झाबुआ~जिला चिकित्सालय के शासकीय आवासो में हो चल रही हैराफेरी~~

निजी मकान होने के बाद भी कर्मचारियो को अलांट किये सीएमएचओ साहब ने शासकीय आवास नियमो को हवाला देकर खुद ही उडा रहे धज्जियां ~~

झाबुआ। सैया भय कोतवाल तो अब डर काहे का , की कहावत कही ना कही सच में चरितार्थ होते नजर आ रही है। जिसमें कर्मचारी अपने आप को अधिकारी से बडा मान अपने काम को आसानी से करवा रहा है। जबकि शासकीय कार्यो में देखा जाता है कि काम निकलाने के लिये कितने पापड बेलने पडते है। यहि नही अधिकारियो से कितनी मिन्नते करनी पडती है। तब जाकर कही बात बनती है। लेकिन जिला चिकित्सालय में कुछ अलग ही मामला सामने आ रहा है। पूर्व मे हमारे द्वारा अखबार के माध्यम से बताया गया था कि जिला चिकित्सालय के पिछे बने शासकीय आवासो में वर्तमान में बहुत बडा गोलमाल चल रहा है। यही नही जब इस गोलमाल की खबर अधिकारियो को दी तो वे उल्टा हमसे ही सबुत मांगने लग गये। जबकि यदि किसी व्यक्ति की शिकायत होती है तो विभाग की जिम्मेदारी रहती है कि वह जांच करे ओर सच्चाई का पता लगाये। लेकिन यहा तो उल्टा ही है जब अधिकारी को सच्चाई के बारे मे बताया गया तो वे उल्टा ही सबुतो की माला जपने लग गये। क्योकि उन्हे मालूम है कि कर्मचारी का दबदबा उनसे अधिक है। इसलिये उस पर सिधे जांच नही बैठा सकते। इसके लिये अभी तक उस कर्मचारी पर कोई कार्यवाही नही हुई।





-करीब 1 करोड से अधिक की लागत का बेशकिमती बंगला बना हुआ
जिला अस्पताल में कार्यरत स्टीवर्ड द्वारा वर्तमान में इन्दौर अहमदाबाद रोड पर शासकीय आवासीय कॉलोनी मे करीब 1 करोड से अधिक की लागत का बेशकिमती बंगला बना हुआ है। लेकिन बावजूद इसके उसे शासकीय जिला चिकित्सालय में शासकीय आवास आंवटित किया जा चुका है। इस बारे में जब जांच पडताल की गई तो मालूम हुआ की स्टीवर्ड साहब तो सीएमएचओ साहब को जिला अस्पताल से कमाई कर दे रहे है। वही सीएमएचओ साहक का तो यहा तक कहना था कि मेरे द्वारा यहां से निकला नही जाता है। वो जानकारी हमारे सामने प्रस्तुत होती है तो हम उसे ही सच मान लेते है। वही उनके समक्ष जो साक्ष प्रस्तुत की गये उस आधार पर उन्होने उससे खुश होकर शासकीय आवास आवंटित कर दिया।





-मुझे कोविड-19 मे इमरजेन्सी ड्यूटी करना पडती है 
पूर्व मे जब इस खबर की जंाच पडताल की गई थी तो श्रीमान के द्वारा कहा गया था कि मुझे कोविड-19 मे इमरजेन्सी ड्यूटी करना पडती है जिस पर से रात मेें 11 से 12 बजे तक काम करना पडता है। जबकि श्रीमान ने अपने अंडर दो से तीन कर्मचारी ओर रख रखे है। जिसमें एक सीएमएचओ कार्यलय के बाबू को लिखा पडी का कार्य दे रखा है ओर दूसरी एक युवती को कम्प्यूटर का कार्य करने के लिये रख लिया है। जिसकी सैलेरी ना जाने किस मद मे निकल रही है।





