झाबुआ~डॉ रामशंकर चंचल की ताजा कृति "महुआ" अंतराष्ट्रीय स्तर पर~~



झाबुआ। संजय जैन~~

प्रख्यात साहित्यकार डॉ रामशंकर चंचल की ताजा कृति महुआ को नई दिल्ली से प्रकाशित प्रख्यात अंतराष्ट्रीय पत्रिका आखर ने प्रकाशित किया।अंतराष्ट्रीय स्तर पर चयन समिति ने महुआ का चयन किया महुआ आंचलिक सजीव जीवंत कथा हैं।

महुआ का पेड़ कालूबा की जिंदगी थी उसकी रोजी-रोटी थी एक दिन उसका भाई वेलु ने पेड़ को लेकर विवाद किया। अंत में उसने गुस्से में आकर पेड़ को काट दिया कालूबा रोते रहें और उसने वेलु को पुलिस में जाने की धमकी दी । भयभीत वेलु ने जिस कुल्हाड़ी से पेड़ को काटा था। उसी कुल्हाड़ी से कालूबा को काट दिया। कहानी बेहद मार्मिक जीवंत और कालजयी है । यही वजह है कि अंतराष्ट्रीय  चयन समिति ने डॉ रामशंकर चंचल की इस कहानी को अंतराष्ट्रीय पत्रिका के लिए चयनित किया । सचमुच यह गर्व का विषय है कि झाबुआ के रचनाकार डॉ चंचल की रचना अंतराष्ट्रीय स्तर पर आज चर्चित हो रही है।


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