सरदारपुर~विधायक ग्रेवाल देंगे भ्रष्ट पवैया व डोडवे पर कार्यवाई के निर्देश या करेंगे प्रतिनिधित्व~~

मनरेगा योजना मे भ्रष्टाचार का नंगा नाच, भाजपा नेता भूमिगत, मजदूर हुए मजबूर~~

सरदारपुर  (शैलेन्द्र पँवार)

यूँ तो कैन्द्रीय सरकार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार ग्यारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत देश के ग्रामीण बेरोजगारो को रोजगार देने कि उद्देश्य पूर्ति के लिये प्रतिवर्ष कई लाखो करोड़ों रूपये खर्च कर रही है लेकिन ये योजना भी सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र क्रमांक 196 मे दम तोड़ती दिखाई दे रही है! भ्रष्टाचार कि भेट चढ़ी इस योजना अंतर्गत प्रतिवर्ष सरदारपुर विधानसभा क्षैत्रांतर्गत करीब 45 लाख कि लागत तक के करीब 30 से 50 तालाबों का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग (आरईएस) सरदारपुर द्वारा किये जाते है जिसका मूल उद्देश्य ग्रामीण जनता को रोजगार देना होता है लेकिन ऐसा नही होकर गैरकानूनी ढंग से क्षैत्रिय जनप्रतिनिधियों के दाँये बाँये या फर्जी पत्रकारो से साँठगाँठ कर मौखिक ठेकेदारी ऐसे दे दी जाती है जैसे ये उन भ्रष्टाचारीयो कि पुस्तेनी संपदा हो! फिर होता है ग्रामीण क्षैत्रो में भ्रष्टाचार का नंगा नाच और छिन लिया जाता है गरीबों के मुँह का निवाला! ऐसा भी नहीं है कि भ्रष्टाचार के शिकार हुए बैबस, बैसहारा, लाचार, मज्लूम गरीब ग्रामीण किस से न्याय कि गूहान ना लगाते हो लेकिन ऐसे ग्रामीण न्याय कि तलाश मे इस हद तक हताश हो चुके होते है कि वे न्याय मिलने कि उम्मीदें ही खौ चूके होते है!
        विचारणीय बिन्दू ये है कि जब हकदारो को मनरेगा योजना मे लाभ ही नही मिल रहा है तो आखिर माॅनिटरींग अधिकारी कितनी जिम्मेदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे है ये भी स्पष्ट है! ऐसी व्यवस्था को देख ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जैसे सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र मे जंगलराज चल रहा है और सांसद, विधायक जैसे जनप्रतिनिधि गरीब ग्रामीणों का हितैषी होने की नोटंकी मात्र करते हो जो चुनाव के वक्त तो "हमुँ काका बाबा ना पौरीया" जैसे सूर अलापते देखे जाते है और चुनाव के बाद उन्हीं गरीबों का शोषण भी करते है तथा अपने आपको बहुत ईमानदार होने का दिखावा करते है! चलो हम ये भी मान लेते है कि आप बहुत ईमानदार जनप्रतिनिधि हो लेकिन समझ तो हमें ये नहीं आ रहा है कि फिर आपको इन गरीबों कि आवाज बनने से इतना परहैज क्यों है?
       दरअसल इन दिनों सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग (आरईएस) द्वारा मनरेगा अंतर्गत करोड़ों रूपयै मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्यपूर्ति हेतु स्वीकृत किये गये है जिसके लिये कई ग्राम पंचायतों मे लाखों रूपयो के 35 से अधिक निस्तार तालाब भी स्वीकृत किये गये है किन्तु इन कार्यों मे भ्रष्ट अधिकारी व जिम्मेदार उपयंत्री राजैश पवैया ने बंदरबाट मचा रखी है! एक नेताजी के इशारे पर कुछ कार्डछाप पत्रकार एवं छूट भय्यै फोटोछाप नेताओं को निस्तार तालाब निर्माण कि मौखिक जिम्मेदारी देकर मौटा कमीशन वसूलने कि तैयारीयाँ हो चुकी है इधर दिन मे कुछ गीने चुने मजदूरों के फोटो खिंचकर मजदूरों को रोजगार देने के झूठे दावे किये जा रहे है और रात के अंधेरे में धड़ल्ले से जेसीबी व पोखलेन मशीन दौड़ाई जा रही है! आश्चर्य कि बात तो ये है कि जब मीडीयाकर्मी  एसडीओ अजमेर डोडवे से एक तालाब पर बाइट लेने पहुँचे तो कैमरे पर कुछ भी कहने से स्पष्ट इंकार करते हुए आरईएस के मुख्य कार्यपालन यंत्री से चर्चा करने को कहने लगे तथा फर्जी ठेकेदारों से कार्य करवाने के सवाल पर आरईएस मे ठेकेदारी का प्रावधान नहीं होने का हवाला देने लगे, अरे एसडीओ डोडेवे साहेब हम भी तो यही कह रहे थे कि जब ठेकेदारी का प्रावधान नहीं है तो ये जो आपके विभाग के नही होकर काम करने वाले लोग कोन है और आपकी साइड पर क्या कर रहे? इन पर प्रकरण दर्ज क्यों नहीं करवाते और इन साइड पर से उपयंत्री महोदय कहां गायब हो जाते है? जब जेसीबी से कार्य चल रहा होता है, उस समय कहा गायब हो जाते हो, जब ग्रामीणजन जेसीबी बंद करवाने पहुँचें होते है!

