बाकानेर~नींद आती नहीं बैठे-बैठे गमों का हिसाब लगा लेता हूं, और कल होगा एक नया सवेरा बस यही सोच कर खुद को हर रोज  सुला  लेता हूं ~सैयद रिजवान अली~~


चल जिंदगी अब एक नई शुरुआत करते हैं , क्योंकि उम्मीद है, ऊपर वाले से की वह एक दिन बिगड़ी किस्मत को संवार देगा,  फिर यह खुशी हमसे रूठ कर किधर जायेगी, ग़म न कर ज़िन्दगी यूँ ही गुज़र जायेगी  ।
ऊपर वाले तू ने काहे को अमीर और गरीब बनाए,तकदीर से लेकर सपने भी अलग क्यों बनाएं । अमीर दौलत और शोहरत  के सपने देखता है , यह अमीर लोग गरीबों का मजाक उड़ाने में भी नहीं चूकते , एक किलो आटा देते हैं ,और सौ तस्वीरें खिंचवाते हैं, इसको इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप से लेकर फेसबुक तक डालते हैं ,वहीं गरीबों  का सपना , इस बार बरसात में छत पर नई प्लास्टिक खरीद के डाल दूंगा बारिश का पानी घर में नहीं टपकेगा , चाय बेच बेच कर कुछ पैसे बचा लूंगा और अपनी  बेटी का एडमिशन इस बार अच्छे स्कूल में करवा लूंगा । यह फर्क होता है ,अमीरों और गरीबों  के सपनों में ।
वहीं दूसरी ओर अमीर मंदिर के अंदर जाकर भगवान से भीख मांगते हैं, और गरीब मंदिर के बाहर बैठकर इन अमीरों से भीख मांगते हैं , मेरे गरीब भाइयों  से कहूंगा, मांगना है ,तो ऊपर वाले से मांगो । अमीरों के लिए तो सिर्फ एक ही मिसाल है ,जब बीमारी से दिल लगा डरने ,तो  खैरात लगी बटने। अब हम बात करते हैं हमारे छोटे व्यापारियों की जो लॉक डाउन खुलने का इंतजार कर रहे थे,  लॉक डाउन खुलते ही छोटे व्यापारियों ने फिर से कारोबार शुरू करने की कोशिश  कर रहे हैं, अभी बहुत सारे छोटे कारोबारी  सरकार की ओर ताक रहे हैं , शायद उनको भी दुकानें खोलने की इजाजत मिल जाए ,जैसे  चाय के ठेले  लगाने वाले , पान की गुमटी लगाने वाले , समोसे कचोरी बेचने वाले, हेयर सैलून वाले । इनके  इतने छोटे  व्यापार है, अगर  दूसरे शब्दों में बोले रोज़  कुआं खोदना और रोज़ पानी निकाल कर पीना । पिछले 80 दिनों से घर पर बैठे हैं, अब तो छोटे व्यापारी दाने दाने के लिए मोहताज हो गए हैं , इनके पास केवल एक ही रास्ता बचा है। किसी के सामने हाथ फैला कर भीख मांगे , यह वह छोटे व्यापारी है जो मेहनत करके अपने परिवार का बहुत मुश्किल से भरण पोषण करते हैं , चाय  वालों को उम्मीद थी की हमारे प्रधानमंत्री इनका दुख दर्द समझेंगे,  क्योंकि हमारे प्रधानमंत्री ने भी चाय बेची है , प्रधानमंत्री  को मालूम है ,चाय वाले किस तरह अपना जीवन यापन करते हैं, पर अफसोस दारु की दुकाने   खुल  गई , शॉपिंग मॉल खुल गए ,बड़े बड़े रेस्टोरेंट खुल गए, पर चाय, पान  और  हेयर सैलून वालों का दुख दर्द किसी नेता ने नहीं  समझा । मेरा एक परिचित चाय वाला है ,जब उसके घर में खाने के फाके होने लगे , तो उसकी पत्नी ने अपना मंगलसूत्र निकाल कर दिया और  पति से बोली जाओ इसको गिरवी  रख दो  और पैसों से घर का राशन  लेते हुए आ जाना, बेचारा चाय वाला साहूकार की दुकान पर गया साहूकार ने 15 सौ रुपए  2% ब्याज पर दिए , और वह राशन खरीदने के लिए अपने बेटे    के साथ  मोपेड पर निकला । रास्ते में ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोका दो सवारी के नाम पर 500 रुपए का चालन  काट दिया , वह रोता हुआ पुलिस से विनती करता रहा  पर पुलिस वालों का दिल नहीं पसीजा । मुझको यह बात समझ में नहीं आई 80 दिन के लॉक डाउन के बाद जब आदमी घर से बाहर निकलता है, अपने व्यापार को शुरू करने के लिए,तो उसकी जेब खाली  होती है  और चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस हाथों में डंडा लेकर गाड़ियों को रोक रोक कर चालानी कार्रवाई करते हुए  देखी जा सकती है , उनको इस बात का एहसास होना चाहिए की आदमी 80 दिन से घर पर बैठा है ,उसकी जमा पूंजी धीरे-धीरे खत्म हो गई अब वह व्यापार व्यवसाय के लिए घर से बाहर निकल रहा है, उसके ऊपर चालानी कार्यवाही कहां तक उचित है , यह तो वही मिसाल हुई सर मुंडाते ही ओले बरसना ।  यह वही चाय वाले हैं जो दिन भर मेहनत करते हैं ,आप की एक आवाज पर  आपकी दुकान पर चाय परोसते है ,झूठे ग्लास आपके धोते हैं ,बदले में उनको मिलते हैं, केवल 5 रूपय ।
वहीं सरकार  गरीबों एवं छोटे व्यापारियों के लिए दुहाई देती रहती है , आज इन छोटे व्यापारियों के बारे में सरकार नहीं सोच रही हैं , अगर सरकार नहीं सोचेगी इन छोटे व्यापारियों  के लिए तो कौन सोचेगा । इन  छोटे व्यापारियों के लिए यही बोलूंगा जिसका कोई नहीं होता उसका तो खुदा होता है यारों ।
*जो गरीबी में पलते जा रहे हैं।*
*वही दुनिया बदलते जा रहे हैं।*


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