-स्वयं के मकान किराये पर चढा कर शासकीय आवासो पर कब्जा कर रखा
ऐसा एक नही कई कर्मचारियो की सैलेरी जिला चिकित्सालय में कार्य कर रहे श्रीमानो के द्वारा निकाली जा रही है। वही कुछ तो जिला चिकित्सालय मे ड्यूटी पर ही नही आ रहे तो उन्हे भी सैलेरी दी जा रही है। ये कैसा राम राज्य है कुछ कहा नही जा सकता। इसके अलावा श्रीमान के अलावा कई ओर कर्मचारीगण भी है जिनके स्वयं के मकान बने हुये ओर उन्होने किराये पर चढा कर शासकीय आवासो पर कब्जा कर रखा है। इनमे कई तो बाबू है ओर कई तो चतूर्थ श्रेणी कर्मचारी हैै। जिन्होने मुद्रा राक्षस के दम पर शासकीय आवास आंवटित करवा रखे है।





-स्वास्थ्य विभाग दे रहा नियमो की दूहाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में पूर्व स्टीवर्ड स्व. श्री सेम्लेकर जो की स्टीवर्ड पद पर थे केा शासकीय आवंटित हुआ था। जिसे आज एक चतूर्थ श्रेणी कर्मचारी को अलॉट कर रखा है। जिसमे वो व्यक्ति अपनी मॉ के साथ ही उत्कृष्ट मैदान मे रहता है। ओर यह कहकर की मेरे नाम से कोई भी मकान नही है। बात इतनी ही की यदि प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी, तृतीय श्रेणी एवं चतूर्थ श्रेणी को शासकीय आवासो का आवंटन यदि सैलेरी के ग्रेड पे के अनुसार ही मकानो के अलांटमेन्ट किया जाता है। लेकिन नियमो के विपरित ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियो के द्वारा शासकीय आवासो का आंवटन किया जा रहा है। वही तृतीय कर्मचारी के आवास को प्रथम श्रेणी कर्मचारी को अलांट किया ओर द्वितिय श्रेणी कर्मचारी के आवास को चतूर्थ श्रेणी कर्मचारी को अलांट कर दिया गया। इसमे नियमो को कहा देखा गया वही सभी नियमो को तांक पर रखकर उनकी धज्जियां उडा दी गई।





-कर्मचारी भटक रहा आवास के लिये
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला चिकित्सालय में कार्यरत चतूर्थ श्रेणी कर्मचारी नितिन को पूर्व मे शासकीय आवास आंवटित किया गया था। लेकिन जर्जर मकान होने के कारण सभी आवासो को नवनिर्मित किया गया। वही सभी तृतीय श्रेणी कर्मचारियो के द्वारा मुद्रा रक्षक को बढाकर अपने अपने स्तर पर शासकीय आवासो को हडप लिया गया। जिसमे ये चतूर्थ श्रेणी कर्मचारी नितिन का पूर्व में बाय पास सर्जरी भी हुई है जिसमे उसका करीब ढेड से दो लॉख तक का खर्च हुआ हैै। वही इस कर्मचारी से भी आवास आवंटन के बदले मे मुद्रा राक्षक की मांग की गई थी। लेकिन सक्षम नही होने के कारण आज तक उस कर्मचारी को शासकीय आवास नही मिल पाया है। उसे यह कहकर टाल दिया गया है कि रिटायर्ड कर्मचारी का खाली हो जायेगा तो उसे मिल जायेगा जो कि पूराना मकान है। भविष्य में वे मकान भी टूटने वाले है। जिस पर से उसे ये कहकर टाल दिया गया है कि वो सैलेरी मे ग्रेड पे कम है इसके लिये यदि कोई मकान भविष्य मे खाली होता है तो ही उसे मिल पायेगा अन्यथा नही। आखिर स्वास्थ्य विभाग दिग्गजो के द्वारा शासकीय आवासो मे खेल कर मुद्रा राक्षक बढाने वालो को ही सर्वप्रथम आवास आवंटित किये गये। ये बात अेार है कि इस का कोई साक्ष या प्रमाण नही है लेकिन जिसने भी यह जानकारी दी है उसने अपना नाम गोपनिय रखने की शर्त पर ही संपूर्ण जानकारी दी है।





-विभाग की ओर से क्या कार्यवाही होती है?
अब देखना यह है कि उक्त शासकीय आवासो मे हो रहे फर्जीवाडे को लेकर स्वास्थ्य विभाग कितना सचेत रहता है ओर आगामी दिनो मे विभाग की ओर से क्या कार्यवाही होती है। 




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