ऐसे होती है माॅनिटरींग:-
       ऐसे ही कुछ मामले ग्राम पंचायत सोनगढ़, ग्राम पंचायत हनुमन्त्या काँग, ग्राम पंचायत टिमाइची आदि के प्रकाश मे आये है! ग्राम पंचायत हनुमन्त्या काँग  कि बात करे तो यही के एक स्थानीय छोटोछाप नेता जो क्षैत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल का करीबी माना जाता है और इसी बैस पर अधिकारीयो से साँठगाठ कर भीमा बाँ वाला नाला नामक निस्तार तालाब निर्माण का मौखिक ठेका लेकर अपनी ही पंचायत के गरीबों के "पेट पर लात मारने" मे कोई कसर नही छोड़ रहा है जो दिन दहाड़े जेसीबी मशीन क्रमांक एम.पी.11 जी.0430 से कार्य कर रहा था जिसका स्थानीय लोगों ने विडीयो बनाकर मजदूरों से कार्य करवाने कि माँग की तथा जेसीबी मशीन को बंद करवाया इसी क्रम मे कुछ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर समाचार प्रसारित किये तो विधायक जी के एक करीबी फोटोछाप नेता ने बीकाऊ मीडीया से माध्यम से चंद मजदूरों को निर्माण स्थल पर खड़ाकर फोटो खीचाकर भ्रामक समाचार प्रकाशित करके बताया कि मजदूर कार्य कर रहे है जबकि  इलेक्ट्रॉनिक मीडिया मे प्रसारीत समाचार मे जेसीबी मशीन से कार्य करते स्पष्ट दिखाई दे रहा है ऐसे में बीकाऊ मीडिया अपनी विश्वसनीयता को तो खतरे मे तो डाल ही रहा है वरन गरीब मजदूरों की आवाज बनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का कार्य कर रहे है! जिम्मेदार अधिकारीयो कि कार्यशैली तो तब संदेह के खेरे मे आ पड़ी जब जेसीबी मशीन से कार्य किये जाने के समाचार प्रकाशित होने के बावजूद भी फर्जी मस्टर भर दिये जाते है! ऐसे मे सवाल ये उत्पन्न होते है कि आखीर एसडीओ अजमेर डोडवे एवं कार्यपालन यंत्री संजय सोलंकी  किस प्रकार मनरेगा योजना कि माॅनिटरींग कर रहे है! ग्रामीणजनो एवं मीडिया ने एसडीओ अजमेर डोडवे को अवगत करवाते हुए जेसीबी के विडीयो भी बताये लेकिन डोडवे ने ना तो वर्क आर्डर लाॅक किया और ना ही जेसीबी को जब्त कर राजसात कि कार्यवाई कि इससे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सरदारपुर के एसडीओ अजमेर डोडवे कि कार्यप्रणाली स्पष्ट कर रही है कि वे भ्रष्टाचार को किस प्रकार बढ़ावा दे रहे है!
        ऐसा नही है कि मनरेगा योजना मे केवल उपयंत्री ही भ्रष्टाचार को अंजाम देता है बल्कि जिला मुख्यालय तक पूरे "कुएँ मे भाँग घूली" हुई दिखाई दे रही है ऐसा इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि तालाबों कि बनी हुई पाल को देख ग्रामीणजन उसके मुल्यांकन को चुनौती दे सकते है तो वरीष्ठ अधिकारीयो को गलत मुल्यांकन क्यों नहीं दिखाई दे रहा है और कैसे लाखों रूपयो का भुगतान फर्जी तरीके से कर दिया जाता है! ऐसी परिस्थितियों मे क्षैत्रीय मजदूरों को अपना अधिकार नही मिलने कि दशा मे पलायन करने को विवष होना पड़ता है जिससे उनके बच्चों को उचित शिक्षा प्राप्ति मे नाना प्रकार की बाँधाए उत्पन्न होती है!
        ग्राम पंचायत सोनगढ़, ग्राम पंचायत टीमाईची, ग्राम पंचायत हनुमन्त्याकाँग मे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग द्वारा तालाब निर्माण जेसीबी मशीन से धड़ल्ले से किया गया व किया जा रहा है! ग्राम पंचायत सोनगढ तो बबूल वाला नाका, मडींग वाला नाला नामक निस्तार तालाब का जेसीबी मशीन से निर्माण करते हुए इतना भ्रष्टाचार मचा रखा है कि शिकायतकर्ताओ कि आवाज को भी चंद टटपुन्जीये फर्जी ठेकेदार दबाने का प्रयास भी कर रहे है! ग्रामीण जनता को रोजगार उपलब्ध कराने वाली कैन्द्रीय सरकार कि मनरेगा योजना इन दिनों सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र मे दम तोड़ती नजर आ रही है! इस योजना अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग यानी आरईएस विभाग सरदारपुर द्वारा ग्राम पंचायतों