाने     व शोषण के खिलाफ सामुहिक रूप से प्रयास किया जायेगे। जयस द्वारा समाज हित में अब तक किए गए महत्वपूर्ण   कार्यों की समीक्षा भी की गई।जिसमें पांचवी अनुसूची से अनुसूचित समस्त राज्यों में पांचवी अनुसूची वन अधिकार अधिनियम पेसा कानून के संवैधानिक प्रावधानों का धरातल पर क्रियान्वयन हेतु संबंधित राज्यों के राज्यपाल जो कि उस प्रदेश की जनता    के संरक्षक होते हैं। आदिवासियों दलित पिछड़ों एवं विकास की आखिरी पंक्ति में खड़े आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण की मांग पुरजोर तरीके से उठाई गई। साथ ही देश के आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, पलायन, बेरोजगारी उनके ऊपर होने वाले अन्याय, अत्याचार,शोषण के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक रूप से प्रयास तेज करने का संकल्प पारित किया गया। 


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