मे तालाब निर्माण कार्य किये जा रहे है लेकिन  ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग सरदारपुर के उपयंत्री राजेश पवैया के संरक्षण के चलते तथा बैरोजगार ग्रामीणों को रोजगार देकर निर्माण स्थल पर उपयंत्री के मौजूद रहने के बजाय छूट्ट भय्यै ठेकेदारों को बीना किसी प्रावधानों के मौखिक ठेके दिये जा रहे है! परीणाम सामने ये आ रहे है कि तालाबों के घटीया निर्माण मशीनों से कर दिये जा रहे है! यही कारण है कि सरकारी खजाने से सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र मे करोड़ों-अरबों रूपयै फूँक देने के बावजूद शीतऋतु व ग्रीष्मऋतु मे किसानों को सिंचाई जल के लिये जद्दोजहद करना पड़ती है! प्रतिवर्ष आरईएस विभाग सरदारपुर द्वारा जनपद पंचायत क्षैत्रांतर्गत इसी प्रकार तालाब निर्माण किये जाते है किन्तु परीणाम स्वरूप बारीश खत्म होते ही जल संग्रह देखने को नहीं मिलता, बावजूद इसके आरईएस विभाग "राख में घी डालने" वाली कहावत को चरीतार्थ करने मे कोई कसर नही छोड़ रहा है तथा फर्जी ठेकेदार व उपयंत्री गरीबों का हक मारकर अपनी जेब गरम करते ही जा रहे!
      गौरतलब है कि नियमों के विपरीत बनाये जा रहे इन तालाबों का मुल्यांकन भी गलत तरीके से करके जवाबदार अधिकारी अपनी जैब गरम तो कर ही रहे है लेकिन जनप्रतिनिधियो कि चुप्पी भी इस ओर इशारा तो देती है कि कहीं ना कहीं वे भी गरीबों का हक ठकारने वाली इस लूटेरी टोली का हिस्सा है क्योंकि जनप्रतिनिधि बैदाँग होते तो ऐसे मामले संज्ञान में आते ही जेसीबी मशीन राजसात कि कार्यवाई करवाने के साथ वर्क आर्डर लाॅक के लिये अढ़ चुके होते जैसे कुछ दिनों पूर्व गंधवानी विधायक उमंग सिंगार ने खूद मौके पर पहुँच दो जेसीबी व एक पोखलेन मशीन राजसात कि कार्यवाई हेतु अमझेरा पुलिस थाने पर खड़ी करवा डाली! ग्रामीण जनता भी सरदारपुर विधानसभा क्षैत्र के विधायक से ये उम्मीद लगाये बैठी है कि उमंग सिंगार कि भाँति वे भी अपनी विधानसभा क्षैत्र मे ऐसी कार्यवाई कर सिद्ध करें कि वे बैदाँग है, अब ये तो विधायक प्रताप ग्रेवाल कि कार्यप्रणाली से ही स्पष्ट हो पायेगा वे सही मायनो मे जनता के प्रतिनिधि है या उक्त टोली के?
        इधर उपयंत्री राजेश पवैया ने भ्रष्टाचार कि गंगा बहाना तो ऐसे प्रारम्भ की, कि "ना खाता ना बही, जो पवैया कहे वो सही"! यदी विगत दो वर्षों मे इस योजना अंतर्गत उपयंत्री राजेश पवैया द्वारा बनाये गये तालाबों का पुनर्मुल्यांकन किया जाये तो सरकार को करोड़ों रूपयै पुनः वसूल करने के आदेश जारी करना पड़ेगा! बड़ी आश्चर्यजनक बात तो ये है कि प्रत्येक तालाब निर्माण के दौरान जागरूक ग्रामीण आरईएस विभाग के वरीष्ठ अधिकारीयो को अवगत भी करवाते है लेकिन ना जाने किस लाभ के चलते ग्रामीणों कि आवाज को दबा दिया जाता है! इस मर्तबा भी मीडिया के माध्यम से ग्रामीण जनता ने जिम्मेदार अधिकारियों एवं क्षैत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल को अवगत करवाया है कि ग्राम पंचायत सोनगढ़, हनुमन्त्याकाँग, टीमाईची, गुमानपुरा आदि स्थानों पर मनरेगा योजना में हो रहे निस्तार तालाब निर्माण मे मजदुरों के हक पर हाथ साँफ कर जेसीबी व पोखलेन मशीनों से कार्य किया जा रहा है! अब देखना ये होगा कि गरीबों व बैरोजगार ग्रामीणों का हितैषी होने का दावा करने वाले क्षैत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल इस भ्रष्टाचार के नंगे नाच पर कोई ठोस कदम उठाते हुए वर्क आर्डर लाॅक कर जेसीबी मशीन राजसात कि कार्यवाई करवा पायेगें या चुप्पी साधे उक्त लूटेरो की टोली को मौन स्वीकृति प्रदान कर हौसला बढ़ाते रहेंगे? बतायेगे आपको उपयंत्री राजेश पवैया के भ्रष्टाचार के इस नंगेनाच के अगले समाचार में!


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